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जेएनयू में एक मंच पर आई आम आदमी पार्टी और कांग्रेस, बीजेपी के खिलाफ जंग छेड़ने का ऐलान

आम आदमी पार्टी ने 2019 का लोकसभा चुनाव भाजपा के लिए आसान ना होने के संकेत दिए हैं।
नई दिल्‍ली स्थित जवाहर लाल नेहरू विश्‍वविद्यालय का प्रशासनिक भवन। (PHOTO: Express Archive)

जेएनयू में कुछ अन्य छात्रों के साथ झड़प के बाद परिसर से लापता हुए छात्र नजीब अहमद की गुमशुदगी को एक साल पूरे हो गए हैं लेकिन दिल्ली पुलिस से जांच अपने हाथ में लेने वाले केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के हाथ अब भी खाली हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने नजीब के रहस्यमयी हालात में गायब होने के मामले में पहले दिल्ली पुलिस पर जांच में तेजी लाने के लिए दबाव डाला। पुलिस की जांच की प्रगति से संतुष्ट नहीं होने पर अदालत ने इस साल 16 मई को जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दी थी। एमएससी बायोटेक्नोलॉजी का छात्र 27 वर्षीय नजीब 15 अक्तूबर 2016 को जेएनयू परिसर के माही-मांडवी हॉस्टल से लापता हो गया था। उसकी तलाश में परिवार के लोग अब भी जुटे हुए हैं। ऐसे में शुक्रवार (20 अक्टूबर) को नजीब की वापसी और भाजपा विरोध में धुर विरोधी पार्टियों की छात्र इकाई कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने मंच साझा किया। छात्र इकाईयों ने इस मंच को ‘यूनिट फ्रंट’ का नाम दिया है। इस दौरान मंच से भाजपा के खिलाफ बोलते हुए आप विधायक अलका लांबा ने कहा, ‘साल 2019 के लोकसभा चुनाव भाजपा के लिए आसान नहीं होंगे। अगले लोकसभा चुनाव देश के युवाओं द्वारा लड़े जाएंगे। जहां वो बेरोजगारी और विकास की कमी की बात करेंगे।’

वहीं कांग्रेस नेता मणि शंकर अय्यर ने कहा ने कहा कि सरकारी के एजेंसियां नजीब को वापस लाने में फेल हो गईं। हमें नहीं पता उस रात नजीब के साथ किया हुआ। उनसे सवाल क्यों नहीं पूछा गया जिनकी उस रात नजीब से लड़ाई हुई थी? इसका मतलब है कि वो कुछ छिपा रहे हैं। अय्यर ने उन 9 छात्रों का जिक्र करते हुए कहा, जिनकी उस रात नजीब से झड़प हुई थी, उसके बाद ही से नजीब गायब है। इस दौरान नजीब की बहन सदफ ने कहा कि जेएनयू के वाइस चांसलर ने उनके भाई को वापस लाने के लिए कुछ नहीं किया।

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