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नरेंद्र भंडारी की रिपोर्ट : पढ़ाई-लिखाई और महंगाई

आसमान छूती महंगाई का असर सिर्फ दाल-सब्जी पर ही नहीं पड़ा है, लोगों का भविष्य संवारने वाली शिक्षा के सामान पर भी पड़ा है।
Author नई दिल्ली | July 17, 2016 05:10 am
प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक के छात्रों के लिए पेन-पेंसिल और कॉपी बुनियादी जरूरत है। इनके दामों में पिछले दो साल में काफी उछाल आया है।

आसमान छूती महंगाई का असर सिर्फ दाल-सब्जी पर ही नहीं पड़ा है, लोगों का भविष्य संवारने वाली शिक्षा के सामान पर भी पड़ा है। प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक के छात्रों के लिए पेन-पेंसिल और कॉपी बुनियादी जरूरत है। इनके दामों में पिछले दो साल में काफी उछाल आया है। स्टेशनरी व कॉपियों के बढ़े दाम लोगों को ज्यादा न लगें, इसलिए कई कंपनियों ने दाम बढ़ाने के बजाए अपने सामान की गुणवत्ता में ही गिरावट कर दी। वहीं कॉपी, रजिस्टर बनाने वाली कुछ कंपनियों ने कागजों की संख्या में कटौती कर दी। सामान का दाम बढ़ने और क्वालिटी में गिरावट आने के कारण छात्र-छात्राओं ने भी कॉपियों व रजिस्टरों की खरीदारी में कटौती करनी शुरू कर दी है। अब वे उतना ही सामान खरीद रहे हैं, जितना उन्हें स्कूलों में खरीदने के लिए कहा जा रहा है।

विद्यार्थी चाहे किसी भी कक्षा का हो, कॉपी और पेन से उसका नाता रहता ही है। किसी समय जो कॉपी या पेन सिर्फ पांच रुपए में आ जाता था, उसकी कीमत में भी लगातार बढ़ोतरी हुई है। चीन से आने वाले सामान ने भी इस पर खासा असर डाला है। दो साल पहले 96 पेज की कॉपी 10 रुपए में आ जाती थी। अब इसकी कीमत तो नहीं बढ़ी, लेकिन पेज 96 से 60 हो गए हैं। इसी तरह से 196 पेज की जो कॉपी 20 रुपए की आती थी, उसके भी पेजों की संख्या कम होकर 144 रह गई है। 250 पेज की कॉपी जो 30 रुपए में आती थी, उसके पेजों की संख्या 196 पेज रह गई है। 40 रुपए वाली 300 पेज की कॉपी के पेज घटकर 240 रह गए हैं। रजिस्टरों के दामों में भी पिछले एक साल में बढ़ोतरी हुई है। 96 पेज का जो रजिस्टर 25 रुपए में आता था, वह अब 30 रुपए में आ रहा है। 144 पेज का रजिस्टर 40 रुपए से बढ़कर 45 रुपए का हो गया है। 196 पेज का रजिस्टर 55 रुपए से बढ़कर 60 रुपए में मिल रहा है।

लिखने-पढ़ने में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले पेनों की कीमत में भी उछाल आया है। सेलो के 10 रुपए वाले पेन की कीमत 15 रुपए हो गई है। रेनॉल्ड पाईमैक्स के पेन की कीमत 30 रुपए से बढ़कर 45 रुपए हो गई है। इसी तरह से पायलेट पेन की कीमत 30 रुपए से बढ़कर 40 रुपए हो गई है। पेंसिल की बात करें तो नटराज, फ ाइबर कैसलो और कैमल की कीमत 30 रुपए से बढ़कर 50 रुपए पहुंच गई है। यह कीमत 10 पेंसिलों के सेट की है। फेविस्टिक के दामों में भी काफी उछाल आया है। एक फेविस्टिक की कीमत 35 से बढ़कर 50 रुपए हो गई है।

वहीं ज्योमेट्री बॉक्स की कीमतों में तो उछाल हुआ ही है, लेकिन उसमें रखे सामान की गुणवत्ता भी खराब हुई है। बाजार में नवनीत और कैमल का जो ज्योमेट्री बॉक्स 90 रुपए में आता था, उसकी कीमत अब 125 रुपए से लेकर 140 रुपए हो गई है। इनके दाम और न बढ़ें, इसलिए इन्हें बनाने वाली कंपनियों ने इसमें रखी स्केल, कंपास, रबर और शार्पनर की गुणवत्ता काफी गिरा दी है। इंक और मार्कर जो करीब एक साल पहले 25 रुपए में आ जाता था, उसकी कीमत अब 35 रुपए हो गई है। पढ़ाई में चार्ट का भी काफी इस्तेमाल होता है। इसकी कीमत भी एक साल में दो गुना बढ़ी है। जो चार्ट पहले 5 रुपए में आता था, वही अब 10 रुपए में आ रहा है। पहले 15 रुपए में वाटर कलर का जो सात का सेट आता था, वो अब पांच का सेट हो गया है। पढ़ाई में इस्तेमाल होने वाली जरूरी चीजों के दाम बढ़ने से उच्च वर्ग के छात्रों को भले ही कोई फर्क न पड़े, लेकिन निम्न और मध्यम वर्ग के परिवारों का बजट जरूर बिगड़ सकता है। शिक्षा में इस्तेमाल होने वाले सामान की कीमतों में अगर इसी तरह से ही बढ़ोतरी होती रही तो उसका भार अभिभावकों पर तो पड़ेगा ही, साथ ही छात्र-छात्राएं भी सिर्फ जरूरत के सामान की ही खरीदारी करने की सोचेंगे।

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