December 07, 2016

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AAP सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा: शुंगलू रिपोर्ट पर जल्दबाजी में नहीं की जाए कोई कार्रवाई

पिछले महीने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में दिल्ली मंत्रिमंडल ने एक प्रस्ताव पारित कर उप राज्यपाल को शुंगलू समिति भंग करने की सलाह दी थी।

Author नई दिल्ली | November 28, 2016 15:15 pm
उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट)

आप सरकार ने सोमवार (28 नवंबर) को उच्चतम न्यायालय से कहा कि शीर्ष अदालत में लंबित दिल्ली-केंद्र के बीच विवाद पर कोई फैसला आने तक शुंगलू समिति की रिपोर्ट पर कोई ‘जल्दबाजी में कार्रवाई’ नहीं की जानी चाहिए। न्यायमूर्ति ए के सिकरी और ए एम सप्रे की पीठ ने कहा कि शुंगलू समिति के पहलू पर पांच दिसंबर को विचार किया जाएगा। इसी दिन मामले पर विस्तृत सुनवाई होनी है। दिल्ली सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम ने कहा कि शुंगलू समिति ने अपनी रिपोर्ट उप राज्यपाल को सौंपी है और इस रिपोर्ट को लेकर कई आशंकाएं हैं। उन्होंने कहा, ‘शुंगलू समिति की रिपोर्ट पर रोक लगायी जाये ताकि इस पर जल्दबाजी में कोई कार्रवाई नहीं की जा सके।’

केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने कहा कि रिपोर्ट रविवार (27 नवंबर) ही जमा की गई है और इसमें क्या है यह किसी को नहीं पता है। पीठ ने कहा कि सभी मुद्दों पर पांच दिसंबर को विचार किया जाएगा। उपराज्यपाल नजीब जंग ने आप सरकार के फैसलों से संबंधित 400 फाइलों की जांच के लिए शुंगलू समिति का गठन 30 अगस्त को किया था। समिति के अध्यक्ष पूर्व नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक वी के शुंगलू थे। इसमें दो अन्य सदस्यों में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपालस्वामी और पूर्व मुख्य सर्तकता आयुक्त प्रदीप कुमार शामिल थे। उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दिल्ली सरकार की अपील पर सुनवाई से 15 नवंबर को शीर्ष अदालत के एक न्यायाधीश ने खुद को अलग कर लिया था। उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में उप राज्यपाल को प्रशासनिक प्रमुख बताते हुये कहा था कि सभी प्रशासनिक फैसलों में उनकी पूर्व अनुमति जरूरी है।

शीर्ष अदालत ने कहा था कि सभी अंतरिम आवेदनों पर एक साथ विचार किया जाएगा। न्यायालय ने गत नौ सितंबर को दिल्ली उच्च न्यायालय के चार अगस्त के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इंकार कर दिया था और आप सरकार की सात अपीलों पर केंद्र से छह हफ्ते में जवाब मांगा था। उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली की निर्वाचित सरकार के पिछले आदेशों और 400 फाइलों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन करने के उप राज्यपाल नजीब जंग के फैसले पर रोक लगाने से भी इंकार कर दिया था। दिल्ली सरकार ने गत दो सितंबर को उच्चतम न्यायालय को बताया था कि उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुये उसने याचिकाएं दायर की हैं। दिल्ली सरकार ने इसके साथ ही उसने राष्ट्रीय राजधानी को पूर्ण राज्य घोषित करने संबंधी दीवानी मुकदमा वापस ले लिया था।

पिछले महीने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में दिल्ली मंत्रिमंडल ने एक प्रस्ताव पारित कर उप राज्यपाल को शुंगलू समिति भंग करने की सलाह दी थी और तर्क दिया था कि इस तरह फाइलों की कुर्की से सरकार का कामकाज बाधित हो रहा है। उप राज्यपाल ने समिति भंग करने के दिल्ली सरकार के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था। उन्होंने समिति को छह हफ्ते का विस्तार देते हुये कहा था, ‘इन फाइलों में छिपे सच’ को बाहर आना ही चाहिए। समिति का कार्यकाल दो दिसंबर को खत्म होना है। यह समिति दिल्ली सरकार की फाइलों में अनियमितताओं और खामियों के पहलुओं की जांच कर रही है।

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First Published on November 28, 2016 3:15 pm

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