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शिवराज के राज्य से नरेंद्र मोदी के लिए बड़ा खतरा, सरकार को घेरने मंदसौर से दिल्ली आएंगे 30 राज्यों के किसान

अखिल भारतीय किसान संघर्ष-समन्वय समिति के बैनर तले 30 राज्यों के किसान 6 जुलाई को मंदसौर से दिल्ली के लिए पदयात्रा शुरू करेंगे।
नई दिल्ली के जंतर मंतर पर भूमि अधिग्रहण विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन करते देश भर से आए किसान। (फोटो: एपी)

17 जुलाई से शुरू होने जा रहे संसद के मानसून सत्र में सदन के अंदर से लेकर बाहर तक हंगामा होने वाला है। 30 राज्यों के किसान कर्जमाफी, न्यूनतम समर्थन मूल्य, बिजली बिल माफी और फसल बीमा की मांग पर नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करने वाले हैं। गौर करने वाली बात यह है कि सरकार के खिलाफ उठ रही ये आवाज बीजेपी शासित मध्य प्रदेश के शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा किसानों पर की गई फायरिंग के बाद उठ रही है। पिछले दिनों किसान आंदोलन की गवाह बने मंदसौर से दिल्ली तक किसान अपनी मांगों के समर्थन में पदयात्रा करने वाले हैं। यह पदयात्रा अखिल भारतीय किसान संघर्ष-समन्वय समिति के बैनर तले आयोजित की गई है।

समाजवादी राजनेता और पूर्व विधायक डॉ. सुनील राम ने न्यूज 18 से बातचीत में कहा कि अखिल भारतीय किसान संघर्ष-समन्वय समिति के बैनर तले 30 राज्यों के किसान 6 जुलाई को मंदसौर से दिल्ली के लिए पदयात्रा शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों की मुख्य मांगों में कर्ज माफी, बिजली बिल माफी, सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा और सभी फसलों के लिए बीमा योजना शामिल है। बता दें कि मध्य प्रदेश के मुलतई में 1998 में किसान संघर्ष में 19 किसानों की पुलिस फायरिंग में मौत हो गई थी। इस आंदोलन में पूर्व विधायक डॉ. सुनील राम ने अहम भूमिका निभाई थी। वो अन्ना हजारे के एंटी करप्शन मूवमेंट में भी शामिल थे।

किसान नेता सुनील राम इस बात पर खुशी जाहिर करते हैं कि अब देशभर के किसान कर्जमाफी और एमएसपी के मुद्दे पर एकजुट होकर खड़े हो रहे हैं। 1998 के मुलतई किसान हिंसा और हाल ही में हुई मंदसौर हिंसा को एक जैसा बताते हुए पूर्व विधायक ने कहा कि पिछले 19 वर्षों में हालात में कुछ भी बदलाव नहीं आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि साल 1998 में भी किसानों पर मुकदमे कर दिए गए थे और इस बार भी करीब एक हजार किसानों को मुकदमों में फंसा दिया गया है।

किसान नेता ने आरोप लगाया है कि मंदसौर हिंसा के बाद राज्य की बीजेपी सरकार जिस तरह से किसानों के साथ पेश आ रही है, वह लोकतांत्रिक मूल्यों को खत्म करने वाला है। उन्होंने कहा कि 1998 में किसान आंदोलन के बाद बीजेपी के बड़े नेता अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी समेत कई लोग किसानों का साथ देने के लिए पहुंचे थे लेकिन इस बार बीजेपी सरकार ने राहुल गांधी समेत किसी को भी वहां पहुंचने नहीं दिया।

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