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कोर्ट ने वर्ष 2003 ट्रेन विस्फोट मामले के दोषी की जमानत की नामंजूर

अतीफ ने थैलेसेमिया से पीड़ित अपने बेटे की देखभाल के लिए रिहाई की मांग की।
Author मुंबई | July 7, 2016 21:35 pm

बंबई उच्च न्यायालय ने  वर्ष 2003 मुलुंड ट्रेन बम विस्फोट मामले में दस साल के सश्रम कारावास की सजा पाने वाले अतीफ मुल्ला को अस्थायी जमानत देने से इंकार कर दिया। अतीफ ने थैलेसेमिया से पीड़ित अपने बेटे की देखभाल के लिए रिहाई की मांग की। उसके वकील मुबिन सोल्कर ने दलील दी कि उनके मुवक्किल के बेटे को नियमित रूप से खून चढाने तथा स्वास्थ्य पर नजर रखने के लिए अस्पताल ले जाना होता है और अतीक अपने परिवार के इकलौते व्यक्ति हैं जो अपने बेटे की देखभाल कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘अतीफ के माता पिता बुजुर्ग हैं, उसकी पत्नी भी रीढ की हड्डी संबंधी समस्याओं से पीड़ित है। इसलिए वह बेटे की देखभाल कर सकने वाले एकमात्र व्यक्ति हैं। वह सुनवाई के दौरान जमानत पर रिहा थे और उनहें इस साल अप्रैल में उस समय हिरासत में लिया गया जब निचली अदालत ने उन्हें दोषी पाते हुए सजा सुनाई।’’

न्यायमूर्ति एएस ओका और न्यायमूर्ति एए सैयद की खंडपीठ ने अस्पताल से अभियोजन द्वारा प्राप्त मेडिकल रिपोर्ट पढी जहां अतीफ के बेटे का इलाज चल रहा है। इसमें कहा गया कि बच्चे को सितंबर तक हर महीने एक बार अस्पताल ले जाने की जरूरत है। अदालत ने कहा, ‘‘इस समय, हम पाते हैं कि आवेदक :अतीफ: को अस्थायी जमानत मंजूर करने का मामला नहीं बनता। हम 13 जुलाई को जमानत याचिका पर गुणदोष के आधार पर विचार करेंगे।’’
निचली अदालत से जमानत पाने वाले अतीफ जेल में दो साल और नौ महीने का समय गुजार चुके हैं।

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