ताज़ा खबर
 

अलग-अलग हुए संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, मनोज सिन्हा ने संभाला दूरसंचार मंत्रालय का कार्यभार

दूरसंचार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का पदभार संभालने के बाद सिन्हा ने यहां संवाददाताआें से कहा कि मैं दूरसंचार पर अपने विचार परसों रखूंगा।
Author नई दिल्ली | July 7, 2016 04:42 am
दूरसंचार मंत्री मनोज सिन्हा। (फाइल फोटो)

बेहद महत्त्वपूर्ण माने जाने वाले संचार व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय का अब विभाजन हो गया है। मनोज सिन्हा ने दूरसंचार मंत्रालय का कार्यभार संभाला है। दूरसंचार मंत्रालय जल्द ही देश में अब तक की सबसे बड़ी स्पेक्ट्रम नीलामी का आयोजन करने जा रहा है। वरिष्ठ भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद को नया विधि व न्याय मंत्री बनाया गया है। वह आइटी और इलेक्ट्रानिक्स विभाग का कार्यभार देखते रहेंगे। अभी तक प्रसाद के पास संचार और आइटी पोर्टफोलियो दोनों थे।

दूरसंचार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का पदभार संभालने के बाद सिन्हा ने यहां संवाददाताआें से कहा कि मैं दूरसंचार पर अपने विचार परसों रखूंगा। सिन्हा उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से लोकसभा सदस्य हैं। सिविल इंजीनियरिंग में एम टेक सिन्हा के दूरसंचार मंत्री के रूप में हाथ पूरी तरह भरे होंगे। भारत में मोबाइल ग्राहकों की संख्या दुनिया में दूसरे नंबर पर है, जबकि यहां दरें सबसे कम हैं। इस क्षेत्र में रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारती एअरटेल, वोडाफोन और आइडिया सेल्युलर जैसी बड़ी कंपनियां बाजार में दबदबे के लिए प्रतिद्वंद्विता कर रही हैं।
दूरसंचार विभाग सबसे बड़ी स्पेक्ट्रम नीलामी की तैयारी कर रहा है। इस नीलामी में 5.66 लाख करोड़ रुपए का स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए रखा जाएगा।

दूसरी ओर सिन्हा के सामने कॉल ड्रॉप के मुद्दे को हल करने की भी चुनौती होगी। सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की कॉल ड्रॉप के लिए मुआवजा योजना को खारिज कर दिया है। कॉल ड्रॉप पर अंकुश के लिए ट्राई ने अधिक अधिकार मांगे हैं। इनमें आपरेटरों पर 10 करोड़ रुपए का जुर्माना और उनके कार्यकारियों को दो साल तक की जेल की सजा की मांग शामिल है।

सिन्हा के सामने नेट निरपेक्षता से संबंधित नियमन तय करने की भी चुनौती होगी, जिस पर काफी समय से बहस छिड़ी हुई है। ट्राई ने नेट निरपेक्षता पर विचार-विमर्श पूर्व की प्रक्रिया शुरू की है और उसे इस बारे में अंशधारकों से लिखित टिप्पणियां मिलनी भी शुरू हो गई हैं। पूर्व दूरसंचार मंत्री प्रसाद ने इससे पहले कहा था कि सरकार ट्राई की सिफारिशें मिलने के बाद नेट निरपेक्षता पर फैसला करेगी।

सिन्हा पर उचित दर में टेलीफोनी सेवाएं प्रदान करने और निवेशकों का भरोसा कायम रखने की भी चुनौती होगी। 20 साल बाद यह पहला अवसर है जबकि दूरसंचार मंत्रालय का प्रभार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) को दिया गया है। इससे पहले 1996-98 में बेनी प्रसाद वर्मा ने इस मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार संभाला था।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.