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जल आपूर्ति से संबंधित 151,118 शिकायतें हुई दर्ज, प्रतिनिधियों ने कुल 179 मुद्दों को उठाया: रिपोर्ट

प्रजा फाउंडेशन ने दिल्ली नगर निगम एवं दिल्ली की राज्य सरकार द्वारा दिल्ली जल (पानी) बोर्ड के माध्यम से उपलब्ध कराई गयी नागरिक सुविधाओं की स्थिति पर अपनी रिपोर्ट जारी की।
रिपोर्ट जारी करते वक्त प्रजा फाउंडेशन के प्रबंध न्यासी निताई मेहता और प्रजा फाउंडेशन के परियोजना निदेशक मिलिंद म्हस्के मौजूद रहे।

प्रजा फाउंडेशन ने दिल्ली नगर निगम एवं दिल्ली की राज्य सरकार द्वारा दिल्ली जल (पानी) बोर्ड के माध्यम से उपलब्ध कराई गयी नागरिक सुविधाओं की स्थिति पर अपनी रिपोर्ट जारी की। प्रजा फाउंडेशन उत्तरदायी शासन को सक्षम करने की दिशा में काम करता है। यह रिपोर्ट 16 सितंबर को जारी की गई थी। इस मौके पर प्रजा फाउंडेशन के प्रबंध न्यासी, निताई मेहता और प्रजा फाउंडेशन के परियोजना निदेशक, मिलिंद म्हस्के मौजूद रहे। रिपोर्ट का सार बताते हुए मेहता ने कहा कि दिल्ली शहर में शासन के बुनियादी ढांचे के समग्रतः पुनर्गठन की आवश्यकता बढ़ रही है, और इस बात पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली को एक नागरिक-केन्द्रित सरलीकृत शासन व्यवस्था की जरूरत है, जो जिम्मेदारी, पारदर्शिता एवं कुशलता से नागरिकों की समस्याओं के समाधान में सक्षम हो। मेहता ने कहा कि दिल्ली में राजनीतिक नेतृत्व में परिपक्वता की कमी स्पष्ट तौर पर दिखाई देती है और अब तक इस मुद्दे के समाधान की दिशा में कोई पहल नहीं की गई है। इस शहर के नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए शहरी शासन से संबंधित विभिन्न समस्याओं के समाधान हेतु इसके संरक्षकों को सहयोगात्मक प्रयास की दिशा में कदम बढ़ाने होंगे तथा नागरिकों के जीवन को आसान बनाने के लिए सतत प्रयास करना होगा।

कार्यक्रम के दौरान निताई मेहता ने कहा, ‘इस शहर के शासी अधिकारीगण अपने-अपने अधिकार-क्षेत्र के लिए संघर्षरत है और सत्ता के लिए होने वाले इस निरंतर संघर्ष के कारण राज्य की शासन-व्यवस्था एवं विकास के कार्य अवरुद्ध हो चुके हैं, जिसका दुष्परिणाम केवल यहाँ के नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।’

मिलिंद म्हस्के ने कहा, ‘औसतन एक नागरिकों को मुख्यतः तीन बातों से सरोकार होता है: (i) कुशल नागरिक सेवाएँ; (ii) जब वह प्रदत्त सेवाओं के साथ किसी तरह की समस्या का सामना करता/करती है – तो ऐसे में एक शिकायत निवारण तंत्र, जिसतक पहुँचना आसान हो तथा जहां वह अपनी शिकायत दर्ज करा सकता/सकती है और साथ ही उसकी समस्या का निवारण निर्धारित समय सीमा में किया जाता है; (iii) पारदर्शी एवं जवाबदेह अधिकारी तथा उत्तरदायी निर्वाचित प्रतिनिधि [ईआर]।’ म्हस्के ने आगे कहा, ‘एक तरफ निर्वाचित प्रतिनिधि स्पष्ट तौर पर अपनी पूरी क्षमता के साथ इस मंच का उपयोग नहीं कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ एक और विकट समस्या मौजूद है। दिल्ली नगर निगम, राज्य सरकार और केन्द्र सरकार – मेयर, मुख्यमंत्री और एलजी -इस शासन-व्यवस्था की विभिन्न परतों का उपयोग एक ढाल के रूप में कर रहे हैं तथा सभी एक-दूसरे पर दोषारोपण कर रहे हैं और अपनी जिम्मेदारियों से दूर भाग रहे हैं।’

इस मौके पर कुछ आकड़ें भी दिखाई दी गए। वे निम्नलिखित थे

जल आपूर्ति से संबंधित समस्याओं के संदर्भ में 151,118 शिकायतें दर्ज की गई थी, जबकि हमारे निर्वाचित प्रतिनिधि द्वारा केवल 179 मुद्दों को उठाया गया (2014-2015 के दौरान वार्ड समितियों में पार्षदों तथा 2015 के सत्र में विधायकों द्वारा नागरिकों के मुद्दों संबंधी उठाए गए मुद्दे)।
• मलजल निकास व्यवस्था के संबंध में 64,534 शिकायतें दर्ज की गई थी, जबकि इस संबंध में केवल 114 मुद्दों को उठाया गया था।
• अनधिकृत निर्माण के संबंध में 82,127 शिकायतें दर्ज की गई थी, जबकि इस संबंध में केवल 532 मुद्दों को उठाया गया था।
• जल निकासी व्यवस्था में अवरोध एवं रुकावटों के संबंध में 25,351 शिकायतें दर्ज की गई थी, जबकि इस संबंध में केवल 146 मुद्दों को उठाया गया था।
• आवारा कुत्तों, बंदरों, आदि के उपद्रव के संबंध में 40,005 शिकायतें दर्ज की गई थी, जबकि इस संबंध में केवल 375 मुद्दों को उठाया गया था।
• मच्छरों के उपद्रव एवं धुंध के संबंध में 13,529 शिकायतें दर्ज की गई थी, जबकि इस संबंध में केवल 234 मुद्दों को उठाया गया था।

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