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हाई कोर्ट जज ने मुंबई में फ्लैट लेने के लिए दिया झूठा हलफनामा- दस्तावेज से पुष्टि

बॉम्बे हाईकोर्ट के एक जज ने कथित रूप से झूठा हलफनामा देकर मुंबई में जजों की हाई राइज सोसाइटी में अपार्टमेंट बुक किया है।
जस्टिस रंजीत मोरे पर फ्लैट लेने के लिए झूठा हलफनामा देने का आरोप लगा है।

Sandeep Ashar.

बॉम्बे हाईकोर्ट के एक जज ने कथित रूप से झूठा हलफनामा देकर मुंबई में जजों की हाई राइज सोसाइटी में अपार्टमेंट बुक किया है। जबकि वह उसके लिए अयोग्य थे। आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, जस्टिस मोरे जो कि साल 2006 से हाईकोर्ट के जज हैं उन्होंने ओशिवारा की उस हाउसिंग सोसाइटी को बताया था कि उनके नाम पर शहर में कोई और फ्लैट या फिर प्लॉट नहीं है। सरकारी नियमों के मुताबिक, जिन लोगों का उस जिले में कोई और घर या फिर प्लॉट ना हो वे ही महाराष्ट्र हाउसिंहग एरिया डेवेलपमेंट अथोरिटी (MHADA) के अंतर्गत उस जिले में घर ले सकते हैं।

लेकिन सूचना के अधिकार के अंतर्गत इंडियन एक्सप्रेस को मिली जानकारी के मुताबिक, जस्टिस मोरे ने जजों की हाईराइज सोसाइटी में सितंबर 2015 में मेंबरशिप ली थी। लेकिन मुंबई (सिटी) कलेक्टर ऑफिस के रिकॉर्ड्स के मुताबिक, वह अब भी अपनी पत्नी के साथ ज्वॉइंट रूप से एक दूसरे अपार्टमेंट के मालिक हैं। वह अपार्टमेंट सेंट्रल मुंबई में वर्ली सागर कोर्पोरेटिव हाउसिंग सोसाइटी में है। आरटीआई की जानकारी के मुताबिक, जज और उनकी पत्नी ने 2005 में वह फ्लैट खरीदा था। 16 मंजिला वह इमारत सरकारी प्लॉट पर है।

जब इस बारे में मोरे से बात की गई तो उन्होंने 2005 में फ्लैट खरीदने की बात कबूली। उन्होंने कहा कि मई 2015 में उन्होंने वर्ली वाला वह फ्लैट अपनी दोनों बेटियों के नाम गिफ्ट में लिख दिया था। लेकिन आरटीआई के मुताबिक, मोरे और उनकी पत्नी ने 28 जून 2016 को कलैक्टर ऑफिस पहुंचकर यह काम किया था।

हालांकि, ओशिवारा हाईराइज सोसाइटी का निर्माण फिलहाल शुरू होने बाकी है। वहां कुल 84 घर बनाए जाने हैं। जिनमें से 39 जजों के नाम पर सहमति बन गई है। यानी उनको वहां घर मिलना पक्का हो गया है।

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