ताज़ा खबर
 

हाजीअली महिला प्रवेश विवाद: सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले सलाह-मशविरे में जुटा दरगाह प्रबंधन

भारतीय और इस्लामिक वास्तुकारी का अद्भुत नमूना हाजी अली दरगाह दरअसल सैयद पीर हाजी अली शाह बुखारी की मजार है।
Author मुंबई | August 31, 2016 03:50 am
मुंबई उच्च न्यायालय के ताजा आदेश ने हाजी अली दरगाह में स्त्रियों के प्रवेश पर चली आ रही पाबंदी की विदाई कर दी है।

मुंबई की हाजी अली दरगाह में महिलाओं को प्रवेश देने के हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने से पहले दरगाह प्रबंधन ने विचार-विमर्श शुरू कर दिया है। एक सदी पुरानी दरगाह के न्यासी सोहैल खांडवानी ने बताया, ‘हाई कोर्ट के फैसले के मद्देनजर इस मुद्दे पर हमने विस्तार से चर्चा की है और प्रबंधन के हर सदस्य की राय मांगी है। अन्य पक्षकारों के विचार जानने के लिए हम कई दौर की बैठकें करेंगे।’ उन्होंने बताया कि शुक्रवार को धार्मिक विद्वानों के साथ बैठकें की जाएंगी और मुंबई व दिल्ली स्थित परिषदों से भी परामर्श लिया जाएगा, जिसके बाद ही इस मुद्दे पर कोई अंतिम फैसला होगा।

भारतीय और इस्लामिक वास्तुकारी का अद्भुत नमूना हाजी अली दरगाह दरअसल सैयद पीर हाजी अली शाह बुखारी की मजार है। यहां पुरुषों को बिना रोक-टोक प्रवेश मिलता है। महिलाओं को साल 2012 तक मजार तक जाने की इजाजत थी, लेकिन बाद में धार्मिक परंपराओं के नाम पर महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई थी। हाई कोर्ट के आदेश के दो दिन बाद लैंगिक अधिकार कार्यकर्ता व भूमाता रंगरागिनी ब्रिगेड की प्रमुख तृप्ति देसाई रविवार को यहां चादर चढ़ाने आई थीं लेकिन वे मजार तक नहीं गई थीं। तृप्ति देसाई ने दरगाह प्रबंधन से हाई कोर्ट के आदेश को स्वीकार करने और उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट नहीं जाने का अनुरोध भी किया। उन्होंने विश्वास जताया कि शीर्ष अदालत भी महिलाओं के पक्ष में ही फैसला देगी।

दरगाह के न्यासी सोहैल खांडवानी से जब यह पूछा गया कि सोमवार को हुई बैठक में क्या देसाई के अनुरोध पर विचार किया गया था तो उन्होंने जवाब दिया, ‘फैसले के बाद भावनाओं और इसके प्रभाव को लेकर हम ज्यादा चिंतित हैं। हमें तो विस्तृत परिदृश्य में देखना होगा।’ दरगाह पर चादर चढ़ाने के बाद देसाई ने अपील की थी, ‘मैं न्यासियों से हाथ जोड़कर अनुरोध करती हूं कि वे हाई कोर्ट के फैसले का पालन करें। फिर भी अगर वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना ही चाहते हैं तो मुझे पूरा विश्वास है कि शीर्ष अदालत महिलाओं के संवैधानिक अधिकार को बरकरार रखेगी।’

बंबई हाई कोर्ट ने बेहद महत्त्वपूर्ण फैसला देते हुए हाजी अली दरगाह में मजार क्षेत्र में महिलाओं के प्रवेश की इजाजत दी थी और कहा था कि प्रवेश पर लगी पाबंदी मूलभूत अधिकारों की विरोधाभासी है और न्यास को धार्मिक सार्वजनिक स्थल पर महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी लगाने का कोई अधिकार नहीं है। हालांकि अदालत ने अपने आदेश पर छह हफ्ते के लिए रोक लगा दी थी क्योंकि हाजी अली दरगाह न्यास इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देना चाहता था। खांडवानी ने कहा, ‘इस हफ्ते के अंत तक या अगले हफ्ते तक शीर्ष अदालत में जाने के बारे में हम अंतिम फैसला ले लेंगे।’ दरगाह प्रबंधन ने साल 2012 में मजार क्षेत्र में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी थी जिसका सभी धर्मों की महिला कार्यकर्ताओं, गैर सरकारी संगठनों और मुस्लिम महिलाओं ने भारी विरोध किया था। और प्रबंधन के इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

 

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.
सबरंग