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मध्य प्रदेश: तीन माह की नन्ही परी को मिला आशियाना, नाले में बच्ची को मरने के लिए छोड़ गई थी मां

मुंबई के डीसीबी बैंक के एचआर मैनेजर दंपती विदिशा आकर बच्ची को मुंबई ले गए।
Author विदिशा (मध्य प्रदेश) | January 20, 2017 16:06 pm
मुंबई के एक दम्पत्ति ने बच्ची को गोद लिया है। (जनसत्ता फोटो)

विदिशा के लटेरी ब्लॉक के पास नाले में तीन माह पहले जिस नन्ही परी को उसकी मां ने मरने के लिए छोड़ दिया था वह अब मायानगरी मुंबई पहुंच गई है। इस बच्ची की परवरिश डीसीबी बैंक के एचआर मैनेजर रभीर सेनानी-किमी सेनानी दंपती की गोद में होगी। 15 जनवरी को गोद लेने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद को बच्ची को उनके साथ मुंबई भेज दिया है। यशोदा एडॉप्शन सेंटर के माध्यम से गोद लेने की प्रक्रिया पूरी करवाई गई। शासन से इस बच्ची को लाडली लक्ष्मी योजना का लाभ भी दिलवाया गया है। सेंटर में अब तीन बच्चों को अपने पालनहार का इंतजार है।

2 साल तक करेंगे मॉनीटरिंग: यशोदा एडॉप्शन सेंटर के संचालक राम रघुवंशी और प्रबंधक दीपक बैरागी ने बताया कि नन्ही परी को मुंबई के सेनानी दंपति के सुपुर्द किया गया है। इस बच्ची की लगातार 2 साल तक मॉनीटरिंग की जाएगी। 27 अक्टूबर 2016 को यह बच्ची नाले में पड़ी मिली थी। 3 नवंबर को इसे एडॉप्शन सेंटर लाया गया था। 15 जनवरी को मुंबई के सेनानी दंपति विदिशा आए थे।

एडॉप्शन सेंटर में अभी दो बहनों सहित हैं तीन बच्चे:
विदिशा के यशोदा एडॉप्शन सेंटर की बालिका अर्चना 5 साल और वंदिनी 4 साल की भी परवरिश की जा रही है। ये दोनों बालिकाएं सगी बहनें हैं और करीब एक साल पहले रेलवे स्टेशन पर बेसहारा हालत में मिली थीं। इनके परिजनों का अभी तक पता नहीं चल सका है। इसलिए सेंटर के सदस्य ही दोनों का पालन-पोषण कर रहे हैं। इनकी मैचिंग अभी चल रही है। चूंकि ये दोनों सगी बहनें हैं, इसलिए नियमानुसार इनका एडॉप्शन एकसाथ एक ही परिवार में किया जाएगा। सेंटर के नन्हें बालक गोपाल को अभी पालक का इंतजार है। वह 4 महीने पहले तलैया मोहल्ले में लावारिस हालत में मिला था।

सेंटर से इस तरह ले सकते हैं गोद:
बच्चा गोद लेने के इच्छुक पेरेंट्स को वेबसाइट ‘कारा’ में अपना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है। इससे एक नया आईडी पासवर्ड जेनरेट होता है। पासवर्ड से अपनी आईडी खोलकर पेरेंट्स अपने मेडिकल सर्टिफिकेट, आधार कार्ड नंबर, आय प्रमाण पत्र, विवाह संबंधी प्रमाण पत्र की कॉपी अपलोड कर देते हैं। इसके बाद वे गोद लेने के लिए जिस संस्था को चुनते हैं, वह उनकी होम स्टडी करती है। स्टडी के बाद संस्था द्वारा पूरी जानकारी कारा में अपलोड कर दी जाती है। इसके बाद बच्चे के लिए वेटिंग शुरू हो जाती है। नंबर आने पर बच्चों की मैचिंग और लीगल प्रक्रिया पूरी करने के बाद बच्चा गोद दिया जाता है। मप्र में 38 जिलों में ऐसे एडॉप्शन सेंटर चल रहे हैं।

घटनाक्रम से जुड़े मुख्य बिंदू:
तीन माह पहले नन्ही परी को उसकी मां ने मरने के लिए छोड़ दिया था।
विदिशा के लटेरी ब्लॉक के नाले में मिली बच्ची की मायानगरी में होगी परवरिश।
मुंबई के डीसीबी बैंक के एचआर मैनेजर दंपती गुरुवार को विदिशा आए।
तीन माह की नन्ही परी को अपने साथ ले गए।

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