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फर्जी डिग्री मामला: प्रो-वीसी भी पुलिस जांच के घेरे में, AAP के पूर्व मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर ने कभी नहीं की क्लास

एलएलबी के दिए गए इम्तहान और दूसरी जगह किए दस्तखत तोमर के हस्ताक्षर से कोई मेल नहीं खाते।
Author भागलपुर | September 15, 2016 07:56 am
दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर ।

दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री और आप विधायक जितेंद्र सिंह तोमर की एलएलबी की कथित फर्जी डिग्री मामले की जांच करने आई दिल्ली पुलिस टीम बुधवार को लौट गई। थाना हौजखास के एसएचओ सतिंदर सांगवान ने बताया कि भागलपुर तिलकामांझी विश्वविद्यालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों की भी अनदेखी की है। प्रतिकुलपति प्रो.अवध किशोर राय कुलसचिव डा आशुतोष प्रसाद से भी जांच दल ने पूछताछ की। मुंगेर की वीएनएस इंस्टीट्यूट आफ लीगल स्टडीज के कर्मचारियों को भी विश्वविद्यालय गेस्ट हाउस बुला कर दिल्ली पुलिस ने गहन पूछताछ की। प्रतिकुलपति प्रो अवध किशोर राय इस मामले की जांच के लिए विश्वविद्यालय की बनी आंतरिक समिति के संयोजक हैं। सांगवान ने बताया कि कि किसी दूसरे विश्वविद्यालय का छात्र किसी और विश्वविद्यालय के कालेज में दाखिला लेता है, तो माइग्रेशन सर्टिफिकेट की दरकार होती है। और यह दाखिले के बाद ज्यादा से ज्यादा दो महीने के अंदर जमा करना जरूरी है। मगर तोमर के मामले में सभी नियम ताक पर रख दिए गए।

जितेंद्र सिंह तोमर ने मुंगेर के विश्वनाथ सिंह इंस्टीट्यूट आफ लीगल स्टडीज में 1994-1998 सत्र में दाखिला लिया था। मगर उनका भागलपुर विश्वविद्यालय पंजीकरण 2001 में हुआ। और तो और जांच पड़ताल के दौरान यह भी पाया गया कि तोमर ने कभी क्लास नहीं की। जबकि उन्होंने बतौर नियमित छात्र की हैसियत से दाखिला लिया था। ऐसा तोमर से हुई पूछताछ में पता चला था। फर्जी डिग्री का खेल और मिलीभगत इस बात को भी दर्शाती है कि माइग्रेशन सर्टिफिकेट झांसी के बुंदेलखंड विश्वविद्यालय का, बैचलर आॅफ सांइस के इम्तिहान में सफल होने का अंकपत्र अवध विश्वविद्यालय लखनऊ के फैजाबाद की कालेज का भागलपुर विश्वविद्यालय में दाखिला लेने के वक्त जमा किया। इस पर परीक्षा विभाग ने कभी कोई जांच नहीं की और चुपचाप इसे सच मान लिया गया।

दिलचस्प बात कि एलएलबी के दिए गए इम्तहान और दूसरी जगह किए दस्तखत तोमर के हस्ताक्षर से कोई मेल नहीं खाते। एसएचओ सांगवान बताते हैं कि तमाम रेकॉर्ड तहस नहस और तोड़े मरोड़े गए हैं। पुलिस टीम ने 1992 से लेकर डिग्री देने तक परीक्षा महकमे में काम कर चुके अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची समेत सभी रिकॉर्ड जब्त कर साथ ले गई। विश्वविद्यालय में बकरीद की तीन रोज से छुट्टी है। मगर परीक्षा महकमा दिल्ली पुलिस की छानबीन के वास्ते खासकर खोला गया। परीक्षा नियंत्रक डा अरुण कुमार सिंह समेत कई कर्मचारी ड्यूटी पर तैनात मिले। उन्होंने बताया कि मामला पुराना है। मेरे समय का नहीं है, लेकिन डिग्री की जांच और अवलोकन से तो दाल में काला जाहिर होता है। इनसे भी जांच दल ने दाखिले और पंजीयन की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी हासिल की।हौजखास थाने के एसएचओ के मुताबिक छानबीन कई दौर में होनी है। तोमर फर्जी डिग्री घोटाले से भागलपुर विश्वविद्यालय के नए पुराने अधिकारियों और कर्मचारियों यहां तक कि कुलपति की सांसत फिलहाल कम होने वाली नहीं है। हो सकता है कि जल्द ही पुलिस टीम शक के घेरे में आए लोगों को दिल्ली ले जाकर गहन पूछताछ करे। ऐसा इशारा एसएचओ सतिंदर सांगवान ने किया है।

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