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हिंदुओं की समस्या सुलझाने के लिए कांग्रेस ने बनाया सेल, कहा- गाय का मांस खाने से सोचने की शक्ति नहीं बचती

महाराष्ट्र के पूर्व अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री आरिफ नसीम खान का कहना है इस प्रकार के किसी सेल का गठन करना पार्टी के संविधान के खिलाफ है।
Author मुंबई | July 22, 2017 08:39 am
संजय ने दावा किया कि पार्टी धर्मनिर्पेक्ष विचारधारा पर यकीन करती है लेकिन इसका यह कतई भी अर्थ नहीं है कि हम एंटी-हिंदू है। (Express File)

कांग्रेस द्वारा नए धार्मिक सेल का गठन किया है जिसके संयोजक ध्यानयोगी ओमदासजी महाराज का कहना है कि गाय का मांस खाने से व्यक्ति के सोचने की शक्ति खत्म हो जाती है। यह बात ओमदासजी ने मुंबई में रखी गई एक संत-महंत सभा के दौरान कही। इस सभा में हनुमान सिद्दपीठ मठ के ट्रस्टी कुंदालिनी योग गुरु भी मौजूद थे। योग गुरु को भी इसमें शामिल कर कांग्रेस एक बहुत बड़ा प्लान तैयारी कर रही है। 2 जुलाई को मुंबई के कांग्रेस चीफ और पूर्व सांद संजय निरुपम ने एक मुंबई संत-महंत कांग्रेस का गटन किया ताकि हिंदू मंदिरों और मठ के साथ-साथ राज्य में कई तरह की परेशानी झेल रहे इनके पुजारियों की समस्याओं को हल किया जा सके।

संजय ने दावा किया कि पार्टी धर्मनिर्पेक्ष विचारधारा पर यकीन करती है लेकिन इसका यह कतई भी अर्थ नहीं है कि हम एंटी-हिंदू है। संजय निरुपम के इस कदम के बाद पार्टी में ही कलह शुरु हो गई है। महाराष्ट्र के पूर्व अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री आरिफ नसीम खान का कहना है इस प्रकार के किसी सेल का गठन करना पार्टी के संविधान के खिलाफ है। उन्होंने संजय पर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी हाई कमांड से ऐसे किसी भी सेल को बनाने की इजाजत नहीं दी गई है लेकिन फिर भी ऐसा किया गया है। इसी प्रकार अन्य राजनीतिक पार्टियों के लोग भी इस कदम की आलोचना कर रहे है। वहीं दूसरी तरफ इस सबसे ओमदासजी महाराज को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि जो इस कदम की आलोचना कर रहे है वे अभी यह नहीं जानते हैं कि इस सेल द्वारा क्या काम किया जाना है। जब उनसे मवेशियों की खरीद-फरोत पर बैन लगाए जाने के बारे में पूछा गया तो ओमदासजी ने कहा कि गाय का मांस खाने के कारण व्यक्ति डिप्रेशन में चला जाता है। इससे उसकी सोचने की शक्ति खत्म होने लगती है और व्यक्ति का शरीर कई बीमारियों की चपेट में आ जाता है। यही कारण है कि हम संत इसका सेवन करने के लिए लोगों को मना करते है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि एक गाय की जिंदगी उतनी ही कीमती है जितनी हमारी अपनी माता की होती है, इसलिए गाय के दूध के फायदों की तुलना मां के दूध से मिलने वाले फायदे से की जाती है। हमारे पास ऐसा कई शाकाहारी भोजन है जिनका हमे सेवन करना चाहिए। इसके साथ ही ओमदासजी ने गौहत्या के नाम पर की जाने वाली हत्याओं की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि कोई भी साधू-संत मारने, पीटने और गुंडागर्दी का समर्थन नहीं करेंगे।

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