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छप्पर तले चल रहा प्राइमरी स्कूल, टीचर खुद लाता है ब्लैकबोर्ड, कुर्सी और जरूरी सामान

मध्य प्रदेश के छतरपुर इलाके में एक सरकारी प्राइमरी स्कूल में बच्चे बेहद खराब हालात में पढ़ने को मजबूर हैैं।
गांव में बच्चों को अकेले पढ़ाते हैं टीचर मदन गोपाल सोनी।

मध्य प्रदेश के छतरपुर इलाके के एक सरकारी प्राथमिक स्कूल खस्ताहाल है। बिजावर से जटाशंकर धाम मार्ग पर चांदा गांव में आदिवासी लोग बड़ी संख्या में रहते हैं और ज्यादातर बुनियादी सुविधाओं से दूर हैं। इस इलाके के सरकारी स्कूल में शिक्षक बीच जंगल में एक छप्पर के नीचे बच्चों को पढ़ाते हैं। शिक्षक मदन गोपाल सोनी बच्चों को पढ़ाने के लिए खुद ब्लैकबोर्ड, कुर्सी जैसे जरूरी सामान लेकर आते हैं कड़कड़ाती ठंड का मौसम अब शुरु हो गया है और ऐसे में बच्चे बिना किसी भवन या इमारत के ही पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्कूल की हालत 2012 से ऐसी ही है।

स्कूल की न तो कोई दीवार है, न ही कोई छत और इसमें एक सहायक अध्यापक नियुक्त किया गया है। बच्चे किसी शादी के मंडप जैसे छप्पर के नीचे पढ़ते हैं। मदन गोपाल रोज सुबह 10 बजे पहुंचकर शाम 4:30 बजे तक पांचों कक्षाओं के बच्चों अकेले ही पढ़ाते हैं। हाल ही में जटाशंकर जाते हुए कलेक्टर रमेश भंडारी भी इस स्कूल की हालत का मुआयना लेने के लिए रुके थे, लेकिन उसके बाद भी कोई काम नहीं किया गया। स्कूल में छतरपुर जिले और पतरा ग्राम पंचायत के 14 बच्चे पढ़ने आते हैं। कोई इमारत न होने की वजह से कई बच्चे स्कूल भी छोड़ चुके हैं।

वहीं स्कूल के सहायक अध्यापक मदन गोपाल सोनी का दावा है कि उन्होंने कई बार इस मामले को लेकर अफसरों को पत्र लिखा है, लेकिन स्कूल भवन बनवाने को लेकर कोई चर्चा या कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने बताया कि बारिश के मौसम में बच्चे स्कूल में पढ़ते-पढ़ते ही भीग जाते है, तो भीगा बस्ता और पुस्तकें लेकर घर चले जाते है। मदन हर दिन ही स्कूल में सुबह पहुंचते हैं, जो साथ में ही एक कुर्सी, ब्लैकबोर्ड और क, ख, ग का चार्ट समेत बच्चों को पढ़ाने के लिए जरूरी सामान लेकर आते हैं। वहीं मामले को लेकर कलेक्टर रमेश भंडारी का कहना है कि वे एक बार इस स्कूल को देखने के लिए गए थे। हम स्कूल भवन बनाए जाने को लेकर गंभीर प्रयास कर रहे हैं।

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