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जम्मू कश्मीर पुनर्वास कानून : कोर्ट ने दिया संविधान पीठ को मामला भेजने का संकेत

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह जम्मू कश्मीर पुनर्वास अधिनियम की वैधता को चुनौती देने वाली एक याचिका को संविधान पीठ के पास भेज सकता है।
Author नई दिल्ली | August 17, 2016 03:08 am
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह जम्मू कश्मीर पुनर्वास अधिनियम की वैधता को चुनौती देने वाली एक याचिका को संविधान पीठ के पास भेज सकता है, अगर वह पाता है कि कुछ मुद्दों की संवैधानिक व्याख्या की जरूरत है। अधिनियम भारत के विभाजन के बाद 1947 और 1954 के बीच जम्मू कश्मीर से पाकिस्तान पलायन कर गए पाकिस्तानी नागरिकों के पुनर्वास के लिए परमिट की मंजूरी का प्रावधान करता है। न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाले पीठ ने कहा कि वह मामले पर सुनवाई करेगा और सुनवाई के दौरान अगर पाया जाता है कि कोई संवैधानिक मुद्दा नहीं है, तो वह अपना आदेश सुनाएगा। पीठ में न्यायमूर्ति प्रफुल्ल सी महंत और न्यायमूर्ति एएम खानविल्कर भी हैं।पीठ ने यह टिप्पणी तब की जब उसे सूचित किया गया कि इस मामले पर पहले सुनवाई कर रहे पीठ ने इसे पांच न्यायाधीशों वाले संविधान पीठ को भेजा था।

जम्मू कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता भीम सिंह ने कहा कि मामले पर अंतत: अदालत को सुनवाई करनी चाहिए। उन्होंने अदालत को सूचित किया कि दो सदस्यीय पीठ ने 2008 में संविधान पीठ के पास मामले को सूचीबद्ध करने का निर्देश जारी किया था, लेकिन उसी साल प्रधान न्यायाधीश ने फैसले को पलट दिया था और आदेश दिया था कि मामले को तीन न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए।

सिंह ने कहा कि जम्मू कश्मीर के जो लोग, जो 1947 से पाकिस्तान चले गए थे, उनकी वापसी पर विचार किया जा सकता है, लेकिन उनके वंशजों की वापसी पर नहीं। उन्होंने कहा कि विधानसभा द्वारा पारित कानून कठोर, असंवैधानिक और अनुचित है, जिसने राज्य की सुरक्षा को खतरा पहुंचाया है। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख छह हफ्ते बाद निर्धारित की। जेकेएनपीपी ने तत्कालीन विधायक हर्षदेव सिंह के जरिए 1981 में जम्मू कश्मीर विधानसभा द्वारा पास अधिनियम को चुनौती दी थी। 1982 में अधिनियम को सिंह ने सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी और उसके बाद तत्कालीन राज्यपाल बीके नेहरू ने विधेयक पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था और इसे विधानसभा को वापस भेज दिया था। बाद में नवगठित भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी ने भी शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर उससे हस्तक्षेप करने की मांग की थी।

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