December 06, 2016

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जब दिलीप पड़गांवकर ने कहा था, पीएम के बाद वह देश में सर्वाधिक महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं

1968 में पीएचडी करने के बाद वह पेरिस संवाददाता के रूप में टाइम्स ऑफ इंडिया से जुड़ गए थे। वह 1988 में टाइम्स ऑफ इंडिया के संपादक बने।

Author पुणे | November 26, 2016 13:57 pm
वरिष्ठ पत्रकार दिलीप पड़गांवकर ((1944-2016)

जाने माने पत्रकार दिलीप पड़गांवकर का शुक्रवार (25 नवंबर) को यहां बीमारी की वजह से निधन हो गया। वह जम्मू कश्मीर पर वर्ष 2008 में बनाए गए तीन सदस्यीय वार्ताकार समूह के सदस्य थे। टाइम्स ऑफ इंडिया के पूर्व संपादक 72 वर्षीय पड़गांवकर पिछले कई सप्ताह से अस्वस्थ थे। उन्होंने शुक्रवार को यहां एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली जहां पिछले सप्ताह उन्हें गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था। उनके पारिवारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। रूबी हाल क्लिनिक के मेडिकल सेवा विभाग के निदेशक संजय पथारे ने बताया, ‘पड़गांवकर को 18 नवंबर को गंभीर हालत में प्रयाग अस्पताल से यहां रूबी हाल क्लिनिक लाया गया था। जब उन्हें यहां लाया गया था तो वह गंभीर हालत में वेंटीलेटर पर थे और उनके अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। पहले ही दिन से वह डायलिसिस और वेंटीलेटर पर थे।’

पथारे ने बताया कि डॉक्टरों की एक टीम ने उन्हें बचाने के प्रयास किए लेकिन आज (शुक्रवार, 25 नवंबर) उन्होंने अंतिम सांस ली। पुणे में 1944 में जन्मे पड़गांवकर ने सेंट विंसेंट हाई स्कूल से अपनी शिक्षा पूरी की और बाद में फर्गुसन कॉलेज से राजनीति शास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की। पड़गांवकर ने बहुत कम उम्र में ही पत्रकारिता शुरू कर दी थी और 1968 में पीएचडी करने के बाद वह पेरिस संवाददाता के रूप में टाइम्स ऑफ इंडिया से जुड़ गए थे। वह 1988 में टाइम्स ऑफ इंडिया के संपादक बने। इससे पहले उन्होंने इसी दैनिक में विभिन्न पदों पर काम किया। संपादक पद पर वह छह साल तक रहे। इस बीच 1978 से 1986 के बीच उन्होंने बैंकाक और पेरिस में यूनेस्को के साथ भी काम किया। वर्ष 2008 में घाटी में अशांति जारी रहने पर केंद्र सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर को लेकर गठित तीन सदस्यीय वार्ता समूह में भी उन्हें शामिल किया गया था।

वरिष्ठ पत्रकार ने एक बार कहा था कि प्रधानमंत्री के बाद वह देश में सर्वाधिक महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं। ऑनलाइन न्यूज वेबसाइट ‘द वायर’ के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन ने कहा कि यह ‘बहुत बड़ी क्षति’ है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘अभी सुना कि मेरे मित्र और पूर्व संपादक दिलीप पड़गांवकर का पुणे में निधन हो गया। बहुत बड़ी क्षति। खुद को असहाय महसूस कर रहा हूं।’ वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने कहा कि पड़गांवकर ‘संस्कारवान और बौद्धिक’ व्यक्ति थे। उन्होंने ट्वीट किया, ‘मेरे पहले संपादक दिलीप पड़गांवकर एक संस्कारवान और बौद्धिक व्यक्ति थे , एक ऐसे व्यक्ति जिन्होंने युवा प्रतिभा को प्रोत्साहित किया। उनका निधन हो गया।’ रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने ट्वीट किया, ‘प्यारे दोस्त और वरिष्ठ पत्रकार दिलीप पड़गांवकर के चले जाने से बेहद दुखी हूं। परिवार के प्रति संवेदना।’

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First Published on November 26, 2016 6:00 am

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