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जापान के मंदिर में रखीं अस्थियों का राज खोले डीएनए जांच : अनीता बोस

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पुत्री डॉ. अनीता बोस जापान के रेंकोजी मंदिर में रखी नेताजी की अस्थियों की डीएनए जांच कराना चाहती हैं।
Author नई दिल्ली | January 27, 2016 02:10 am
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पुत्री डॉ. अनीता बोस जापान के रेंकोजी मंदिर में रखी नेताजी की अस्थियों की डीएनए जांच कराना चाहती हैं। (फाइल फोटो)

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पुत्री डॉ. अनीता बोस जापान के रेंकोजी मंदिर में रखी नेताजी की अस्थियों की डीएनए जांच कराना चाहती हैं। वह यह साबित करने के लिए डीएनए जांच कराना चाहती हैं कि ये अस्थियां उनके पिता की हैं या नहीं। लेकिन उनका विश्वास है कि ताइपे में 1945 में हुई विमान दुर्घटना उनके पिता की मौत का ‘अति संभावित’ कारण हो सकता है। अनीता से पूछा गया कि क्या वह इस बात को मानती हैं कि 18 अगस्त, 1945 को ताइपे के ताइहोकू एअरोड्रोम के पास हुई विमान दुर्घटना में उनके पिता की मौत हो गई थी, उन्होंने कहा- इस बात की काफी आशंका है कि उनकी मौत की वजह विमान दुर्घटना हो। लेकिन वह तोक्यो के एक बौद्ध मंदिर में कलश में रखी अस्थियों का डीएनए परीक्षण कराना चाहती हैं ताकि पता लगाया जा सके कि ये नेताजी की हैं या नहीं। सुभाष चंद्र बोस और एमिली शेंकी की एकमात्र संतान अनीता ने जर्मनी के स्टैटबर्गन में अपने घर से एक बातचीत में कहा कि डीएनए परीक्षण से प्रमाणित किया जा सकता है, बशर्ते अस्थियां इतनी बुरी तरह नहीं जली हों कि डीएनए जांच नहीं हो सके।

बोस परिवार के सूत्रों के अनुसार 73 साल की जर्मन अर्थशास्त्री अनीता यहां की सरकार से अनुरोध कर सकती हैं कि तोक्यो के रेंकोजी मंदिर में रखी अस्थियों के डीएनए परीक्षण के लिए जापान सरकार से बात की जाए। वह अगले महीने भारत आ सकती हैं। क्या हाल में सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों से विमान दुर्घटना में नेताजी की मौत की बात पुख्ता तरीके से साबित हो गई है, इस बारे में पूछने पर उन्होंने कहा- मैंने अभी कुछ फाइलें ही देखी हैं। फिर भी मुझे लगता है कि मृत्यु प्रमाणपत्र इसमें संलग्न नहीं है।

नेताजी को महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू जितना सम्मान नहीं मिला, इस बारे में पूछने पर अनीता ने कहा- सरकार के रवैए के लिहाज से ऐसा लगता है। लेकिन आम जनता के मन में बड़े भावनात्मक तरीके से उनकी यादें जीवित हैं। शर्म की बात है कि भारत सरकार ने दशकों तक आजाद हिंद फौज के पूर्व सैनिक के साथ कैसा व्यवहार किया। बोस को लेकर नेहरू के रुख के सवाल पर अनीता ने कहा- उनका रिश्ता कई साल तक बना रहा था। इसलिए मुझे लगता है कि यह बहुपक्षीय था। कई मामलों में उनके विचार समान थे तो कुछ मामलों में मत भिन्न थे।

नेताजी की मौत की बात का इस्तेमाल ‘संकीर्ण राजनीति’ के लिए किए जाने संबंधी नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन के बयान पर उन्होंने कहा कि मेरे विचार से कुछ लोगों के लिहाज से यह बात सच है। लेकिन मेरी मां और मेरे कुछ रिश्तेदार समेत नेताजी के कई परिजन वाकई चाहते थे कि काश वह दुर्घटना में बच जाते या इसमें नहीं होते। उनके प्रति सभी के स्नेह ने उनकी मौत की बात को सह पाना कष्टकर बना दिया था।

केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से नेताजी की फाइलों को सार्वजनिक किए जाने और इन दस्तावेजों से नेताजी के गायब हो जाने के पीछे के रहस्य को सुलझाने की संभावना पर प्रतिक्रिया देते हुए अनीता ने कहा कि वह वास्तव में खुश हैं। उन्होंने कहा- यह सही समय है। इस बात की पूरी संभावना है कि 90 फीसद फाइलों को दशकों पहले सार्वजनिक नहीं करने की कोई वजह नहीं रही होगी। इसके बजाय मुझे इस बात में संदेह है कि सार्वजनिक की गई। फाइलें मेरे पिता की मौत के बारे में बहुत कुछ असाधारण बात सामने लाएंगी। अनीता ने कहा- वह इस बात से सहमत हैं कि फाइलों को काफी पहले सार्वजनिक किया जाना चाहिए था।

नेताजी के जन्मदिन पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया जाना चाहिए, इस सवाल पर उन्होंने कहा- मुझे लगता है कि नेताजी की यादों को जिंदा रखने के लिए राष्ट्रीय अवकाश से ज्यादा बेहतर तरीके हैं। नेताजी पर कोई पुस्तक लिखने की उनकी योजना के सवाल पर उन्होंने कहा- मुझे उन्हें चार सप्ताह की उम्र से ज्यादा व्यक्तिगत रूप से जानने का सौभाग्य नहीं मिला। मैं उनके बारे में ज्यादा कुछ नहीं कह सकती। लेकिन मैं अपनी भतीजी और हमारे परिवार की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर अपनी मां पर किताब लिखने की सोच रही हूं।

नेताजी पर नहीं, मां पर किताब लिखना चाहती हैं अनीता
सुभाष चंद्र बोस और एमिली शेंकी की एकमात्र संतान हैं अनीता। वह जर्मनी के स्टैटबर्गन में रहती हैं। उन्होंने कहा कि फाइलें काफी पहले सार्वजनिक की जानी चाहिए थी। उन्हें संदेह है कि सार्वजनिक की गर्इं फाइलें नेताजी की मौत के बारे में बहुत कुछ असाधारण बातें सामने लाएंगी। नेताजी पर तो नहीं, अपनी मां पर किताब लिखना चाहती हैं अनीता।

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