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ओपन स्कूलिंग के जरिए आगे पढ़ सकेंगे 10वीं में फेल विद्यार्थी

एनआइओएस का फायदा यह है कि एक तो इसका पाठ्यक्रम आसान है और दूसरा यहां बच्चों को के्रडिट मिल जाता है।
Author नई दिल्ली | August 30, 2017 00:49 am
स्कूल जाते बच्चे (फाइल फोटो)

दिल्ली सरकार ने 10वीं कक्षा में दो या उससे ज्यादा बार फेल हुए विद्यार्थियों की शिक्षा एनआइओएस (नेशनल स्कूल आॅफ ओपन स्कूलिंग) के जरिए पूरी करवाने का फैसला किया है। ऐसे विद्यार्थियों को एनआइओएस में दाखिला दिलवाकर अलग-अलग केंद्रों पर कक्षाएं चलाई जाएंगी। वहीं 1 सितंबर को दिल्ली के सरकारी स्कूलों में अभिभावक-शिक्षक बैठक (पीटीएम) आयोजित की जा रही है, जिसमें सरकार की ओर से माता-पिता दोनों से मौजूद रहने का आग्रह किया गया है। इसके साथ ही कैबिनेट ने शिक्षा गारंटी ऋण योजना के लाभ का दायरा बढ़ाने का भी फैसला किया है।

मंगलवार को हुई दिल्ली कैबिनेट की बैठक में शिक्षा संबंधी कुछ अहम फैसले लिए गए। बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा, ‘वैसे तो ऐसा कुछ लिखित में नहीं है लेकिन सच यह है कि 10वीं में दो बार फेल होने के बाद विद्यार्थी को दाखिला नहीं मिल पाता है और उसका स्कूल छूट जाता है। यह स्थिति सरकारी और निजी दोनों स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के साथ है। अभी तक ऐसा ही होता था, लेकिन पिछले साल हमने एक प्रयोग किया, जिसमें 10वीं में फेल हुए बच्चों को सीबीएसई के पत्राचार के माध्यम से पढ़ाया। बाकी बच्चों की तरह उनकी कक्षाएं चलीं और नियमित बच्चों की तरह सुविधाएं भी दी गर्इं। इसके बावजूद सीबीएसई मुख्य और सीबीएसई पत्राचार से विफल हुए करीब 55 हजार छात्र हैं जिन्हें एनआइओएस से पढ़ाने का फैसला किया गया है’। सिसोदिया ने कहा कि कैबिनेट ने फैसला लिया है कि इसके लिए अलग-अलग केंद्र बनाए जाएंगे, इन बच्चों का दाखिला तो एनआइओएस से होगा, लेकिन पढ़ाई कक्षाओं में कराई जाएगी और नियमित बच्चों की तरह सभी सुविधाएं उन्हें मिलेंगी। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि एनआइओएस का फायदा यह है कि एक तो इसका पाठ्यक्रम आसान है और दूसरा यहां बच्चों को के्रडिट मिल जाता है।

मसलन, अगर कोई बच्चा सीबीएसई पत्राचार में दो विषयों में पास हुआ है तो उसे यहां केवल तीन विषयों में ही पास होने की जरूरत होगी। मनीष सिसोदिया ने कहा कि लड़कियों के लिए ज्यादा सेंटर खोले जाएंगे ताकि उन्हें पढ़ाई के लिए दूर न जाना पड़े। उन्होंने कहा कि दसवीं पास करना सामाजिक और व्यावसायिक कारणों से जरूरी है, इसलिए इस कदम से बच्चों को लाभ होगा। इसके साथ ही कैबिनेट ने शिक्षा गारंटी ऋण योजना के लाभ का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है। अब दिल्ली से पास होकर देश के किसी भी सरकारी संस्थान में पढ़ाई करने पर इस योजना का लाभ मिल सकेगा। अब तक यह योजना दिल्ली से पास होकर दिल्ली के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ने वालों को ही मिलता था, जिसके तहत उच्च और तकनीकी शिक्षा के लिए 10 लाख रुपए तक का ऋण मिलता था, सरकार ने एक ट्रस्ट बनाया है जो इस ऋण की गारंटी देता है। उपमुख्यमंत्री ने एक सितंबर को होने वाली पीटीएम के लिए सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले सभी बच्चों के माता-पिता से उपस्थित रहने का आग्रह किया है।

 

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