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11 साल की बच्‍ची भोपाल में चलाती है लाइब्रेरी, पता चला तो खुद सीएम देकर गए 2 लाख का चेक

अगर मुस्कान जैसी सोच और प्रयास अन्य लोग भी करेंगे तो बहुत ही जल्द समाज में एक बदलाव आ सकता है।
मुस्कान को चेक देते हुए शिवराज सिंह ने कहा कि जितना हो सकेगा सरकार मुस्कान के इस कार्य में उसकी हर प्रकार से सहायता करेगी। (Photo Source: Video Grab)

जिस उम्र में बच्चे खेलते-कूदते हैं वहां मध्य प्रदेश के भोपाल की रहने वाली 11 साल की एक बच्ची ने झुग्गी के बच्चों के लिए एक छोटी सी लाइब्रेरी खोली है। इस बच्ची का नाम मुस्कान अहिरवार जो कि पांचवीं कक्षा में पढ़ती है। भोपाल की झुग्गियों में रहते हुए मुस्कान ने पाया कि ज्ञान का प्रचार करने के लुए किताबों के अलावा और कोई साधन नहीं है। मुस्कान की इस लगन के बारे में सूबे के सीएम शिवराज सिंह चौहान को जब पता चला तो उन्होंने मुस्कान को 2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता की ताकि वह एक अच्छी सी लाइब्रेरी खोल सके। बुधवार को शिवराज सिंह चौहान ने मुस्कान से उसके घर पहुंचकर मुलाकात की और उसे दो लाख रुपए का चेक प्रदान किया।

एक अधिकारी ने बताया कि इस बच्ची के पढ़ाई के प्रति प्रेम और अपने साथ के झुग्गी में रहने वालों को पढ़ाने के लिए इतना साहस देख जल्द ही उसके लिए एक कमरे की लाइब्रेरी का निर्माण किया जाएगा। अगर मुस्कान जैसी सोच और प्रयास अन्य लोग भी करेंगे तो बहुत ही जल्द समाज में एक बदलाव आ सकता है। मुस्कान को चेक देते हुए शिवराज सिंह ने कहा कि जितना हो सकेगा सरकार मुस्कान के इस कार्य में उसकी हर प्रकार से सहायता करेगी। इसकी शुरुआत उस समय हुई जब राज्य शिक्षा बोर्ड के कुछ अधिकारी झुग्गी में किताबें बांटने के लिए गए थे। वहां उन्होंने पाया कि किताब को साझा कर पढ़ने के मामले में सबसे ज्यादा जिज्ञासा उन्हें मुस्कान के अंदर दिखाई दी। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार बोर्ड अधिकारियों ने अन्य छात्रों को पढ़ाने की जिम्मेदारी मुस्कान को सौंपी जिसे उसने खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया था।

मुस्कान ‘बाल पुस्तकालय’ के नाम से एक छोटी सी लाइब्रेरी चला रही है। पहले उसके पास केवल 25 किताबें थी लेकिन अब उसकी लाइब्रेरी में एक हजार किताबें हैं। मुस्कान के पिता की पिछले महीने 7 जुलाई को मौत हो गई थी जिसके बाद उसे लगा कि वह इस लाइब्रेरी को आगे नहीं चला पाएगी लेकिन सीएम द्वारा मदद किए जाने के बाद उसको काफी हिम्मत मिली है। मुस्कान का कहना है कि अब कोई भी चीज उसे नहीं रोक सकती है। मुस्कान ने कहा कि पापा हमेशा कहते थे कुछ बड़ा करो। पापा चाहते थे कि मैं डॉक्टर बनूं। मुस्कान की इस लाइब्रेरी में रोजाना करीब 20 से 25 बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं। कई बच्चे किताब घर ले जाकर पढ़ते हैं और फिर वे वापस देकर चले जाते है।

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