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महाराष्ट्र: मकोका मामले में दो लोग बरी

कोर्ट ने कहा कि आरोपियों पर जिन अपराध के लिए आरोप लगाया गया उसे अभियोजन साबित नहीं कर पाया।
Author नई दिल्ली | July 8, 2016 17:39 pm
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

दिल्ली की एक अदालत ने महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून :मकोका: के तहत कथित अपराध के मामले में सुनवाई का सामना करने वाले दो लोगों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि आरोप साबित नहीं हुए और पुलिस ने ‘‘दिमाग लगाए बिना’’ अभियोजन को मंजूरी दे दी। अदालत ने कहा कि दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त द्वारा संगठित अपराध के लिए मकोका के तहत मामला दर्ज करने और इसके अभियोजन की मंजूरी ‘‘तर्कपूर्ण एवं उचित नहीं’’ है और आरोपियों पर जिन अपराध के लिए आरोप लगाया गया उसे अभियोजन साबित नहीं कर पाया।

अदालत ने मध्य दिल्ली के निवासी भाइयों मोहम्मद शादाब और मोहम्मद वासी को बरी करते हुए कहा कि सबूतों से पता चलता है कि उन्होंने अकेले या मिलकर केवल चोरी की और पैसे के लिए हिंसा से जुड़ा एक से अधिक अपराध नहीं किया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंद्र शेखर ने कहा कि इसलिए, यह अनिवार्य निष्कर्ष है कि मंजूरी आदेश में दूर नहीं की जा सकने वाली खामियां थीं और यह उचित नहीं है। अभियोजन का आरोप था कि शादाब और उसका बड़ा भाई वासी संगठित अपराध गिरोह के सेंधमार हैं। वे पैसा हासिल करने के लिए अपने साथियों की मदद से हिंसा या अन्य गैरकानूनी तरीकों से अपराध करते थे।

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