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मध्‍य प्रदेश: दोनों हाथ से अलग-अलग भाषा में एक साथ लिखते हैं करीब दो सौ बच्‍चे

आपको बता दें कि इस स्कूल के नौंवी कक्षा में पढ़ने वाले आशुतोष ने गणित में 100 में से 99 अंक प्राप्त किए थे जो कि अब रिकॉर्ड बन चुका है।
Author सिंगरौली | March 7, 2017 13:56 pm
इस स्कूल के बच्चों को इस हुनर की प्रेरणा देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद से मिली है।

जहां अपने ही देश में ऐसे हुनर की पहचान नहीं है जो कि अद्भुत, अकल्पनीय और अविश्वसनीय है वह हुनर विदेश में अपनी पहचान बना चुका है। हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश के सिंगारोली के एक छोटे से गांव बुधेला की जहां पर वीणा वादिनी पब्लिक स्कूल के छात्रों में दोनों हाथों से लिखने का अनोखा हुनर है। एक विदेशी द्वारा बच्चों के इस हुनर को देश का 9वां अजूबा कहा जाता है। इस स्कूल में 200 बच्चे हैं और सभी दोनों हाथ से लिखने की कला में बेहतरीन हुनर रखते हैं। आपको बता दें कि एक दशक पहले लायंस कल्ब इंटरनेशनल के तत्कालीन चेयरमैन जोनिस रोज मध्य प्रदेश घूमने के लिए आए थे, जिसके बाद उन्होंने इस स्कूल के बच्चों के इस हुनर को देखा तो वह दंग रह गए थे।उन्होंने ही इस हुनर को 9वां अजूबा कह दिया था।

इस स्कूल के बच्चे लिखने में कंप्यूटर से भी तेज अपने हाथ चलाते हैं। यदि कोई सामान्य बच्चा कुछ लिखने के लिए घंटा लगा देता है वहीं इस स्कूल के बच्चों को वह काम करने नें केवल चंद मिनट लगते हैं। ये सभी बच्चे दोनों हाथों से एक साथ दो भाषा लिख सकते हैं। यह बच्चे देवनागरी लिपि, उर्दू, स्पेनिश, रोमन, अंग्रेजी समेत छह भाषाओं का ज्ञान रखते हैं। यह बच्चे 11 घंटों में 24000 शब्द लिखने की क्षमता रखते हैं। यह गांव पहाड़ों से घिरा हुआ और बहुत ही पिछड़ा हुआ है फिर भी यहां पर बच्चों को अच्छी शिक्षा दी जा रही है। यह स्कूल पहली से आठवीं कक्षा तक है। यह बेशक महानगरों के पब्लिक स्कूलों का मुकाबला न कर पाए लेकिन इन बच्चों का यह हुनर सबको मात दे रहा है। आपको बता दें कि इस स्कूल के नौंवी कक्षा में पढ़ने वाले आशुतोष ने गणित में 100 में से 99 अंक प्राप्त किए थे जो कि अब रिकॉर्ड बन चुका है। इस स्कूल से निकले हुए बच्चे अब गांव से बाहर निकलकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

इन बच्चों को इस हुनर की प्रेरणा देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद से मिली है। प्रसाद भी दोनों हाथों से लिखते थे जो कि अब इन स्कूली बच्चों के लिखने की क्षमता हुनर का रूप ले चुकी है। इस प्रतिभा को देखते हुए एक सेना के जवान वीरगंद शर्मा ने फैसला किया है कि वह स्कूल खोलकर बच्चों को दोनों हाथों से लिखने की कला सिखाएंगे।

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First Published on March 7, 2017 1:56 pm

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