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पहली बार मां बनने वाली थी महिला, लेकिन अब गर्भ में पल रहे बच्चे की क्यों चाहती है मौत

महिला के पिता ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि, 'सरकार हमें एक असामान्य भ्रूण के गर्भपात करने की इजाजत नहीं दे रही है, क्या सरकार ऐसे बच्चे के पैदा होने पर मेडिकल और वित्तीय सपोर्ट देगी।'
मुंबई के केईएम अस्पताल ने सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट दी थी, महिला के भाई को भी ऐसी ही बीमारी है। (Source-Indian express)

तब्बसुम बरनागरवाला। घर में नये मेहमान के आने की खुशियां जिंदगी के बेहतरीन तोहफों में से एक है। मुंबई की एक महिला (28) को भी जब पिछले सितंबर में पता चला कि वो मां बनने वाली है तो उसके अरमानों को पंख लग गये। मां बनने की कल्पना मात्र से ही वो रोमांचित हो उठी। निजी कंपनी के एड्रमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट में काम कर रही इस महिला ने अपनी नौकरी छोड़ दी ताकि अपनी सेहत और अपने होने वाले बच्चे का ख्याल रख सके। लेकिन लगभग 6 महीने के बाद महिला कहती है कि, ‘ मेरी इच्छा है कि मेरा बच्चा पैदा होने के साथ ही मर जाए।’ महिला का रो-रोकर बुरा हाल है, आंखें सूजी हुई है, नींद गायब है। दरअसल एक टेस्ट में पता चला है कि महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे का ब्रेन ही विकसित नहीं हुआ है, और बच्चे की रीढ़ की हड्डी भी ठीक नहीं है।

मेडिकल साइंस की भाषा में इस बीमारी को अर्नोल्ड चियरी टाइप-II सींड्रोम कहते हैं। इस महिला ने सुप्रीम कोर्ट में गर्भपात करने की अर्जी दी थी जिसे सोमवार को कोर्ट ने खारिज कर दी। मंगलवार को जब पूरा महाराष्ट्र गुडी पाड़वा मना रहा था, ये महिला अपने पति और पिता के साथ अस्पताल में बैठी थी। महिला के पिता ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि, ‘सरकार हमें एक असामान्य भ्रूण के गर्भपात करने की इजाजत नहीं दे रही है, क्या सरकार ऐसे बच्चे के पैदा होने पर मेडिकल और वित्तीय सपोर्ट देगी।’

ये एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब संशोधित मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट 2014 में छुपा हुआ है। ये कानून पिछले 9 सालों से कैबिनेट से मंजूरी की राह देख रहा है। वर्तमान कानून के मुताबिक 20 सप्ताह तक के गर्भ का गर्भपात कराया जा सकता है, नये कानून में इसे बढ़ाकर 24 सप्ताह किये जाने का प्रावधान है। लेकिन अगर ये कानून लागू भी हुआ होता तो मुंबई के इस परिवार को ज्यादा फायदा होने वाला नहीं था क्योंकि ये महिला अपने गर्भधारण के 27 हफ़्ते पूरे कर चुकी है। इस महिला का एक छोटा भाई (27 साल) भी इसी तरह की बीमारी से पीड़ित है, उसे कमर से नीचे लकवा है और वो चल फिर नहीं सकता, इस महिला ने 10 साल तक उसकी सेवा की और अब अपने परिवार में फिर वैसे ही एक बच्चे की आने की आशंका से वो बेहद चिंतित है। इसलिए वो सबसे पहले तो चाहती है कि उसे अदालत ने गर्भपात कराने की इजाजत मिल जाए, लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है तो उसे अपने बच्चे के लिए मौत ही पसंद है। महिला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को प्रार्थना पत्र लिख रही है, ताकि उसे गर्भपात की इजाजत मिल जाए।

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