December 09, 2016

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शिवसेना का सुर बदला, केंद्र सरकार के समर्थन में उतरी

पार्टी इस फैसले से जनता को हो रही परेशानियों से चिंतित थी लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आम लोगों को राहत देने का आश्वासन दिया और राहत भरे कदम सामने आए हैं।

Author नई दिल्ली | November 24, 2016 02:51 am
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो)

नोटबंदी के मुद्दे पर शुरू में सरकार की आलोचना कर रही राजग सरकार में सहयोगी शिवसेना ने बड़े नोटों को अमान्य करने के मोदी सरकार के कदम का बुधवार को समर्थन करते हुए कहा कि यह फैसला जरूरी था और सरकार ने कुछ ऐसे कदम उठाए हैं जिनसे जनता को राहत मिलने लगी है।
नोटबंदी के मुद्दे पर शिवसेना के आनंदराव अडसुल ने लोकसभा में कहा, ‘हमने 500 और 1000 रुपए के नोटों को बंद करने के फैसले का स्वागत किया है यह जरूरी कदम था।’ उन्होंने कहा कि पिछले ढाई साल से कालेधन को रोकने की बात हो रही थी और इसे चलन से बाहर करना जरूरी था। अडसुल ने कहा कि उनकी पार्टी इस फैसले से जनता को हो रही परेशानियों से चिंतित थी लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को आम लोगों को राहत देने का आश्वासन दिया और बुधवार को राहत भरे कदम सामने आए हैं।

शिवसेना सांसद ने कहा, ‘मंगलवार को शिवसेना सांसदों से बातचीत में प्रधानमंत्री ने हमें आश्वासन दिया था कि परेशान हो रही जनता को राहत प्रदान की जाएगी। बुधवार को कुछ राहत भरे निर्णय आए हैं।’ उन्होंने इस संबंध में नाबार्ड द्वारा जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के लिए 21000 करोड़ रुपए की विशेष सहायता दिए जाने की बुधवार को हुई घोषणा का हवाला दिया। शिवसेना के कई सांसदों ने मंगलवार को नोटबंदी के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी। इससे पहले गत आठ नवंबर को नोटबंदी के मोदी सरकार के एलान के बाद शिवसेना ने सरकार की आलोचना की थी। शिवसेना ने जनता को इस फैसले से हो रही परेशानियों को लेकर केंद्र सरकार को घेरा था और राष्ट्रपति भवन तक तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी के नेतृत्व में निकाले गए मार्च में हिस्सा लिया था।

हालांकि तब शिवसेना ने राष्ट्रपति को ममता बनर्जी की ओर से दिए ज्ञापन में हस्ताक्षर नहीं किए थे। हालांकि तब भी शिवसेना सांसदों ने कहा था कि वह बड़े नोटों को बंद करने के फैसले के खिलाफ नहीं हैं लेकिन इससे जनता को बहुत परेशानी हो रही है। हाल ही में शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय में सरकार की आलोचना करते हुए कहा गया, ‘नोटबंदी के फैसले के कारण सरकार लोगों का ध्यान भूख, मुद्रास्फीति, बेरोजगारी और आतंकवाद जैसे मुद्दों से भटकाने में कामयाब रही है। सरकार बड़ी ही सफलतापूर्वक लोगों के ध्यान से महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दे भुला रही है।’

 

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First Published on November 24, 2016 2:51 am

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