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साबरमती आश्रम के अध्यक्ष और बापू के इस सच्चे मुस्लिम भक्त को दफनाया नहीं, जलाया गया, पढ़िए क्यों?

कुरैशी के दामाद भारत नाइक ने बताया, ‘कुरैशी साहब अपना दाह-संस्कार इसलिए चाहते थे क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि उन्हें दफनाकर जमीन का टुकड़ा बर्बाद किया जाए।
साबरमती आश्रम के अध्यक्ष अब्दुल हामिद कुरैशी को दाह संस्कार के लिए ले जाते लोग। (फोटो-टाइम्स ग्रुप)

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहा करते थे, ‘मेरा जीवन एक संदेश है।’ बापू के एक सच्चे भक्त अब्दुल हामिद कुरैशी ने भी अपनी मौत के साथ बापू का ही संदेश दिया। साबरमती आश्रम के अध्यक्ष 89 वर्षीय कुरैशी चाहते थे कि उन्हें दफनाया न जाए बल्कि उनका दाह-संस्कार किया जाए और ऐसा ही किया गया। कुरैशी एक मशहूर कानूनविद् भी थे। उन्कुहोंने शनिवार की सुबह अहमदाबाद के नवरंगपुरा स्थित स्वास्तिक सोसायटी में आखिरी सांसें लीं। जब कुरैशी को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट ले जाया गया तो उनका पूरा परिवार वहां मौजूद था। इस मौके पर न्यायपालिका से जुड़े कई वरिष्ठ लोग भी मौजडूद थे। कुरैशी इमाम साहब अब्दुल कादिर बावाजिर के पोते थे, जो दक्षिण अफ्रीका में बापू के निकट मित्र थे। बापू इमाम बावाजिर को ‘सहोदर’ कहा करते थे। यानी एक ही मां की कोख से पैदा हुआ भाई।

कुरैशी के भाई वाहिद कुरैशी के दामाद भारत नाइक ने बताया, ‘कुरैशी साहब अपना दाह-संस्कार इसलिए चाहते थे क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि उन्हें दफनाकर जमीन का टुकड़ा बर्बाद किया जाए।’ भारत नाइक ने बताया कि दरअसल, परिवार के अन्य सदस्यों के सामने ऐसे फैसले का उन्होंने मुझे गवाह बनाया।’ वह पिछले 4 वर्षों से अपने बेटे जस्टिस अकिल कुरैशी और नाइक को बार-बार याद दिलाते रहे कि उनका दाह-संस्कार ही किया जाए, उन्हें दफनाया न जाए; अगर कोई इसपर सवाल उठाता है तो ऐसा कहा जाए कि यही उनकी अंतिम इच्छा थी। उनकी आखिरी मुराद पूरी करते हुए परिजनों ने हिन्दू रीति-रिवाज से उनकी शवयात्रा निकाली और श्मसान घाट में ले जाकर शाम में दाह-संस्कार कर दिया।

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कुरैशी का जन्म साबरमती आश्रम में ही हुआ था जहां इमाम बावाजिर बापू के साथ 1915 में आकर बसे थे। 1927 में जन्मे कुरैशी बापू की गोद में खेलकर बड़े हुए थे। कुरैशी उन छोटे बच्चों में से थे जो बापू के लंच से टमाटर के स्लाइस खाया करते थे। बापू ने कुरैशी को कई खत भी लिखे थे, जिन्हें बाद में नैशनल आर्काइव्स ऑफ इंडिया के सुपुर्द कर दिया गया था।

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