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NGT का सुझाव: अमरनाथ गुफा को बनाओ ‘साइलेंस जोन’, नारियल/प्रसाद फेंकने पर बैन से रुकेगा हिम-स्‍खलन

एनजीटी ने अमरनाथ के आस पास पर्यावरण से जुड़े खतरे के प्रति चिंता जताते हुए कहा है कि इस मामले में 2012 में दिया गया सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर अबतक क्यों नहीं लागू किया गया है।
NGT ने गुफा के आसपास प्रसाद को फेंकने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

वैष्णो देवी दर्शन के लिए प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या निश्चित करने के बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सुझाव दिया है कि अमरनाथ गुफा के आस पास के इलाके को साइलेंस जोन घोषित किया जाए। एनजीटी का मानना है कि इस इलाके में आवाज की वजह से ही यहां पर हिम स्खलन और लैंड स्लाइड की घटनाएं होती है। साइलेंस जोन घोषित करने के बाद इस इलाके में होने वाली हिम स्खलन की घटनाओं को रोका जा सकेगा। एनजीटी ने यह भी सुझाव दिया है कि बाबा अमरनाथ की गुफा के पास नारियल तोड़ने पर बैन लगाया जाना चाहिए। यही नहीं यहां पर प्रसाद फेंकने पर रोक लगायी जानी चाहिए। एनजीटी ने पूछा है कि इस इलाके में मौजूद अतिरिक्त दुकानों और खुले शौचालयों को अबतक बंद क्यों नहीं किया गया है? नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने अमरनाथ की पर्यावरण सुरक्षा के लिए एक कमेटी भी नियुक्त की है। ये कमेटी पर्यावरण की सुरक्षा के अलावा यहां बुनियादी विकास को भी देखेगी।

एनजीटी ने अमरनाथ के आस पास पर्यावरण से जुड़े खतरे के प्रति चिंता जताते हुए कहा है कि इस मामले में 2012 में दिया गया सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर अबतक क्यों नहीं लागू किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश में इलाके की सुरक्षा के उपाय बताये थे। एनजीटी ने ये सुझाव एक याचिका की सुनवाई के दौरान दिये। इससे पहले राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने वैष्णो देवी में प्रत्येक दिन भक्तों की संख्या 50 हजार तय कर दी थी। एनजीटी के आदेश के मुताबिक जिस दिन 50 हजार से ज्यादा भक्त वैष्णो देवी पर चले जाएंगे, बाकी बचे यात्रियों को कटरा या अर्द्ध कुमारी में रोक लिया जाएगा। इसके अलावा एनजीटी ने श्राइन कॉम्लेक्स के अंदर सारे निर्माण पर भी रोक लगा दिया था।

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