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महाराष्‍ट्र: हत्‍या, बलात्‍कार और डकैती के मुजरिमों को नहीं मिलेगा पैरोल

अगर चिकित्सा रिपोर्ट के अनुसार किसी दोषी की मानसिक स्थिति मजबूत नहीं पाई जाती है तो वह जेल से बाहर नही आ सकेगा।
Author August 31, 2016 21:11 pm
महाराष्‍ट्र के मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस। (PTI File Photo)

हत्या के एक सनसनीखेज मामले में उम्र कैद की सजा काट रहे मुजरिम के पैरोल से फरार होने की घटना के बाद महाराष्ट्र में कारागार संबंधी कानूनों में संशोधन किया गया है, जिसके चलते अब बलात्कार, बलात्कार एवं हत्या और डकैती के मामलों में दोषी करार दिए लोग ‘नियमित’ पैरोल के हकदार नहीं होंगे। राज्य सरकार की ओर से जारी कारागार संबंधी नियमावली में अधिसूचित संशोधनों के अनुसार बलात्कार, बलात्कार एवं हत्या, मादक मदार्थों की तस्करी और डकैती के मामलों में सजा काट रहे दोषियों को ‘नियमित’ पैरोल नहीं मिल सकेगी। अतिरिक्त महानिदेशक (कारागार) बीके उपाध्याय ने आज कहा कि महाराष्ट्र कारागार नियमों (1959) में संशोधनों को लेकर अधिसूचना जारी कर दी गई है। राज्य के गृह विभाग ने सज्जाद मोगुल नामक व्यक्ति से जुड़ी घटना के बाद पैरोल और फर्लो के नियमों में बदलाव किए हैं। सज्जाद मुंबई की वकील पल्लवी पुरूकायस्थ की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा था और वह नासिक केंद्रीय कारागार में बंद था। पैरोल पर बाहर आने के बाद वह फरार हो गया और उसका अब तक पता नहीं चल पाया।

संशोधित नियमों के अनुसार अगर किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि की अपील ऊपरी अदालत में है और किसी दूसरी अदालत में उसके खिलाफ केंद्र या राज्य सरकारों की ओर दर्ज कराया गया मामला लंबित है और संबंधित अदालत ने उस मामले में उसे जमानत नहीं दी है तो वह फर्लो का हकदार नहीं होगा। अगर चिकित्सा रिपोर्ट के अनुसार किसी दोषी की मानसिक स्थिति मजबूत नहीं पाई जाती है तो वह जेल से बाहर नही आ सकेगा। डकैती, आतंकी अपराधों, राष्ट्र के खिलाफ विद्रोह, फिरौती के लिए अपहरण, मादक पदार्थों की तस्करी, बलात्कार, बलात्कार एवं हत्या तथा मृत्यु तक आजीवन कारागार की सजा काट रहे लोगों को भी फर्लो नहीं मिल सकेगा।

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बहरहाल, इन मामलों के दोषी ‘आपातकालीन’ पैरोल के हकदार होंगे जो दादा, दादी, पिता, मां, पत्नी, बेटा, बेटी, भाई या बहन जैसे निकट के रिश्तेदारों की मौत की स्थिति में मिलेगा। नजदीकी रिश्तेदारों की गंभीर बीमारी की स्थिति में भी पैरोल मिल सकेगा।

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