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बिजली कंपनियों की मनमर्जी के आगे बेबस है आप सरकार

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार की निजी बिजली कंपनियों की ओर से की जा रही मनमर्जी के आगे चल नहीं पा रही है। दिल्ली में जगह-जगह इन दिनों घंटों बिजली की कटौती हो रही है...
Author June 22, 2015 10:55 am
दिल्ली में बिजली आपूर्ति करने वाली खासतौर पर दो ही कंपनियां हैं। एक एनडीपीएल और दूसरे बीएसईएस।

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार की निजी बिजली कंपनियों की ओर से की जा रही मनमर्जी के आगे चल नहीं पा रही है। दिल्ली में जगह-जगह इन दिनों घंटों बिजली की कटौती हो रही है। निजी बिजली कंपनियां राजधानी में बिजली के दाम बढ़ाने में भी कामयाब रही हैं। आम आदमी पार्टी की सरकार की ओर से निजी बिजली कंपनियों को दिए जा रहे निर्देश अब तक गीदड़ भभकी ही साबित हुए हैं। मौजूदा सरकार से पहले 49 दिन की केजरीवाल सरकार के समय निजी बिजली कंपनियों के खिलाफ उठाए गए कदमों से निजी कंपनियां दहशत में आ गईं थीं।

दिल्लीवासियों को उम्मीद थी कि नई सरकार राजधानी में अपनी मनमर्जी चला रहीं निजी बिजली कंपनियों को लोगों को राहत देने के लिए पटरी पर ले आएगी। लेकिन चार माह गुजर जाने के बाद भी बिजली कंपनियों पर सरकारी दबाव बनाने की कोशिशें कुछ ज्यादा रंग नहीं ला पा रही हैं। दिल्ली में हाल ही में बढ़े बिजली के दाम और लगातार बिजली की कटौती से यह साफ हो गया है।

अब एक नजर डालें तो आप सरकार के 49 दिन के कार्यकाल में सरकार की ओर से बिजली के मामले में उठाए गए कदमों को देखें तो वे मौजूदा चार माह की सरकार से अलग ही थे। 49 दिन की केजरीवाल सरकार ने गद्दी पर बैठते ही बिजली की सबसिडी देकर दाम आधे करवा दिए थे। उस समय की सरकार बिजली कंपनियों के खिलाफ अदालत गई और वहां से इन कंपनियों के खातों का सीएजी से ऑडिट करवाने का आर्डर ले आई। उसी दौरान सीएजी ने निजी बिजली कंपनियों के खातों का ऑडिट भी शुरू कर दिया। उस दौरान बिजली की कटौती भी नाममात्र थी। जिन उपभोक्ताओं को लगता था कि उनके मीटर तेजी से भागते हैं, उनके मीटरों की जांच का कार्य किसी निष्पक्ष प्रयोगशाला से शुरू हो गया।

उस समय की सरकार ने बिजली के दाम भी नहीं बढ़ने दिए। निजी बिजली कंपनियों को बिजली आपूर्ति करने वाली एजंसियों ने निजी कंपनियों से राशि नहीं मिलने पर बिजली आपूर्ति नहीं करने की धमकी को भी आप पार्टी की 49 दिन की सरकार ने सफल नहीं होने दिया। उस दौरान की सरकार निजी कंपनियों के खिलाफ मुकदमों की तैयारियां कर ही रही थी कि दिल्ली में जनलोकपाल बिल के मुद्दे पर गद्दी छोड़ दी।

दिल्ली में करीब दस माह बाद फिर से आम आदमी पार्टी की सरकार आ गई और इस बार भी केजरीवाल सरकार ने दिल्लीवासियों को बिजली की सबसिडी दे दी, जिससे दिल्ली के बजट पर करीब दो हजार रुपए सालाना का बोझ आ गया। केजरीवाल सरकार ने सबसिडी को कुछ समय तक के लिए बताया और कहा कि वह कोई रास्ता निकालेगी कि दिल्ली में निजी कंपनियों को बिना सबसिडी दिए बिजली के दाम कम हो जाएं। केजरीवाल सरकार अभी बिजली के दाम कम करने की उधेड़बुन में लगी थी कि दिल्ली विद्युत नियामक आयोग(डीईआरसी) ने बिजली के दाम बढ़ाने की घोषणा कर दी।

दिल्ली में बिजली आपूर्ति करने वाली खासतौर पर दो ही कंपनियां हैं। एक एनडीपीएल और दूसरे बीएसईएस। दिलचस्प बात यह है कि राजधानी में एनडीपीएल ने 4 फीसद दाम बढ़ाने की घोषणा की और बीएसईएस नें 6 फीसद की। दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने कह दिया कि वह राजधानी में बिजली के दाम नहीं बढ़ने देगी। लेकिन यह सरकारी घोषणा उस समय हवाहवाई साबित हुईं जब दिल्ली में बिजली के दाम बढ़ गए। इसी तरह से निजी कंपनियों ने जगह-जगह बिजली कटौती भी शुरू कर दी।

अब हाल ही में केजरीवाल सरकार ने घोषणा की है कि वह अघोषित बिजली कटौती करने वाली कंपनियों के खिलाफ जुर्माना लगाएगी और उस रकम को संबधित उपभोक्ताओं के बिलों में एडजस्ट किया जाएगा। वैसे इसी तरह की घोषणा दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित सरकार ने भी की थी, लेकिन वह घोषणा भी अमल में नहीं आ पाई थी। मौजूदा में केजरीवाल सरकार उन्हें किस तरह से अमल में लाती है, यह उसके सामने एक बड़ी चुनौती है।

(नरेंद्र भंडारी)

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