April 29, 2017

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मायावती ने काटे नसीमुद्दीन के पर

विधानसभा चुनाव में मुंह की खाने के बाद बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने नाकामी के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कई असरदार नेताओं के पर कतर दिए हैं।

Author नई दिल्ली | April 22, 2017 02:24 am
माया के खासमखास नसीमुद्दीन सिद्दीकी BSP से हटाए गए

विष्णु मोहन
विधानसभा चुनाव में मुंह की खाने के बाद बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने नाकामी के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कई असरदार नेताओं के पर कतर दिए हैं। इनमें माया के खासमखास नसीमुद्दीन सिद्दीकी का नाम भी शामिल है। मायावती ने इसके अलावा कुल 14 समन्वयकों को पद से हटा दिया है। इनमें कई समन्वयक नसीमुद्दीन के करीबी हैं। ये वे पदाधिकारी हैं जिनकी सिफारिशों पर विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों को टिकट दिए गए थे। बदले हालात में मायावती ने नसीमुद्दीन को उत्तर प्रदेश में संगठन के काम से किनारे कर दिया है। नसीमुद्दीन को मध्य प्रदेश में पार्टी के संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई है। मायावती अपने अन्य सिपहसालारों जैसे प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर के अलावा पूर्व मंत्री लालजी वर्मा द्वारा निभाई गई जिम्मेदारी से भी असंतुष्ट थीं और उन्होंने इसके लिए पिछले चार दिनों से जारी अंदरूनी समीक्षा बैठक में इन सभी को आड़े हाथ भी लिया।

बावजूद इस नाराजगी के मायावती ने प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर और राज्यसभा सदस्य डॉ. सिद्धार्थ को प्रदेश में पार्टी के संगठन को मजबूत करने का दायित्व सौंपा है। बसपा के प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर ने स्वीकार किया कि बहन जी ने यूपी में संगठन के काम की जिम्मेदारी उनको व डॉ. सिद्धार्थ को सौंपी है। नसीमुद्दीन मध्य प्रदेश में संगठन की मजबूती के लिए काम करेंगे और कई समन्वयकों को हटा दिया गया है। प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि यह तय हुआ है कि इस बार बसपा निगम, परिषद व मेयर आदि के चुनाव अपने चुनाव चिह्न पर लड़ेगी। इससे पहले बसपा ने 1995 में इन चुनावों को अपने सिंबल पर लड़ा था। राजभर ने कहा कि इन चुनावों के लिए सबकी जिम्मेदारियां तय कर दी गई हैं।
विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के फौरन बाद ही पार्टी में यह चर्चा शुरू हो गई थी कि इस बार उम्मीदवारों के चयन में कोआर्डीनेटरों ने मनमानी की। पार्टी सूत्रों का कहना है कि समीक्षा बैठक के दौरान बहन जी ने भी यही नाराजगी जाहिर की।

आरोप यहां तक लगे कि कुछ उम्मीदवारों ने उम्मीदवारों से इसके लिए मनचाही रकम भी वसूली। समीक्षा बैठक में यह साफ कहा गया कि उम्मीदवारों के चयन में समन्वयकों उम्मीदवारों का चयन उनकी जीतने की क्षमता के बजाय के बजाए उनसे नजदीकियों या अन्य कारणों से किया और पार्टी आलाकमान को गलत सूचना दी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि नसीमुद्दीन से नाराजगी की खास वजह यह रही कि अधिकतर समन्वयकों के चयन में नसीमुद्दीन ही जिम्मेदार पाए गए। पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान पूर्व मंत्री अनंत मिश्र उर्फ अंटू मिश्र को कोई अहम जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई थी पर मायावती ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताते हुए कानपुर में इस वर्ष के अंत में संभावित मेयर चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी है। सोमवार से शुरू हुई समीक्षा बैठक में कई और अहम फैसले भी किए गए। कई समितियों को भी भंग किया गया। इसमें संगठनात्मक स्तर पर कई और बदलाव किए जाने की सूचना है।

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First Published on April 22, 2017 2:24 am

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