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किस्मत बदल जाएगी, कहकर बेचा था पत्थर- झूठ साबित होने पर अदालत ने लगाया लाखों का जुर्माना

मुंबई के एक जूलरी स्टोर के मालिक को झूठ बोलकर ग्राहक को मणि पत्थर (gemstone) बेचना बहुत महंगा पड़ा गया।
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फाइल फोटो)

मुंबई के एक जूलरी स्टोर के मालिक को झूठ बोलकर ग्राहक को मणि पत्थर (gemstone) बेचना बहुत महंगा पड़ा गया। जिसके बदले में स्टोर मालिक को ग्राहक को 3.2 लाख रुपए का हर्जाना देना पड़ा। दरअसल यहां एक स्थानीय जूलरी स्टोर से एक व्यक्ति ने मणि पत्थर खरीदा था। स्टोर मालिक ने शख्स को मणि पत्थर खरीदने पर उसकी किस्मत बदल जाएगी, कहकर बेचा। लेकिन बहुत दिनों बाद भी शख्स का भाग्य नहीं बदला। शख्स ने इसकी शिकायत उपभोक्ता अदालत में की। और अदालत ने शख्स के पक्ष में फैसला सुनाते हुए जूलरी स्टोर मालिक को पीड़ित शख्स को 3.2 लाख रुपए का हर्जाना देने का फैसला सुनाया। गौरतलब है कि साल 2013 में कवादू खंदावले (80) को ज्योतिष जूलर स्टोर के मालिक ने कोरी कल्पना का झांसा देकर अपने जाल में फंसाया। स्टोर मालिक कवादू खंदावले से कहा कि उक्त पत्थर के स्पर्श से उनकी किस्मत बदल जाएगी। साथ ही इस पत्थर से वो किसी भी शख्स की किस्मत बदल सकने में भी सक्षम होंगे। इतना ही नहीं स्टोर मालिक ने पत्थर से फायदा ना होने पर पैसे वापस करने की भी गांरटी दी। इसपर स्टोर मालिक के झांसे में आए कवादू खंदावले ने 11 फरवरी, 2013 मणि पत्थर खरीद लिया।

खबर के अनुसार कवादू खंदावले के पत्थर खरीदने के बाद दो ज्योतिषियों ने उन्हें बताया कि जो पत्थर उन्होंने खरीदा है वो उनके लिए सही नहीं है। दोनों ज्योतिषी उसी जूलरी स्टोर के थे जहां से कवादू खंदावले ने पत्थर खरीदा। ज्योतिषी कुमारी प्राची और शशिकांत पांड्या ने कहा कि वो पत्थर उनके लिए सही नहीं है। इसके बजाय उन्हें पुखराज और मानिक पत्थर खरीदना चाहिए। जिनकी कीमत 2.9 लाख रुपए थी। कवादू खंदावले ने इन पत्थरों को भी खरीद लिया। एनडीटीवी की खबर के अनुसार पत्थर बेचने के दौरान ज्योतिषिओं ने बताया कि कवादू खंदावले महज तीन महीने में करोड़पति बन जाएंगे। नहीं तो उनका पैसा वापस कर दिया जाएगा। इसके बाद कवादू खंदावले महीनों तक करोड़पति बनने का इंतजार करते रहे। लेकिन ऐसा कुछ नहीं जैसा उन्हें बताया गया। बाद में कवादू खंदावले पत्थर से फायदा ना होने पर जूलरी स्टोर मालिक से पैसे वापस लेने गए लेकिन मालिक ने इससे से इंकार कर दिया। इससे परेशान कवादू खंदावले ने मई 2014 में उपभोक्ता अदालत में गुहार लगाई। जिसपर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया।

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