December 06, 2016

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दिल्ली में हर दिन होते हैं 6 बलात्कार

दिल्ली के नागरिकों में पुलिस के कामकाज के प्रति आस्था का अभाव चौंकाने वाला है।

Author नई दिल्ली | November 24, 2016 03:27 am
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

देश की राजधानी में हर दिन छह बलात्कार होते हैं। दिल्ली पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था के दावे की पोल खोलते एक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि 60 फीसद दिल्ली वाले यहां खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं। 67 फीसद लोग अपनी कालोनियों में बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों को लेकर असुरक्षित महसूस करते हैं। 29 फीसद लोग ही सूचना देने के बाद पुलिसिया कार्रवाई से संतुष्ट होते हैं।  सर्वेक्षण में दावा किया गया है कि दिल्ली में हर दिन छह बलात्कार, दो हत्या और लूट, सेंधमारी व चोरी की 215 वारदातों को अंजाम दिया जाता है। पूर्वोत्तर दिल्ली में बलात्कार और छेड़छाड़ के सबसे ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं। दावा है कि ये आंकड़े सूचना के अधिकार के तहत दिल्ली पुलिस के सभी 12 जिलों के उपायुक्तों से 163 थानों से मिली सूचना से इकट्ठा किए गए हैं।
शासन में उत्तरदायित्व और पारदर्शिता को पुनर्स्थापित करने के लक्ष्य से 1997 में शुरू हुए प्रजा फाउंडेशन ने बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस में दावा किया कि दिल्ली के सांसद इन आपराधिक वारदातों पर बहुत गंभीर नहीं दिखते क्योंकि उन्होंने मानसून सत्र 2015 से बजट सत्र 2016 के दौरान अपराधों से संबंधित केवल दस प्रश्न पूछे।

दिल्ली पुलिस के सुचारू कामकाज के लिए मान्यता प्राप्त राज्य सुरक्षा आयोग (स्टेट सिक्योरिटी कमीशन) प्रणाली जिसमें उपराज्यपाल, दिल्ली के मुख्यमंत्री, पुलिस आयुक्त, विपक्ष के नेता और अन्य पदाधिकारी शामिल होंगे, अभी बनाया जाना बाकी है। दिल्ली के अपराध पर जारी इस वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार 2014 में बलात्कार के 2075 मामले दर्ज कराए गए जबकि 2015 में यह संख्या बढ़कर दो हजार 338 पर पहुंच गई। इससे इतर सेंधमारी के दर्ज मामले चौंका देने वाले थे और यह आंकड़ा 2015 में 13 हजार 577 था। इसके बाद लूट और डकैती की दर्ज कराई गई शिकायतों की संख्या 8067 पर पहुंच गई।फाउंडेशन के संस्थापक व प्रबंध न्यासी निताई मेहता ने बताया कि दिल्ली पुलिस के कार्मिकों के खिलाफ 2015 में 12 हजार 913 शिकायतें दर्ज कराई गर्इं और चौंकाने वाला परिणाम यह रहा कि इन दर्ज शिकायतों में केवल सात में ही पुलिस वालों पर अभियोगपत्र जारी किया गया। हालांकि 1057 पुलिसवालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई जरूर की गई। मेहता ने कहा कि हमें नीतियों में परिवर्तन करने के लिए सरकार पर दबाव डालना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में कानून और व्यवस्था को सुधारने के लिए पहले ही पुलिस सुधारों की एक सूची तैयार की हुई है। उन सुझावों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। हमारे चुने गए प्रतिनिधियों को भी दिल्ली में कानून और व्यवस्था के मुद्दों में सक्रिय और सतत दिलचस्पी दिखाने की जरूरत है। दिल्ली में सभी तबकों के लोगों के करीब 29 हजार 950 परिवारों के बीच यह सर्वेक्षण किया गया। आंकड़ों के मुताबिक, यह पता लगता है कि 60 फीसद जनता दिल्ली में खुद को सुरक्षित नहीं मानती। 67 फीसद का मानना है कि दिल्ली महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है और 64 फीसद दिल्ली के अंदर घूमने में असुरक्षित महसूस करते हैं।

इसके अलावा दिल्ली के नागरिकों में पुलिस के कामकाज के प्रति आस्था का अभाव चौंकाने वाला है। क्योंकि केवल 25 फीसद लोग ऐसे हैं जिन्होंने किसी अपराध को झेला है पर पुलिस को सूचित नहीं किया है। फाउंडेशन के परियोजना निदेशक मिलिंद महस्के ने कहा कि लोग राज्य से अपनी सुरक्षा की उम्मीद खोते जा रहे हैं। दिल्ली के सांसदों की निराशाजनक रुचि इस बात की गवाह है। उन्होंने दिल्ली में अपराध और पुलिस की भूमिका के बारे में बजट सत्र 2014 से बजट सत्र 2015 में केवल नौ प्रश्न उठाए और मानसून सत्र 2015 से बजट सत्र 2016 में दस प्रश्न उठाए। शहर में कानून और व्यवस्था की स्थिति को सुधारने के लिए कुछ समाधान का वादा किया गया था जैसे कि गलियों में पर्याप्त लाइटें लगाना ताकि महिलाएं अपनी गलियों में सुरक्षित महसूस कर सके। अंतिम छोर तक संपर्क व्यवस्था, सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को संभव बनाना और न्यायपालिका की ओर से बेहतर प्रतिक्रिया एवं तेज फैसले महिलाओं को न्याय प्रदान करेगा।

 

 

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First Published on November 24, 2016 3:27 am

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