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Odd-Even Formula: इस बार होगी NCR के प्रदूषण की भी जांच

दिल्ली में सम-विषम से एनसीआर के शहरों के वायु प्रदूषण में कितना अंतर आया है, यह जांच इस बार होगी। नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टिट्यूट (एनईईआरआइ) ने नोएडा के सेक्टर- 1 स्थित उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय की छत पर यह मशीन लगाई है।
Author नोएडा | April 9, 2016 03:06 am

दिल्ली में सम-विषम से एनसीआर के शहरों के वायु प्रदूषण में कितना अंतर आया है, यह जांच इस बार होगी। नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टिट्यूट (एनईईआरआइ) ने नोएडा के सेक्टर- 1 स्थित उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय की छत पर यह मशीन लगाई है। बताया गया है कि मशीन से पीएम (पार्टिकुलेट मैटर)-2.5 की जांच की जाएगी। यानी हवा में 2.5 पीएम के कितने कण मौजूद है, यह मशीन इसकी जांच करेगी। इस जांच के आधार पर सम- विषम के लागू होने से पहले, रोक के दौरान और उसके बाद के प्रदूषण स्तर को मापा जाएगा।

बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉक्टर बीबी अवस्थी ने बताया कि सम-विषम के लागू होने के बाद वायु प्रदूषण की कमी समेत हवा के विभिन्न तत्त्वों की जांच होगी। सम-विषम के दौरान वायु प्रदूषण के स्तर में कमी के अलावा हवा में कार्बन, नाइट्रोजन आदि गैसों में कितना अंतर आया है, इसका भी पता चल सकेगा। जिसके आधार पर वायु प्रदूषण में कमी लाने की दीर्घकालिक योजनाओं को तैयार किया जाएगा। बोर्ड की प्रयोगशाला प्रमुख दीपा अरोड़ा ने बताया कि मशीन का संचालन नीरी के सदस्य करेंगे। संभवत: 10 से 14 अप्रैल, 15-30 अप्रैल और एक से पांच मई तक मशीनों से प्रदूषण स्तर की जांच की जाएगी। बता दें कि बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय पर पहले से वायु प्रदूषण की जांच मशीन से की जाती है। यह मशीन पीएम-10 की जांच करती है। जबकि नीरी की तरफ से लगाई गई मशीन पीएम-2.5 की जांच करेगी।

कार पूल और शटल सर्विस से है उम्मीद

सम-विषम योजना दिल्ली में लागू होने का दावा कर भले ही नोएडा प्रशासन इसको लेकर बेफिक्र है लेकिन लाखों की संख्या में रोजाना दिल्ली और नोएडा के बीच आने-जाने वाले जरूर चिंतित हैं। पहली बार सम-विषम के दौरान बस, मेट्रो में बेहिसाब भीड़ और आॅटो, रिक्शा की मनमानी झेल चुके लोग पहले से वैकल्पिक  व्यवस्था बनाने में लग गए हैं। खास तौर से समय पर आॅफिस पहुंचने वाले नौकरीपेशा वर्ग ने कार पूलिंग को बेहतरीन विकल्प माना है। एक ही जगह पर रहने वालों ने दिल्ली तक आने-जाने के लिए सम और विषम नंबर की गाड़ियों के हिसाब से 15 दिनों का चार्ट तैयार किया है। वहीं काफी संख्या में लोग ओ-रोही, ओला जैसी कारपूल एजंसियों से खर्च और ऐप के बारे में पूछताछ कर रहे हैं। बताया गया है कि मोबाइल पर ऐप डाउनलोड करने के बाद लोकेशन लिखने पर उस रूट पर उपलब्ध कारपूल विकल्पों के नंबर मिलेंगे। जिन्हें फोन कर यह सुविधा ली जा सकती है। कार पूल के अलावा दिल्ली से नोएडा और गुड़गांव के लिए शटल बस सर्विस भी लोगों के लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प साबित होगी। मेट्रो स्टेशन से जुड़ी शटल सर्विस कई नए रास्तों पर शुरू करने की तैयारी है।

वॉलेट पेमेंट से दूर होगी फुटकर पैसों की दिक्कत

सम- विषय के दौरान खुले पैसों को लेकर आॅटो या टैक्सी ड्राइवरों के ग्राहकों से कहासुनी रोकने के लिए पेटीएम ने वॉलेट योजना शुरू की है। कंपनी ने दिल्ली में ड्राइवरों के लिए फ्री वाईफाई पेटीएम पायलेट प्रोजेक्ट शुरू किया है। कंपनी के उपाध्यक्ष कुमार आदित्य ने बताया कि इस सुविधा से ग्राहकों के अलावा ड्राइवरों को भी बड़ी मदद मिलेगी। खुले पैसों के चक्कर से समय की बर्बादी रुकेगी, वहीं आॅटो या टैक्सी ड्राइवर को नकदी संभालने के झंझट से भी छुटकारा मिलेगा। पेटीएम से भुगतान लेने वाले आॅटो पर नीले रंग का स्टीकर लगाया गया है। दिल्ली एनसीआर में 15 हजार पेटीएम सुविधा वाले आॅटो रिक्शा और टैक्सी हैं। अगले 6 महीनों में इस संख्या को 35 हजार तक ले जाने की योजना है।

पिछली बार ज्यादा बसें चलाने की नहीं आई जरूरत

दिल्ली में जाम और वायु प्रदूषण में कमी लाने के लिए दूसरी बार सम-विषम का प्रयोग होने जा रहा है। नोएडा से दिल्ली लाखों की संख्या में लोग रोजाना नौकरी और कारोबार के लिए आते-जाते हैं। अलबत्ता उन्हें होने वाली दिक्कत दूर करने के लिए नोएडा के ट्रांसपोर्ट या परिवहन विभाग ने अभी तक कोई पहल शुरू नहीं की है। हालांकि इससे पहले दिल्ली में जब सम-विषम योजना लागू हुई थी, तब यूपी रोजवेज में लोगों की सुविधा के लिए अतिरिक्त बसें चलाने का दावा किया था। लेकिन मुसाफिरों की संख्या में ज्यादा फर्क नहीं आने से अतिरिक्त बसें चलाने की जरूरत नहीं पड़ी।

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