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पाक को जवाबदेही तय करने की हिदायत दे अमेरिका ने कहा- मुंबई हमलों के पीड़ितों को मिले इंसाफ

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत जाल्मे खलीलजाद ने एक बयान में कहा था कि अब अमेरिका को पाकिस्तान के खिलाफ प्रतिबंध लगाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
Author वाशिंगटन | September 7, 2016 23:00 pm
मुंबई 26/11 हमले में 166 लोग मारे गए थे और करीब 300 घायल हुए थे। (File Photo)

अमेरिका ने पाकिस्तान में चल रहे 2008 मुंबई आतंकी हमले के मामले की सुनवाई में और तेजी लाने की मांग करते हुए कहा कि वह हमले में मारे गए छह अमेरिकियों सहित 166 लोगों के लिए ‘जवाबदेही और न्याय’ चाहता है। अमेरिकी विदेश विभाग के उप प्रवक्ता मार्क टोनर ने यहां कहा, हम बहुत साफ कहते रहे हैं कि हम इस मामले में जवाबदेही और न्याय चाहते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को सभी आतंकी समूहों को निशाना बनाना चाहिए। लेकिन फिलहाल पाकिस्तान के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की योजना नहीं है।
मुंबई हमलों का जिक्र करते हुए टोनर ने कहा, उस नृशंस हमले में मारे गए लोगों में अमेरिकी नागरिक शामिल थे। हम लंबे समय से बेहतर आतंकवाद विरोधी सहयोग पर जोर देते रहे हैं और उसमें इस मामले के संबंध में भारत और पाकिस्तान के बीच खुफिया जानकारी साझा करना शामिल है।

उन्होंने कहा, हम अपनी चिंताएं साफ कर रहे हैं कि उन्हें (पाकिस्तान को) अपनी जमीन पर काम कर रहे या सुरक्षित पनाह तलाश रहे सभी आतंकवादी समूहों पर कार्रवाई करने की जरूरत है। और यह काफी समय से हमारा स्पष्ट उद्देश्य रहा है। हमने प्रगति देखी है, लेकिन और भी बहुत कुछ करने की जरूरत है। पाकिस्तान में मामले की सुनवाई शुरू हुए छह साल से ज्यादा समय हो गया है। हमले के सरगना लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर जकीउर रहमान लखवी को करीब एक साल पहले जेल से रिहा कर दिया गया था। वह अब किसी अज्ञात जगह पर रह रहा है। बाकी छह दूसरे संदिग्ध रावलपिंडी के अदियाला जेल में बंद हैं। भारत ने निचली अदालत में बयान दर्ज कराने के लिए अब तक वहां 24 गवाह नहीं भेजे हैं जिस वजह से अदालती कार्यवाही रुकी हुई है। पाकिस्तान का कहना है कि जब तक भारत गवाह नहीं भेजता तब तक सुनवाई पूरी नहीं हो सकती।

साथ ही टोनर ने कहा कि पाकिस्तान को सभी आतंकी समूहों को निशाना बनाना चाहिए और इनमें उन समूहों को भी शामिल किया जाना चाहिए, जो उसके पड़ोसी देशों को निशाना बनाते हैं। हालांकि साथ ही अमेरिका ने यह भी कहा है कि वह आतंकी समूहों के खिलाफ कार्रवाई न करने को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की योजना नहीं बना रहा है।  हाल ही में संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत जाल्मे खलीलजाद ने एक बयान में कहा था कि अब अमेरिका को पाकिस्तान के खिलाफ प्रतिबंध लगाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। खलीलजाद के इस बयान से जुड़ा सवाल पूछे जाने पर टोनर ने कहा, मुझे नहीं लगता कि हम उस कगार पर हैं। उन्होंने कहा, मेरा कहने का अर्थ है कि हम पाकिस्तान सरकार के उच्च स्तरीय लोगों के साथ बातचीत जारी रखे हुए हैं और इन सभी वार्ताओं में मूल बिंदु यह होता है कि पाकिस्तान को सभी आतंकी समूहों को निशाना बनाना चाहिए। इनमें वे आतंकी समूह भी शामिल होने चाहिए, जो पाकिस्तान के पड़ोसी देशों को निशाना बनाते हैं। पाकिस्तान को आतंकी समूहों के ठिकानों को नष्ट करना चाहिए और मैं आपको भी यही बताने की कोशिश कर रहा था।

