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तस्‍करी की पूरी कहानी: बांग्‍लादेश में खड़ा होकर भारत में नकली नोट फेंकता है, इधर खड़ा आदमी 24 घंटे में देश भर में कर देता है सप्‍लाई

नोटबंदी के बाद नकली नोटों को खरीदने की कीमतें बढ़ गई हैं। अब 1 लाख रुपये की नकली करंसी 60-70 हजार में बिकती है, जबकि पहले यह रेट 40 हजार था।
बेहतर रेल और सड़कों की कनेक्टिविटी से लैस, बांग्लादेश बॉर्डर से नजदीकी, बढ़ती कट्टरता इन सभी चीजों ने मालदा को एफआईसीएन (फेक इंडिया करंसी नोट्स) कैपिटल में तब्दील कर दिया है।

देश में 8 नवंबर को नोटबंदी का फैसला लागू होने के बाद 500 और 2000 रुपये के नए नोट बाजार में लाए गए। लेकिन इसके कुछ वक्त बाद ही देश के अलग-अलग हिस्सों से नकली नोटों की खेप पकड़ी जाने लगी। लेकिन इन सबके बीच हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नकली नोट छापने का यह सारा खेल पश्चिम बंगाल के मालदा से अॉपरेट हो रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शाम होते ही मालदा जिले के मोहब्बदपुर गांव, जो भारत-बांग्लादेश बॉर्डर के पास ही है,वहां बांग्लादेश की तरफ से नकली नोटों के पैकेट फेंके जाते हैं। एक शख्स उसे पकड़ने के लिए खड़ा रहता है। एक फोन कॉल आने के बाद वह बाइक पर उन पैकेट्स को लेकर एक किलोमीटर चलता है और वह दूसरे को पकड़ा देता है और वह उसे लेकर आगे चला जाता है। 30 मिनट के भीतर वह पैकेट फरक्का रेलवे स्टेशन पहुंचता है, जहां से सिर्फ 24 घंटे में यह पैकेट्स देश के अलग-अलग हिस्से में पहुंचाए जाते हैं, जिसमें दिल्ली भी शामिल है।

नोटबंदी के एेलान के 100 दिनों बाद ही बंगाल का मालदा जिला नकली नोटों का एक हब बन गया है। भारत की जांच एजेंसी एनआईए और बीएसएफ ने संकेत दिया है कि बांग्लादेश में नकली नोट छापने के लिए प्रेस लगाई गई है। रिपोर्ट पर विश्वास करें तो 2000 नोट में मौजूद 17 सुरक्षा विशेषताएं कॉपी किए जा चुके हैं, जिसमें डिजाइल, रंग, नंबर पैटर्न, वॉटर मार्क और महात्मा गांधी की तस्वीर मौजूद है। सुरक्षा एजेंसियों ने मालदा से अब तक 5 लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया है।

मालदा ही क्यों: बेहतर रेल और सड़कों की कनेक्टिविटी से लैस, बांग्लादेश बॉर्डर से नजदीकी, बढ़ती कट्टरता इन सभी चीजों ने मालदा को एफआईसीएन (फेक इंडिया करंसी नोट्स) कैपिटल में तब्दील कर दिया है। वहीं बॉर्डर के दूसरी तरफ नवाबगंज है, जहां नकली नोट छापने का काम होता है। मालदा रेल के जरिए सीधे दिल्ली, दक्षिणी राज्य, बिहार और उत्तरप्रदेश से जुड़ा हुआ है। वहीं देश के और इलाकों तक भी पहुंचने के लिए सड़क या रेल से 30 मिनट का वक्त लगता है। गंगा पार तक झारखंड भी पहुंचा जा सकता है। रिजर्व बैंक ने अनुमान लगाया था कि भारत में आने वाले करीब 80 प्रतिशत नकली नोट भारत-बांग्लादेश के बॉर्डर स्थित मालदा, मुर्शिदाबाद और नदिया जिलों से आते हैं।

एेसे होता है काम: कुछ लड़के बॉर्डर की दूसरी तरफ से फेंके माल को लेकर आते हैं और फिर वह छोटी-छोटी खेप में उसे बांटकर कुरियर कर देते हैं। एक एनआईए अफसर ने एचटी को बताया कि एक किलोमीटर कवर करने के बाद यह खेप दूसरे को दे दी जाती है। नोटबंदी के बाद नकली नोटों को खरीदने की कीमतें बढ़ गई हैं। अब 1 लाख रुपये की नकली करंसी 60-70 हजार में बिकती है, जबकि पहले यह रेट 40 हजार था।

पाकिस्‍तान में छापे जा रहे 2000 रुपए के नकली नोट, बांग्‍लादेश बॉर्डर के जरिए भारत पहुंच रही खेप, देखें वीडियो ः

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