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20 साल में बनी थी दिल्‍ली और 86 साल पहले 13 फरवरी को ही बतौर राजधानी हुआ था उद्घाटन

दिल्ली से पहले कोलकाता भारत की आधिकारिक राजधानी थी।
कहा जाता है कि भौगोलिक परिस्थितयों के कारण ब्रिटिश सरकार ने दिल्ली से भारत का शासन चलाने का सोचा।

शायद आपको याद न हो लेकिन 13 फरवरी 1931 को तत्कालीन वायसरॉय और भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड इरविन ने नई दिल्ली का भारत की आधिकारिक राजधानी के तौर पर उद्घाटन किया था। हालांकि दिल्ली की आधारशिला 12 दिसंबर 1911 को दिल्ली दरबार के दौरान किंग जॉर्ज पंचम ने रखी थी। दिल्ली दरबार को इम्पीरियल दरबार भी कहा जाता था। यह साल 1877, 1903 और 1911 में आयोजित हुआ, लेकिन सिर्फ आखिरी दरबार में ही किंग जॉर्ज पंचम शामिल हुए थे।

क्यों दिल्ली ही बनाई गई राजधानी
कुछ रिपोर्ट्स कहती हैं कि बंगाल में बढ़ती हिंसा और राष्ट्रवादी बगावत से ब्रिटिश सरकार सावधान हो गई थी और उन्होंने बंगाल का विभाजन रोकने का विचार कर हिंसाग्रस्त क्षेत्र से बाहर आने का सोचा था। 12 दिसंबर 1911 को किंग जॉर्ज पंचम द्वारा दिल्ली को नई राजधानी बनाने की घोषणा से पूरा देश हैरान था। कहा जाता है कि भौगोलिक परिस्थितयों के कारण ब्रिटिश सरकार ने दिल्ली से भारत का शासन चलाने का सोचा। किंग जॉर्ज पंचम ने क्वीन विक्टोरिया की याद में 4 जनवरी 1906 को एक मेमोरियल की आधारशिला रखी थी। क्वीन विक्टोरिया का निधन 1901 में हुआ था। 1912 में जब राजधानी दिल्ली शिफ्ट हो गई तो विक्टोरिया मेमोरियल को 1921 में आम पब्लिक के लिए खोल दिया गया।

कर्जन ने किया था विरोध
25 अगस्त, 1911 को लिखे खत में तत्कालीन वायसरॉय लॉर्ड हार्डिंग ने नई राजधानी की जरूरत को लेकर शिमला से लंदन को एक खत भेजा। दूसरी ओर पूर्व वॉयसरॉय औक विक्टोरिया मेमोरियल के कमिश्नर लॉर्ड कर्जन ने इसका विरोध किया था। कर्जन ने ही बंगाल के विभाजन का फैसला लिया था। खास 1901 में 4 लाख की जनसंख्या के साथ दिल्ली एक छोटा नगर था। 2016 में दिल्ली की जनसंख्या 1.86 करोड़ के पार चली गई है।

इन्होंने किया था डिजाइन
नई राजधानी को डिजाइन करने का जिम्मा ब्रिटिश आर्किटेक्ट्स सर एडविन लुटियंस और सर हरबर्ट बेकर को सौंपा गया था। उन्होंने अपनी साइट के तौर पर शाहजहांनाबाद को छोड़ दक्षिणी मैदानी इलाके को चुना। इसमें पुरानी दिल्ली की तंग गलियों से उलट चौड़ी सड़कें थीं। इस इलाके को पहले पंजाब का एक प्रांत बनाया गया था, जिसका 1927 में नाम नई दिल्ली रखा गया था। लॉर्ड हार्डिंग को उम्मीद थी कि नई दिल्ली 4 वर्ष में तैयार हो जाएगी, लेकिन पहले विश्व युद्ध के कारण ब्रिटिश सरकार की नई राजधानी बनने में देरी हो गई। इसके 20 साल बाद, 1931 में नई दिल्ली का नई राजधानी के तौर पर उद्धाटन किया गया।

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