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श्लोक पढ़े, फेरे लिये, हिन्दू लड़की से शादी करने के लिए मुस्लिम युवक ने बदला धर्म, पर नहीं रह पाएंगे साथ!

24 साल के सेना के जवान ने अप्रैल 2016 में एक आर्य समाज मंदिर में एक हिन्दू लड़की से शादी। इस मुस्लिम युवक ने श्लोक पढ़े, और अग्नि के सात फेरे लिये और हिन्दू धर्म को स्वीकार भी किया।
सुप्रीम कोर्ट। (फाइल फोटो)

लव जिहाद की जब पूरे देश में चर्चा है ऐसे समय में सुप्रीम कोर्ट शादी से जुड़ा एक अलग मामला सुनवाई के लिए आया। लेकिन इस शादी की कहानी थोड़ी अलग है। इस मामले में एक मुस्लिम युवक ने हिन्दू लड़की से शादी करने के लिए खुद का धर्म बदल लिया और हिन्दू बन गया। लेकिन लड़की के घरवालों को ये शादी मंजूर नहीं थी। लड़की का पिता ने अपनी बेटी को नाबालिग बताकर पुलिस में अर्जी दी। इसके बाद दोनों को अलग होना पड़ा। जब ये मामला देश की सर्वोच्च अदालत में पहुंचा तो यहां भी बिना किसी स्पष्ट आदेश के ये मामला बंद हो गया। न्यूज 18 कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक 24 साल के सेना के जवान ने अप्रैल 2016 में एक आर्य समाज मंदिर में एक हिन्दू लड़की से शादी। इस मुस्लिम युवक ने श्लोक पढ़े, और अग्नि के सात फेरे लिये और हिन्दू धर्म को स्वीकार भी किया। लेकिन लड़की के परिवार वालों ने एमपी में एक एफआईआर दायर कर कहा कि लड़की नाबालिग है और इस शख्स ने उसकी बेटी को किडनैप किया है। लड़की के पिता की शिकायत पर पुलिस ने लड़की को अपने कब्जे में लिया और उसे लड़की के पिता के पास भेज दिया।

इसके बाद यह युवक न्यायिक प्रक्रिया का पालन करते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और एमपी पुलिस से अपनी ‘पत्नी’ को लौटाने की मांग की। इस शख्स ने दावा किया कि वो कानून के मुताबिक मुसलमान से हिन्दू बना है। उसने सुप्रीम कोर्ट में वो पत्र भी दिखाया जिसमें उसने दावा किया था कि उसने अपने धर्म परिवर्तन की सूचना अपने सीनियर ऑफिसर्स को दी थी। इस युवक ने अदालत में लड़की के उस बयान को दिखाया जिसमें उसने कहा था कि वो बालिग है। लेकिन साल भर चली कानूनी प्रक्रिया के बाद ये केस ऐसे मुकाम पर पहुंच कर खत्म हो गया जहां से किसी स्पष्ट फैसले की उम्मीद नहीं है। अदालत ने इस मामले में युवक को उसकी ‘पत्नी’ से मिलाने के बावत कोई स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं दिया है।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस आदर्श के गोयल और उदय यू ललित की बेंच ने केस की सुनवाई के दौरान लड़की से दो बार मुलाकात की। अदालत ने केस बंद करते हुए कहा कि अदालत द्वारा शादी की वैधानिकता पर फैसला देना संभव नहीं है क्योंकि युवक द्वारा धर्म परिर्वतन और धर्म परिवर्तन की वैधानिकता को न्यायिक प्रक्रिया के नजरिये से देखना जरूरी है।

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