December 03, 2016

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चीनी माल के विरोध के बीच लोकप्रिय होता स्वदेशी मेला

देश में स्वदेशी सामान को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली में पहली बार इस मेले का आयोजन किया गया है।

Author नई दिल्ली | October 23, 2016 05:03 am
चीनी झालर।

पश्चिमी दिल्ली के द्वारका में पिछले पांच दिनों से चल रहा स्वदेशी मेला भले ही आज खत्म होने वाला हो, लेकिन इस मेले को लेकर लोगों में आकर्षण बढ़ रहा है। 19 अक्तूबर से शुरू हुए इस मेले का आयोजन स्वदेशी जागरण मंच ने किया है। हाल ही में उड़ी में पाकिस्तानी आतंकवादियों के हमले के बाद भारत का साथ नहीं देने के कारण चीन के प्रति लोगों में गुस्सा बढ़ रहा है। लोग अपनी नाराजगी चीन के सामान का विरोध करके निकाल रहे हैं। ऐसे में देश में स्वदेशी सामान को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली में पहली बार इस मेले का आयोजन किया गया है।

दीपावली को देखते हुए मेला आयोजकों ने मिट्टी के बर्तन, तीन वॉट के सोलर एलईडी शो-पीस, तरह-तरह के चित्र वाले पॉट, रंगोली, मोमबत्तियां, हैंडीक्राफ्ट का सामान, पूजा की सामग्री व लक्ष्मी गणेश की मूर्तियां आदि बिक्री के लिए रखी हैं। हालांकि स्वदेशी सामान कीमत के मामले में फिलहाल चीन के सामान का मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं। आम बाजारों में चीन के सामान की कीमत कम है। जैसे मिट्टी के बर्तन यहां पर 150 से 300 रुपए में बिक रहे हैं। सोलर एलईडी शो-पीस की कीमत 150 से लेकर 2000 हजार रुपए तक है। रंगोली 100 से 300 रुपए में मिल रही है। वहीं हैंडीक्राफ्ट का का सामान 150 रुपए से लेकर 2000 हजार रुपए में मिल रहा है।

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मेले में आने वाले खरीदारों का भी अलग ही वर्ग है। मेले में आर्इं पश्चिम विहार की रोहिणी ने कहा कि दीपावली पर वे हर साल खरीदारी करती हैं, लेकिन उन्हें नहीं पता कि वे लक्ष्मी गणेश की स्वदेशी मूर्तियों की पूजा करती हैं या फिर चीन से आई हुई मूर्तियों की। उन्होंने कहा कि इस मेले में वे खासतौर पर भगवान की मूर्तियां और उनकी तस्वीरें खरीदने आई हैं। रोहिणी ने कहा कि हो सकता है कि वे यहां पर चीन के सामान से ज्यादा कीमत दे रही हों, लेकिन उनके मन में इतना तो संतोष है कि वे भारतीय सामान खरीद रही हैं। पंजाबी बाग क ी सीमा भी यहां पर स्वदेशी सामान की खरीदारी करने आई हैं। उन्होंने कहा कि देश में चीन के सामान का विरोध चल रहा है और वह भी उसमें शामिल हैं।

कहा कि इस बार दीपावली पर वे पूरी कोशिश करेंगीं कि भारतीय सामान ही खरीदें। उन्होंने बताया कि मेले में उन्होंने दीए और मिट्टी के बर्तन खरीदे हैं।
स्वदेशी मेले के आयोजक और स्वदेशी जागरण मंच के प्रदेश संयोजक सुशील पांचाल ने बताया कि यह मेला फिलहाल एक शुरुआत है। इस तरह के मेले आगे देशभर में लगाए जाएंगे। हम लोग चीन का विरोध फिलहाल वहां के बने सामान को न खरीदकर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उड़ी हमले के बाद स्वदेशी चीजों के प्रति एक नई लहर शुरू हुई है। मंच के दिल्ली प्रवक्ता संजय उपाध्याय ने कहा कि इस मेले में महिलाओं में चीनी सामान के प्रति खासी नाराजगी देखने को मिली है। मेले में महिलाएं बढ़चढ़ कर स्वदेशी सामान की खरीदारी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि मेले की सफलता को देखते हुए उन्हें लग रहा है कि स्वदेशी के प्रचार का उनका मिशन रफ्तार पकड़ रहा है।

 

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First Published on October 23, 2016 5:03 am

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