ताज़ा खबर
 

डाभोलकर-पानसरे हत्या: बम्बई हाई कोर्ट ने जांच में देरी पर सीबीआई-एसआईटी को फटकारा

पीठ डाभोलकर और पानसरे के परिवारों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवायी कर रही थी जिसमें उन्होंने दोनों मामलों की जांच की निगरानी उच्च न्यायालय द्वारा किए जाने की मांग की थी।
Author मुम्बई | August 4, 2016 21:07 pm
बंबई उच्च न्यायालय (फाइल फोट)

जांच में विलंब से अप्रसन्न बम्बई उच्च न्यायालय ने गुरुवार (4 अगस्त) को सीबीआई और महाराष्ट्र एसआईटी से तर्कवादी नरेंद्र डाभोलकर और कम्युनिस्ट नेता गोविंद पानसरे की हत्या मामले की अपनी जांच जल्द पूरा करने का निर्देश दिया और केंद्रीय जांच एजेंसी से कहा कि वह 10 दिन के भीतर एक संदिग्ध को गिरफ्तार करे। खंडपीठ ने एजेंसियों से साथ ही यह भी कहा कि वे डाभोलकर, पानसरे और एम एम कलबुर्गी की हत्या मामलों के सबूत की स्काटलैंड यार्ड की फोरेंसिक साइंस प्रयोगशाला से रिपोर्ट आठ सप्ताह के भीतर हासिल करें। पीठ ने महसूस किया कि किसी विदेशी प्रयोगशाला की राय हासिल करने में काफी समय गंवाया जा चुका है।

पीठ का नेतृत्व कर रहे न्यायमूर्ति एस सी धर्माधिकारी ने कहा, ‘यदि जांच जल्द पूरी नहीं की गई तो इससे व्यापक स्तर पर लोगों में यह धारणा बन सकती है कि आप कुछ लोगों को गिरफ्तार नहीं करना चाहते।’ उन्होंने कहा, ‘ये बहुत ही संवेदनशील मामले हैं जिसमें जानेमाने सामाजिक कार्यकर्ताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है।’ उन्होंने कहा कि एजेंसी को जांच एक उचित समयसीमा में पूरी करनी चाहिए। जांच के दौरान सीबीआई का ध्यान हत्याओं में एक स्वरूप पर गया था जिससे यह संकेत मिला कि हो सकता है कि इसमें एक ही समूह शामिल रहा हो क्योंकि अपराध में इस्तेमाल हथियार एक जैसे थे। इसलिए एजेंसी ने मिली गोलियां और गोली के खोखों को फोरेंसिक विश्लेषण के लिए भेज दिया था।

डाभोलकर की हत्या की जांच कर रही सीबीआई और पानसरे की हत्या की जांच कर रहे महाराष्ट्र के विशेष जांच दल (एसआईटी) ने एक सीलबंद लिफाफे में जांच की ताजा रिपोर्टें पेश की जिस पर दोनों न्यायाधीशों ने गौर किया। पीठ ने कहा कि सीबीआई रिपोर्ट में डाभोलकर हत्या मामले में एक संदिग्ध की बात कही गई है। इस संबंध में न्यायमूर्ति धर्माधिकारी ने सीबीआई से कहा कि वह 10 दिन के भीतर संदिग्ध को गिरफ्तार करे। अदालत ने विदेश मंत्रालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय से भी कहा कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए सभी अन्य विभागों के साथ समन्वय करें कि सीबीआई को स्कॉटलैंड यार्ड से फोरेंसिक रिपोर्ट तेजी से हासिल करने के लिए सभी अनुमति हों जिससे रिपोर्ट उसके समक्ष पेश की जा सके।

पीठ डाभोलकर और पानसरे के परिवारों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवायी कर रही थी जिसमें उन्होंने दोनों मामलों की जांच की निगरानी उच्च न्यायालय द्वारा किए जाने की मांग की थी। सीबीआई और सीआईडी अपनी जांच की प्रगति रिपोर्ट समय समय पर उच्च न्यायालय को सौंपती रही हैं। न्यायमूर्ति धर्माधिकारी ने कहा कि पानसरे की हत्या मामले में एसआईटी बार बार यह कहती रही है जांच निकट भविष्य में पूरी हो जाएगी। उन्होंने कहा, ‘एक समयसीमा होनी चाहिए और जांच एक उचित अवधि में पूरी होनी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि जांच तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचनी चाहिए। पानसरे और डाभोलकर परिवारों के वकील अभय नेवादी ने कहा कि उन्हें महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से जांच को सीबीआई को सौंपने के इरादे के संबंध में एक पत्र मिला है, न्यायमूर्ति धर्माधिकारी ने स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय की अनुमति के बिना जांच दल में कोई भी परिवर्तन नहीं किया जाएगा क्योंकि वह जांच की निगरानी कर रही है।

न्यायमूर्ति ने कहा कि फिलहाल एसआईटी मामले की जांच जारी रखेगी और अधिकारियों द्वारा कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा। नेवादी ने कहा कि यदि सीबीआई को स्कॉटलैंड यार्ड से फोरेंसिक रिपोर्ट हासिल करने में समय लग रहा है तो वे चंडीगढ़ स्थित सैन्य प्रयोगशाला से राय ले सकते हैं जो समान रूप से अच्छी है। पीठ ने उनसे कहा कि वह इन संबंध में एक हलफनामा दायर करें। उसने कहा कि वह सबूत को चंडीगढ़ प्रयोगशाला भेजने पर विचार कर सकती है, यदि स्कॉटलैंड यार्ड की रिपोर्ट समय पर नहीं आती या निर्णायक नहीं हो।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.
सबरंग