ताज़ा खबर
 

मदरसों में नरेंद्र मोदी, आरएसएस नेता की जीवनी पढ़ाने का विचार

मध्यप्रदेश मदरसा बोर्ड ने ''वतन से मोहब्बत का इस्लाम धर्म में क्या महत्व है'' थीम के तहत जो ड्राफ्ट सिलेबस तैयार किया है, उसमें मौलाना अबुल कलाम आजाद और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के बारे में भी पढ़ाया जाएगा।
मध्यप्रदेश के 7,401 मदरसों में से 2,535 सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त हैं और वे छात्रों को मॉर्डन सब्जेक्ट्स पढ़ा सकते हैं।

मध्यप्रदेश के सरकारी मान्यता प्राप्त मदरसों में पढ़ने वाले छात्र जल्द ही बीजेपी के आदर्श पंडित दीनदयाल उपाध्याय, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बारे में पढ़ेंगे। मध्यप्रदेश सरकार इन नेताओं की बायोग्राफी मदरसों के छात्रों को पढ़ाने पर विचार कर रही है। मध्यप्रदेश मदरसा बोर्ड ने ”वतन से मोहब्बत का इस्लाम धर्म में क्या महत्व है” थीम के तहत जो ड्राफ्ट सिलेबस तैयार किया है, उसमें मौलाना अबुल कलाम आजाद और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के बारे में भी पढ़ाया जाएगा।

देश के अलग-अलग हिस्सों के शिक्षाविद्ों ने यह ड्राफ्ट सिलेबस तैयार किया है और इसे राज्य शिक्षा केंद्र को सौंपा जाएगा। बोर्ड के चेयरमैन प्रोफेसर सैयद इमामुद्दीन ने कहा, ‘अपने धर्म की कमियां गिनाने वाले पंडित दीनदयाल उपाध्याय के बारे में पढ़ाने में गलत क्या है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री संवैधानिक अधिकारी हैं, क्या स्टूडेंट्स को उनके बारे में पता नहीं होना चाहिए। क्या एेसे सवाल प्रतियोगी परीक्षाओं में नहीं पूछे जाते। उन्होंने यह भी कहा कि बोर्ड नहीं बल्कि आरएसके इस पर आखिरी फैसला लेगा।

बता दें कि मध्यप्रदेश के 7,401 मदरसों में से 2,535 सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त हैं और वे छात्रों को मॉर्डन सब्जेक्ट्स पढ़ा सकते हैं। उनमें से 1,254 प्राथमिक शिक्षा और 1,281 को मीडिल लेवल की मान्यता मिली हुई है। सरकार से मान्यता प्राप्त इन मदरसों में 2.30 लाख से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं। बीजेपी सरकार ने कहा कि संशोधित पाठ्यक्रम छात्रों को यह समझने में मदद करेगा कि इस्लाम में देश के प्रति वफादारी और प्यार के लिए काफी अहम जगह है।

बता दें कि राज्यसभा में 22 मार्च को कांग्रेस के एक सदस्य ने अन्य बीजेपी शासित राज्य उत्तर प्रदेश के मदरसों से जुड़ी समस्याओं का मुद्दा उठाया था और उनके समाधान के लिए केंद्रीय मदरसा बोर्ड गठित किए जाने की मांग की थी। कांग्रेस के संजय सिंह ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाया और कहा था कि उत्तर प्रदेश में करीब 8525 मदरसे मान्यताप्राप्त हैं लेकिन उनमें से 562 मदरसों को ही सरकारी अनुदान मिल रहा है। उन्होंने मदरसों के आधुनिकीकरण पर बल देते हुए कहा था कि इन मदरसों में 20 साल काम करने के बाद भी शिक्षकों को नियमित नहीं किया गया है। सिंह ने कहा था कि मदरसों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए केंद्रीय मदरसा बोर्ड गठित किया जाना चाहिए और उनके कर्मचारियों को सरकारी वेतन दिया जाना चाहिए।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.
सबरंग