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सफाईकर्मियों की मौत पर विधानसभा में हंगामा, मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपए और दी जाएगी एक नौकरी

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की घोषणा की जानकारी देते हुए कहा कि पिछले पंद्रह दिनों में जिन सात सफाई कामगारों की मौत हुई है उनके परिजनों को 10-10 लाख रुपए और एक सदस्य को सिविल डिफेंस में नौकरी दी जाएगी।
Author नई दिल्ली | August 9, 2017 01:38 am
इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

दिल्ली विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन मंगलवार को सदन में सीवर की सफाई के दौरान तीन सफाई कर्मियों की मौत का मुद्दा गूंजा। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इस मुद्दे पर जवाब देते हुए कहा कि सरकार ने सभी मृतक सफाई कर्मियों के परिजनों को 10-10 लाख रुपए की राशि और एक सदस्य को सिविल डिफेंस में नौकरी देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार सुबह मृतकों के परिवारों से मुलाकात कर यह घोषणा की थी। उधर विपक्ष इस मुद्दे पर काम रोको प्रस्ताव पर चर्चा और सदन में मुख्यमंत्री की मौजूदगी की मांग करता रहा, लेकिन लगभग डेढ़ घंटे के हंगामे के बाद दो विपक्षी नेताओं को सदन से बाहर करवा दिया गया।

सदन की कार्यवाही दिवंगत मजदूरों की मौत पर शोक संवेदना जताने के साथ शुरू हुई। विपक्ष के काम रोको प्रस्ताव की मांग पर उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा, ‘यह स्थायी आदेश है कि किसी भी हालत में सफाई कर्मी को सीवर में नहीं उतारा जा सकता, सीवर की सफाई मशीनों के जरिए होनी चाहिए, इसके बावजूद ठेकेदार ने कैसे किसी को अंदर उतारा इसकी जांच की जा रही है। दोषी ठेकेदारों और आदेश जारी करने वाले अधिकारियों को सख्त सजा दी जाएगी’। उन्होंने सदन को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की घोषणा की जानकारी देते हुए कहा कि पिछले पंद्रह दिनों में जिन सात सफाई कामगारों की मौत हुई है उनके परिजनों को 10-10 लाख रुपए और एक सदस्य को सिविल डिफेंस में नौकरी दी जाएगी। वहीं जलमंत्री राजेंद्र गौतम ने सदन को आश्वस्त किया कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए दिशानिर्देश तैयार किया जा रहा है।

हालांकि, सरकार की घोषणाओं से खुद उनके विधायक ही खुश नहीं दिखे। पूर्व मंत्री संदीप कुमार ने कहा कि वह खुद दलित हैं, डीटीसी कर्मी की मौत, पूर्व सैनिक की मौत पर एक करोड़ दिए जा सकते हैं तो सफाई कर्मी को क्यों नहीं? संदीप कुमार ने मृतकों के परिजनों के लिए स्थायी नौकरी की भी मांग की। वहीं नेता विपक्ष विजेंद्र गुप्ता मुद्दे पर काम रोको प्रस्ताव पर चर्चा की मांग करते रहे। गुप्ता के साथ मनजिंदर सिंह सिरसा और जगदीश प्रधान सदन के वेल में आकर ‘दिल्ली सरकार हत्यारी है’ की नारेबाजी करते रहे और मुख्यमंत्री की सदन से गैर-मौजूदगी पर भी सवाल उठाया।विजेंद्र गुप्ता ने आम आदमी पार्टी को दलित विरोधी करार देते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष को तीन सीवर मजदूरों की दुखद मृत्यु पर काम रोको प्रस्ताव लाने से रोका गया। उन्होंने कहा कि वर्णिका कुंडू का मामला सदन की विषय सूची में सबसे अंत में था, लेकिन विपक्ष के प्रस्ताव से बचने के लिए उसे सबसे पहले ले लिया गया और विपक्ष की आवाज दबाने के लिए भाजपा विधायकों को मार्शलों के जरिए सदन से बाहर करा दिया गया।

 

 

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