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मौजूदा शासन की पोल खोलने की पहली कुंजी है मेरी जीत: अहमद पटेल

भारतीय युवा कांग्रेस और भारतीय राष्ट्रीय छात्र कांग्रेस (एनएसयूआइ) का जंतर मंतर पर गुरुवार को शुरू हुआ ‘भारत बचाओ आंदोलन’ दोपहर बाद ‘नरेंद्र मोदी भारत छोड़ो-गुजरात छोड़ो’ आंदोलन में बदल गया।
Author नई दिल्ली | August 11, 2017 01:03 am
अहमद पटेल

भारतीय युवा कांग्रेस और भारतीय राष्ट्रीय छात्र कांग्रेस (एनएसयूआइ) का जंतर मंतर पर गुरुवार को शुरू हुआ ‘भारत बचाओ आंदोलन’ दोपहर बाद ‘नरेंद्र मोदी भारत छोड़ो-गुजरात छोड़ो’ आंदोलन में बदल गया। दरअसल राजग सरकार की नीतियों के खिलाफ कांग्रेस को युवा कार्यकर्ता रफी मार्ग से जंतर मंतर तक प्रदर्शन करना था। कुछ ही मिनटों में कांग्रेस के बड़े नेताओं ने मोर्चा संभाला और जमघट अपेक्षाकृत बड़ी रैली में तब्दील हो गई। नवनिर्वाचित सासंद अहमद पटेल के अलावा सीपी जोशी, राज बब्बर, अमरिंदर सिंह राजा, दिग्विजय सिंह, दिपेंद्र हुड्डा आदि ने केंद्र सरकार को आड़े हाथ लिया। बेरोजगारी बढ़ने और नौकरियों के अपने वादे को पूरा न करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरने के साथ शुरू यह सभा हुई लेकिन अहमद पटेल के हालिया राज्यसभा चुनाव वाला चर्चित विवाद इसके केंद्र में आ गया।

अहमद पटेल ने कहा कि उनकी जीत केवल उनकी जीत नहीं है बल्कि मौजूदा शासन की पोल खोलने की पहली कुंजी है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने इस चुनावी मुकाबले को प्रतिष्ठा का विषय बना दिया था। उन्होंने भरोसा जताया कि कांग्रेस इस साल के अंत में होने वाले गुजरात विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करेगी। आखिरी पलों तक अनिश्चितता वाले चुनावी मुकाबले में जीत हासिल करने वाले पटेल ने कहा कि इस जीत से कांग्रेस उत्साहित है। उन्होंने कहा-मुझे यकीन है कि हम गुजरात भी जीतेंगे। भाजपा ने इसे प्रतिष्ठा का विषय बना लिया था, यह उनका नुकसान है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पर निशाना साधते हुए पटेल ने दोनों पर केंद्रीय जांच एजंसियों का गलत इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया। भाजपा नेताओं का नाम लिए बगैर पटेल ने कहा-यहां तक कि भाजपा भी इन दो लोगों से डरी हुई है। एक संवैधानिक पदाधिकारी है और दूसरा संविधानेत्तर पदाधिकारी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सीपी जोशी और राज बब्बर ने भी सभा को संबोधित किया। अन्य वक्ताओं ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप मढ़ा। उन्होंने कहा कि हर साल दो करोड़ नौकरियां देने और किसानों को उनकी पैदावार पर 50 फीसद ज्यादा मुनाफा देने का वादा किया गया था। लेकिन वे नाकाम रहे।

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