टोनर ने कहा, पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से जो प्रतिक्रिया हमें मिली है, वह यह है कि उन्होंने ऐसा करने के अपने इरादों के बारे में हमें आश्वासन दिया है। हम उनके उठाए गए कुछ कदमों से, अफगानिस्तान सीमा पर कुछ आतंकवाद रोधी अभियानों से हम प्रोत्साहित हुए हैं। हम इन प्रयासों को बढ़ाने के लिए और आतंकी समूहों पर ज्यादा दबाव बनाने के लिए उनके साथ काम करना जारी रखेंगे। हाल ही में भारत और बांग्लादेश यात्रा के दौरान विदेश मंत्री जॉन केरी की टिप्पणी का हवाला देते हुए टोनर ने कहा कि अमेरिका पाकिस्तानी धरती से आतंकी गतिविधियों का संचालन करने वाले सभी आतंकी समूहों के खिलाफ कार्रवाई पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करने की जरूरत के संदर्भ में पाकिस्तान के नेतृत्व और सैन्य नेतृत्व के साथ बेहद स्पष्ट वार्ताएं कर चुका है।  उन्होंने कहा, हम लगातार उनके साथ ये चर्चाएं कर रहे हैं। हमने इस संदर्भ में कुछ प्रयासों की प्रगति देखी है। आगे बढ़ते हुए हम ये वार्ताएं जारी रखेंगे। आतंकी समूहों के खिलाफ कार्रवाई करना, उन्हें उखाड़ फेंकना और उन्हें नष्ट कर देना पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों के ही हित में है।

शरीफ के दूत ने कश्मीर का मामला उठाया

कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने के पाकिस्तान के शरारतपूर्ण प्रयास के तहत प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विशेष दूत ने जिनेवा मानवाधिकार परिषद के अध्यक्ष और आइसीआरसी अध्यक्ष को कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघन के बारे में बताया। जिनेवा की यात्रा पर गए नेशनल एसेंबली की विदेश मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष सरदार ओवैस अहमद खान लेघारी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उन प्रस्तावों के क्रियान्वयन के महत्त्व पर भी बल दिया जो जम्मू-कश्मीर को विवादित क्षेत्र मानते हैं और कश्मीरियों के आत्मनिर्णय के अधिकार को साकार करने के लिए स्वतंत्र और उचित जनमतसंग्रह का आह्वान करते हैं।

इस बीच पाक सेना प्रमुख राहिल शरीफ  ने कश्मीर को पाकिस्तान की ‘जीवन रेखा’ करार देते हुए कहा कि कश्मीर मुद्दे का सच्चा हल घाटी के लोगों पर गोलियां बरसाना नहीं है बल्कि उनकी आवाज पर ध्यान देना और उनकी आकांक्षाओं का सम्मान करना है। उन्होंने मंगलवार को रावलपिंडी में ‘रक्षा दिवस’ के मौके पर एक कार्यक्रम में कहा, कश्मीर मुद्दा संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों को लागू करके ही हल किया जा सकता है। कश्मीर में आत्मनिर्णय की मांग का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि घाटी के दमित लोग अपने उचित अधिकारों की मांग करने पर एक बार फिर ‘राज्य प्रायोजित आतंकवाद के सबसे बुरे स्वरूप’ और ‘दमन’ के दौर से गुजर रहे हैं। भारत का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा, हम अपने दुश्मनों की सभी प्रत्यक्ष और परोक्ष चालों और मनसूबों से वाकिफ हैं। चुनौती चाहे सैन्य हो या राजनयिक, खतरा सीमा पर हो या शहरों के अंदर, हम अपने दोस्तों और दुश्मनों, दोनों को अच्छी तरह जानते हैं। हमें अच्छी तरह मालूम है कि कैसे दोस्तों से संबंध निभाना है और कैसे दुश्मनों से बदला लेना है।

 

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