June 26, 2017

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CBI ने 13 कंपनियों पर दर्ज की 2252 करोड़ विदेश भेजने की FIR, एक कमरे से चल रही कंपनी ने 7 महीने में भेजे 463 करोड़

एफआईआर के अनुसार, "इन कंपनियों द्वारा बैंकों के माध्यम से 2252.82 करोड़ रुपये विदेश भेजे गए जबकि आयात की गई कुल वस्तुओं का मूल्य था 24.64 करोड़ रुपये।"

सीबीआई का दफ्तर (फाइल फोटो)

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मुंबई स्थित 13 कंपनियों और अज्ञात बैंक कर्मचारियों के खिलाफ गैर-कानूनी रूप से 2252 करोड़ रुपये विदेश भेजने का मामला दर्ज किया है। इन कंपनियों में  दक्षिणी मुंबई में एक कमरे के दफ्तर से चलने वाली टैक्स कंसल्टेंसी और मार्केट रिसर्च संस्था भी शामिल है। इन सभी पर अगस्त 2015 से फरवरी 2016 के बीच फर्जी आयात दिखाकर ये पैसा विदेश भेजने का आरोप है। सीबीआई द्वारा दायर एफआईआर में लिखा गया है, “….आरोपी कंपनियों ने अज्ञात बैंककर्मियों के साथ मिलकर कारोबारे की आड़ में काला धन सफेद किया।”

सीबीआई द्वारा दायर एफआईआर के अनुसार स्टेल्कोन इंफ्राटेल प्राइवेट लिमिटेड और उसके समूह की 12 अन्य कंपनियों पर पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, कॉर्पोरेशन बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और एक्सिस बैंक में आयात के जाली बिल बनाकर विदेश स्थित बैंकों में रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) और नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (एनईएफटी) के माध्यम से पैसे भेजे गए।

रिकॉर्डिंग ऑफ कंपनीज (आरओसी) स्टेलकोन इंफ्राटेल मई 2013 में बनी थी। इसकी अधिकृत कैपिटल और पेड अप कैपिटल दोनों ही एक लाख रुपये थे। आधिकारिक दस्तावेज कंपनी कानून, अकाउटिंग, ऑडिटिंग टैक्स कंसल्टेंसी और मार्केट रिसर्च का काम करती है। सीबीआई द्वारा एफआईआर के अनुसार स्टेलकोन इंफ्राटेल ने पंजाब नेशनल बैंक में 187 ट्रांजेक्शन करके 463.74 करोड़ रुपये विदेश भेजे। कंपनी ने ये भुगतान 3.14 करोड़ मूल्य की चीजों के आयात के एवज में किया।

एफआईआर के अनुसार, “इन कंपनियों द्वारा बैंकों के माध्यम से 2252.82 करोड़ रुपये विदेश भेजे गए जबकि आयात की गई कुल वस्तुओं का मूल्य था 24.64 करोड़ रुपये।” जिन 12 कंपनियों के खिलाफ सीबीआई जांच कर रही है उनके नाम हैं- अपोला एंटरप्राइज, कुंदर ट्रेडिंग, डिज्नी इंटरनेशनल, अनेक ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड, लुबीज एंटरप्राइज, पवन एंटरप्राइज, लेमन ट्रेडिंग, पैडिलाइट ट्रेडर्स, फाइन टच इम्पेक्टर, अजुरे एंटरप्राइज, सीबर्ड एंटरप्राइज और आइकॉनिक एंटरप्राइज।

एफआईआर के अनुसार प्रथम दृष्टया विभिन्न बैंकों ने इन भुगतान के संबंध में जरूरी पुष्टि नहीं की। बैंकों ने न तो आयातित वस्तुओं के बारे में जांच की न ही उनके बिलों के असली या नकली होने की। एफआईआर के अनुसार, “…ऐसा लगता है कि बैंकों ने भुगतान से पहले बिलों की प्रमाणिकता की जांच की कोई कोशिश नहीं की।” कालाधन सफेद करने के मामले में स्टेलकोन इंफ्राटेल का नाम डायरेक्टर ऑफ रेवन्यू इंटेलीजेंस (डीआरआई) की जांच में 2016 में सामने आया था। डीआरआई को पता चला था कि स्टेलकोन इंफ्राटेल मस्जिद बंदर स्थित एक कमरे से चलनी है।  अन्य ग्रुप फर्मों ने भी गलत पता देकर इम्पोर्टर एक्सपोर्टर कोड पंजीकृत कराया था। डीआरआई ने भी इस मामले में बैंकों के ऊपर मिलिभगत का आरोप लगाया था।

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First Published on May 16, 2017 7:50 am

  1. S
    School Bus
    May 16, 2017 at 11:10 am
    काला धन कमाने वाली कंपनियों पर मोदी सरकार का कसता शिकंजा स्वागत योग्य है। इन धंथेबाज़ों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
    Reply
    सबरंग