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पश्चिम बंगाल निकाय चुनाव नतीजे: ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को मिली शानदार जीत, 7 में से 4 वार्ड पर पाई फतह

West Bengal Chunav/Election Result: बाकी तीन सीटों में एक कांग्रेस को और सीपीआई (एम) को 2 सीटें मिली हैं।
तृणमूल कांग्रेस का झंडा

पश्चिम बंगाल के 7 नगर निगमों के नतीजे बुधवार को जारी कर दिए गए। इनमें से 4 पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुआई वाली तृणमूल कांग्रेस ने जीत हासिल की है। वहीं जीजेएम को पहाड़ी इलाकों के 3 वार्ड में जीत हासिल हुई है। पुजाली, मिरिक, रायगंज और दोमकल में टीएमसी को जीत मिली है। निकाय चुनाव दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, मिरिक, दोमकल, रायगंज और पुजाली में हुए थे। एएनआई के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस को मुर्शिदाबाद जिले के दोमकल में 21 में से 18 सीटें मिली हैं। बाकी तीन सीटों में एक कांग्रेस को और सीपीआई (एम) को 2 सीटें मिली हैं।

ये तीनों उम्मीदवारों बाद में टीएमसी में शामिल हो गए। अब तक के नतीजों के मुताबिक रायगंज की 27 सीट में से टीएमसी ने 14 पर जीत दर्ज की है। वहीं, सीपीआईएम-कांग्रेस के खाते में 2 और बीजेपी के खाते मे एक वॉर्ड आया है। पुजाली में पार्टी को 16 में से 12 वॉर्ड और बीजेपी, सीपीआईएम को एक-एक वॉर्ड मिला है। पार्टी ने मिरिक निकाय चुनावों में भी जीत हासिल की है। उसे 9 में से 6 सीट मिली हैं। वहीं, गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) को तीन वॉर्ड मिले हैं। चुनाव जीतने के बाद टीएमसी कार्यकर्ताों ने जमकर जश्न मनाया। 14 मई को हुए मतदान में कुल 68 प्रतिशत मतदान हुआ था। सातों निकायों में से पुजाली में सबसे ज्यादा 79.6 प्रतिशत और दार्जलिंग में सबसे कम 52 प्रतिशत मतदान हुआ था। चुनाव के दौरान हिंसा के मामले भी सामने आए थे।

दार्जिलिंग में जीजेएम आगे चल रही है। यहां 32 वॉर्ड में से जीजेएम को 29 पर जीत हासिल हुई है। हालांकि, एक वॉर्ड जीतकर टीएमसी ने यहां पहली बार अपना खाता खोला है। कुर्सियांग में जीजेएम को 20 में से 17 वॉर्ड पर जीत मिली है। यहां टीएमसी ने तीन सीटें जीती हैं। कलिम्पोंग में जीजेएम को 23 में से 11 वॉर्ड  पर जीत मिली है। वहीं, टीएमसी को 1 और अन्य ने 2 वॉर्ड जीते हैं।

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First Published on May 17, 2017 11:09 am

  1. K
    kk
    May 18, 2017 at 10:37 am
    भाजपा की आर्थिक निति वही है जो कौंग्रेस या त्रिनामुल कौंग्रेस की है! “धार्मिक”‘चेहरा केवल मजदुर वर्ग की एकता तोड़ने और उनका शोषण तीव्र करने के लिए है! यानि, पूंजीवादी उत्पादन सम्बन्ध को बनाये रखना. निजी पूंजी के श्रमिक के ऊपर अधिनाकत्व कायम बरक़रार रखना. पूंजीवादी उत्पादन गतिशील है, वैसे ही जैसे दुनिया की बाकि प्राकृतिक या मानवीय घटनाएँ, सम्बन्ध, इत्यादि! भारत स्वतंत्रता के बाद पूंजीवादी रास्ते पर चला नेहरु, पटेल के नेत्रित्व वाली कौंग्रेस की अगुवाई में. 1990 के बाद वही पूंजीवाद सुधार के नाम पर विश्व पूंजी से ज्यादा जुड़ने लगा, मजदुर वर्ग और किसानों का शोषण गुणात्मक बढ़ा. अब वह भयावह हो चूका है. प्रतिरोध भी बढ़ रहा है, जिसे दबाने के लिए धर्म, गाय, मंदिर, देश, व्यक्तिवाद, आदि का ारा लिया जा रहा है! आज के फासीवाद का आधार कौंग्रेस और बाकि ्जुआ दलों ने ही तैयार किया है, भले ही वह पीडीपी हो या शिव सेना, डी
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