December 08, 2016

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26/11 Stories of Strength: ये आतंकवादी नहीं तय कर सकते कि हमें कैसे जीना है: अनंत गोयनका

इंडियन एक्सप्रेस ने 26 नवंबर 2008 में मुंबई में हुए हमले के 26 पीड़ितों से बातचीत की।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस (दाएं) और इंडियन एक्सप्रेस समूह के कार्यकारी निदेशक अनंत गोयनका। (Express Photo

मुंबईवासियों समेत पूरे देश के लिए 26 नवंबर 2008 आतंकवाद का पर्याय बन चुका है। इस दिन मुंबई में पाकिस्तान से आए 10 आतंकियों ने कई जगहों पर हमले किए जिनमें 160 से अधिक लोग मारे गए और 300 से अधिक घायल हुए थे। हमले के आठ साल बाद इंडियन एक्सप्रेस ने फेसबुक और इंस्टाग्राम के सहयोग से 26/11 के हमले के 26 पीड़ितों से बातचीत करके ये जानना चाहा कि बीते आठ साल कैसे गुजरे। शनिवार (26 नवंबर) को इन सभी 26 वीडियो स्टोरी को मुंबई में एक प्रदर्शनी आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में मुंबई हमले के पीड़ित एक दूसरे से मिले और अपने अनुभव एक-दूसरे से साझा किए। कार्यक्रम का उद्घाटन राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने किया। कार्यक्रम में सभी मेहमानों और सीएम फड़नवीस का स्वागत इंडियन एक्सप्रेस समूह के कार्यकारी निदेशक अनंत गोयनका ने किया।

अनंत गोयनका का स्वागत भाषण-

देवियों और सज्जनों: आपका स्वागत है, यहां आने के लिए आप सबका आभार

सबसे पहले मैं अपने मुख्य अतिथि माननीय मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस का स्वागत करूंगा। देवेंद्रजी यहां आने के लिए आपका आभार। हमें पता है कि आपका कार्यक्रम काफी व्यस्त था और ये चुनाव का भी वक्त था। लेकिन मैं कहना चाहूंगा कि 26/11 ऐसा दिन है जो हम सबके दिल के करीब है। हम जब देवेंद्रजी को इस कार्यक्रम में शामिल होने के निमंत्रण देने गए तो उन्होंने यहां आने के लिए हामी भरने में एक पल की भी देर नहीं की। देवेंद्रजी इसके लिए आपका हार्दिक धन्यवाद।

देवियों और सज्जनों, आठ साल पहले अमेरिकी नागरिक किया शेरर ने अपने पति और बेटी को मुंबई के ओबेरॉय होटल में खो दिया था। तीन साल बाद उन्होंने ओबेरॉय होटल के फिनिक्स रेस्तरां (पहले इसका नाम टिफिन रेस्तरां था) में कुछ पत्रकारों को बुलया और कहा, “मैं उन्हें माफ करती हूं।”

वो इंटरव्यू पूरे दिन मेरा पीछा करता रहा और आज तक करता है। आप जानते हैं कि उस इंटरव्यू के समय तक कसाब जिंदा था। मैं ये नहीं समझ पा रहा था कि वो ऐसे लोगों को कैसे माफ कर सकती हैं जिन्होंने उन्हें इतनी बड़ी तकलीफ दी है? वो ऐसे लोगों को कैसे माफ कर सकती हैं जिन्होंने अपने किए के लिए कभी माफी नहीं मांगी और न ही अपने किए पर किसी तरह का कोई पछतावा या अफसोस जताया?

हर साल इस दिन ये शहर उन लोगों को याद करता है जिन्हें हमने खो दिया, हमें जिन चीजों से गुजरना पड़ा। लेकिन एक शहर के तौर पर अब तक हमने उन लोगों की प्रेरक कहानियों को जगह नहीं दी जिन्होंने आठ साल पहले इस दिन अपने जिंदगी का अहम हिस्सा खो दिया।

जिन लोगों ने अपने परिजनों को खोया है उनके साहस को हम दिल से सलाम करते हैं। कसाब के मामले में सबसे कम उम्र गवाह देविका रोतवान जैसों का साहस। अब 16 साल की हो चुकी देविका आतंकवादियों को गिरफ्तार करने के लिए आईपीएस बनना चाहती हैं। शरन अरसा का साहस जिनका मानना है कि अगर हम डर गए तो ये आंतकवादियों की नैतिक जीत होगी।

इन प्रेरक कहानियों को मुख्यधारा में लाने में सहयोग के लिए मैं फेसबुक और इंस्टाग्राम का भी आभार जताना चाहूंगा। हमारी 26/11 से जुड़े 26 इंटरव्यू की सीरीज को लोगों ने काफी सराहा। इन्हें फेसबुक और इंस्टाग्राम पर काफी शेयर किया गया। मैं मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवीण परदेशी, बीएमसी के किरन दिघावकर और मुंबई पुलिस के देवेन भारती का भी आभार जताना चाहूंगा जिनकी वजह से बहुत कम समय की नोटिस के बाद भी कार्यक्रम स्थल उपलब्ध हो सका। मैं इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम को संभव बनाने के लिए स्पेंटा मल्टीमीडिया के मालिक और काला घोड़ा एसोसिएशन के चेयरमैन अपने मित्र और भरोसेमंद गाइड मानेक डावर को दिल से धन्यवाद कहना चाहूंगा।
और सबसे ज्यादा आभार मैं अपने विशेष मेहमानों का जताना चाहूंगा। आप सबने आठ साल पहले बिखरे टुकड़ों को जुटाने और अपने दिलों में झांकने का जो मौका दिया उसके लिए आपका हार्दिक धन्यवाद। आपके लिए ये कितना मुश्किल रहा होगा इसकी बस कल्पना ही की जा सकती है। लेकिन हमारे लिए ये काफी अहम था। ये आपका साहस ही है जिससे हमारे साहस का पता चलता है। आपके आशावाद से हमें उम्मीद मिलती है।

सच ये है कि हम आज भी आतंकवाद के युग में जी रहे हैं। एक पल के लिए हम कुछ भटके हुए नौजवानों के इस मूर्खतापूर्ण विचार के शिकार हो सकते हैं कि हम कैसे मरेंगे ये वो तय कर सकते हैं, लेकिन उन्हें ये पता होना चाहिए कि हम कैसे जिएंगे ये वो कभी नहीं तय कर सकते हैं।

हम बात करते रहेंगे। हम आपस में अपनी अनुभव साझा करते रहेंगे। हम अपने विचार रखेंगे, एक दूसरे से असहमत होंगे, हम दूसरों को प्रेरणा देंगे और खुद भी प्रेरित होंगे। क्योंकि चाहे जो भी हो हम सीखते रहेंगे और परिपक्व होते रहेंगे। यही हमारी सिविल सोसाइटी की ताकत है। हमें ये ताकत आपसे मिलती है….आप जिन्होंने उदारतापूर्वक अपनी साहसिक अतुलनीय कहानियां हमारे संग साझा कीं।

आपका सबका हार्दिक धन्यवाद

वीडियोः देखें कार्यक्रम में अनंत गोयनका का स्वागत भाषण-

वीडियोः देखें कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस

वीडियोः देखें कार्यक्रम में सीएम देवेंद्र फड़नवीस से सवाल पूछते एक पीड़ित

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First Published on November 30, 2016 9:26 am

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