ताज़ा खबर
 

MCD Polls: भीड़ तो जनसभा, वरना कार्यकर्ता सम्मेलन

दिल्ली नगर निगमों के चुनाव जीतने के दावे तो सभी दल करते हैं लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान कोई भी दल बड़ी सभी सभा करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया।
Author नई दिल्ली | April 22, 2017 01:21 am

दिल्ली नगर निगमों के चुनाव जीतने के दावे तो सभी दल करते हैं लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान कोई भी दल बड़ी सभी सभा करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। 23 अप्रैल को होने वाले चुनाव के लिए शुक्रवार की शाम पांच बजे चुनाव प्रचार का समापन होने के समय सभी दलों के नेता सड़कों पर तो आए लेकिन कहीं ज्यादा भीड़ नहीं दिखी। यह चुनाव निगम की सत्ता के दावेदार तीनों दलों-भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी(आप) के लिए तो बड़ी चुनौती है ही ‘आप’ से अलग होने वाले नेताओं के दल स्वराज इंडिया और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जनता दल (एकी) समेत अनेक दलों के लिए भी इम्तहान साबित होने वाला है। परंपरा के तौर पर कांग्रेस प्रमुख और प्रधानमंत्री निगम चुनाव के लिए प्रचार करने नहीं आते हैं। इसलिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव प्रचार में शामिल नहीं हुए। वैसे कांग्रेस के प्रचार अभियान की शुरुआत पांच मार्च को जिस रामलीला मैदान से राहुल गांधी ने की उसी में 25 मार्च को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की सभा की। यही नाम राहुल गांधी की सभा के लिए दिया गया था। उसके बाद गुरुवार की शाम अमित शाह की सभा द्वारका में थी, उसमें आखिरी समय में उनके बजाए केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और उमा भारती ने संबोधित किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन का आरोप है कि शाह भीड़ न जुट पाने के कारण नहीं आए।

कहा यही जा रहा है कि रामलीला मैदान का शाह और राहुल गांधी की सभाओं को बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के सम्मेलन का नाम इसलिए दिया गया था कि अगर कम लोग आए तो कह दिया जाएगा कि 11 हजार से ज्यादा बूथों से कम लोगों को बुलाया गया है। अरविंद केजरीवाल ने पंजाब और गोवा विधानसभा में अपनी हार से उबरने के बाद 31 मार्च से चुनाव प्रचार शुरू किया तो कोई भी सभा हजारों में नहीं हो पाई। ‘आप’ ने तो पहले ही टिकटों का बंटवारा कर लिया था। बावजूद इसके उन्हें कई बार टिकटों में बदलाव करने पड़े। कांग्रेस और भाजपा में तो टिकटों के बंटवारे में भारी हंगामा हो गया। भाजपा ने अपने सभी निगम पार्षदों को दोबारा टिकट न देने के फैसले किए तो 21 पार्षदों ने बगावत करके चुनाव लड़ा, उन्हें पार्टी से बाहर होना पड़ा। भाजपा से कोई बड़ा नेता किसी दूसरे दल में नहीं गया।

चुनाव प्रचार में तीनों प्रमुख दलों ने केंद्रीय स्तर पर प्रचार किया और होर्डिंग लगाए। पिछले साल भी चुनाव अप्रैल में ही हुए थे, लेकिन गर्मी कम थी। सुबह-शाम सभाओं का माहौल था। दावे चाहे जो किए गए लेकिन सबसे कारगर प्रचार खुद उम्मीदवारों ने घर-घर जाकर किया। ई रिक्शा पर बैनर, पोस्टर के साथ आॅडियो-वीडियो प्रचार कारगर रहे। इसके अलावा बड़े नेताओं और खास करके लोकप्रिय कलाकारों के रोड शो से चुनाव का माहौल बना। समस्या यह थी कि सुबह नौ बजे से लेकर शाम छह बजे तक रोड शो में भी भीड़ नहीं जुट रही थी।
केंद्रीय मंत्री विजय गोयल का पार्कों में सवेरे की सैर के दौरान प्रचार भी कारगर रहा तो अजय माकन का सवेरे-शाम कॉफी के साथ प्रचार भी कई जगह कारगर दिख रहा था। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी के लोकप्रिय कलाकार होने का भाजपा को लाभ मिला। भाजपा के चुनाव की पूरी कमान खुद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के हाथों में थी इसलिए केंद्र सरकार के सारे मंत्री दिल्ली की गलियों में खाक छानते दिखे। भीड़ न जुटने पर गिनती के लोगों की बैठक को ही सभा का नाम देकर उस मंत्री का निगम चुनाव प्रचार में योगदान कराया गया। कांग्रेस ने भी पूर्व केंद्रीय मंत्रियों की फौज उतार दी थी। माकन ने 38 ऐसे नाम गिनाए जिन्होंने दिल्ली के कार्यकर्ताओं के अलावा दिल्ली में कांग्रेस का चुनाव प्रचार किया।
‘आप’ में भी गृह युद्ध छिड़ने की चर्चा चली। कुमार विश्वास निगम चुनाव से दूर रहे। पार्टी के सर्वेसर्वा अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के अलावा दिल्ली सरकार के मंत्री अपने इलाकों में ही चुनाव प्रचार करते दिखे। चुनाव प्रचार के दौरान दिल्ली सरकार के कामकाज की जांच करने वाली शुंगलू समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक होने और एक सरकारी आयोजन में खाने के बेहिसाब बिल ने आप सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने के दावे की कलई खोल दी। रविवार को होने वाले चुनाव के नतीजे 26 अप्रैल को आएंगे। यह चुनाव तय करेगा कि दिल्ली का दावेदार कौन है। कई नेताओं के लिए तो यह चुनाव उनके राजनीतिक जीवन का आखिरी चुनाव बनने वाला है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.
सबरंग