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फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर आठ साल से सांसद हैं भाजपा की ज्योति धुर्वे, शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं

ज्योति धुर्वे अनुसूचित जन जाति के लिए आरक्षित बैतुल सीट से साल 2014 में दूसरी बार लोकसभा सांसद चुनी गई हैं।
31 अक्टूबर 2002 को बैतूल के भैंसदेही ब्लॉक से ज्योति धुर्वे का जाति प्रमाण पत्र जारी हुआ था।

मध्य प्रदेश के बैतुल से लोकसभा सांसद ज्योति धुर्वे की संसद सदस्यता खतरे में पड़ गई है। उनका जाति प्रमाण पत्र फर्जी निकला है। उनके जाति प्रमाण पत्र की जांच के लिए गठित राज्य स्तरीय समिति ने उनके अनुसूचित जन जाति होने के प्रमाण पत्र को खारिज कर दिया है और बैतुल के जिलाधिकारी को सांसद के खिलाफ कार्रवाई करने की अनुशंसा की है। अगर राज्य सरकार ने समिति की सिफारिश मानते हुए जाति प्रमाण पत्र रद्द कर दिया तो धुर्वे की लोकसभा सदस्यता खतरे में पड़ सकती है।

कई बार नोटिस देने के बाद एक अप्रैल 2017 को सांसद समिति के सामने हाजिर हुई थीं लेकिन वो अनुसूचित जनजाति के तहत आने वाली गोंड समुदाय से होने का प्रमाण समिति के सामने पेश नहीं कर सकीं। समिति की रिपोर्ट के मुताबिक सांसद के सभी दस्तावेजों में पिता की जगह पति प्रेम सिंह धुर्वे का नाम लिखा है।

गौरतलब है कि ज्योति धुर्वे अनुसूचित जन जाति के लिए आरक्षित बैतुल सीट से साल 2014 में दूसरी बार लोकसभा सांसद चुनी गई हैं। इससे पहले वो 2009 में यहां से पहली बार लोक सभा सांसद चुनी गई थीं। उसी वक्त उनकी जाति को लेकर धुर्वे के खिलाफ उतरे निर्दलीय प्रत्याशी शंकर पेंदाम ने धुर्वे की फर्जी जाति प्रमाण पत्र होने की शिकायत दर्ज कराई थी। उस वक्त पांच साल के अंदर उनकी शिकायत पर सुनवाई पूरी नहीं हो सकी, लिहाजा शिकायत रद्द हो गई लेकिन जब धुर्वे दोबारा 2014 में चुनाव जीतीं तो फिर से इसकी शिकायत की गई। इसके बाद मामले की छानबीन के लिए राज्य स्तरीय जांच कमेटी बनाई गई, जिसने अपनी जांच में सांसद के जाति प्रमाण पत्र को फर्जी करार दिया है।

सूत्रों के मुताबिक ज्योति धुर्वे के पिता बालाघाट जिले के निवासी और पवार जाति से ताल्लुक रखते थे लेकिन ज्योति की शादी बैतुल जिले के निवासी प्रेम धुर्वे से हुई जो गोंड जाति से आते हैं। इन्हीं की जाति के आधार पर ज्योति धुर्वे का जाति प्रमाण पत्र 31 अक्टूबर 2002 को बैतूल के भैंसदेही प्रखंड से जारी हुआ है।

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