December 08, 2016

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अस्‍पताल में भर्ती सोहराबुद्दीन शेख के भाई का आरोप- वीएचपी नेता ने की जान लेने की कोशिश

रबाबुद्दीन शेख और उनके सुरक्षा गार्ड का उज्जैन के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।

Author November 3, 2016 11:17 am
सोहराबुद्दीन शेख के भाई रबाबुद्दीन शेख की फाइल फोटो (photo- Indian Express)

फर्जी पुलिस मुठभेड़ में मारे गए गैंगेस्टर सोहराबुद्दीन शेख के भाई रुबाबुद्दीन शेख और उनके अंगरक्षक अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं। शेख का आरोप है कि विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के स्थानीय नेता भैरूलाल टांक और उनके समर्थकों ने उज्जैन में उन पर हमला किया था।रबाबुद्दीन और टांक गोरक्षा अभियान चलाते हैं। दोनों ही को सुरक्षा के लिए पुलिस गार्ड दिया गया है। टांक और 19 अन्य लोगों पर हत्या की कोशिश, घर में जबरन घुसने और दंगा करना का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार ये सोमवार (31 अक्टूबर) को कुंदन यादव नामक एक टेलर के घर शाम चार बजे ये घटना हुई।

रबाबुद्दीन ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि वो यादव को दिवाली की बधाई देने गए थे लेकिन वीएचपी नेता ने उनके उस इलाके में जाने पर आपत्ति की। रबाबुद्दीन ने आरोप लगाया कि टैंक ने उन्हें बुरी तरह पीटा और हवा में गोली भी चलाई। रबाबुद्दीन के अनुसार पिटाई के कारण उनका कृत्रिम पैर बाहर निकल गया था। वो और उनका गार्ड इस समय उज्जैन के एक निजी अस्पताल में अपना इलाज कर रहा हैं।

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जहां कथित घटना हुई वो इलाका उज्जैन के नागड़ा थाने के तहत आता है। नागड़ा थाने के प्रमुख अजय कुमार वर्मा ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। वर्मा के अनुसार ये मामले संपत्ति के विवाद से जुड़ा हुआ है। यादव जिस घर में रहते हैं वो उन्होंने टांक से खरीदा है। टांक उस घर को खाली कराना चाहते हैं। इस मामले में रबाबुद्दीन के दखल देने से दोनों पक्षों में मारपीट हुई। वर्मा के अनुसार इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि टांक ने हवा में गोली चलाई थी।

सीबीआई के मुताबिक, गुजरात एटीएस ने गैंगस्‍टर सोहराबुद्दीन शेख और उसकी पत्‍नी कौसर बी की उस वक्‍त कर दी थी जब वे पुलिक निगरानी में हैदराबाद से महाराष्‍ट्र के सांगली जा रहे थे। यह फर्जी एनकाउंटर 26 नवंबर 2005 को गांधी नगर के पास हुआ था। मामले में कई पुलिस अधिकारियों समेत गुजरात के तत्कालीन गृह मंत्री और बीजेपी नेता अमित शाह भी आरोपी बनाए गए थे। साल 2012 में सीबीआई ने शाह समेत गुजरात के टॉप पुलिस ऑफिसरों के खिलाफ जांच शुरू की। साल 2014 में शाह को सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस में आरोपमुक्त कर दिया गया था। मुंबई की एक कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि शाह के खिलाफ कोई सबूत नहीं है और उन्हें राजनीतिक कारणों से फंसाया गया।

अमित शाह को बरी किए जाने के खिलाफ सोहराबुद्दीन शेख के भाई रुबाबुद्दीन ने अदालत के फैसले पर हैरानी जताते उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी लेकिन कुछ समय बाद उसने कोर्ट से कहा था कि वह फैसले के खिलाफ दायर याचिका वापस लेना चाहता है। अदालत ने उसे याचिका वापस लेने पर फिर से विचार करने के लिए एक महीने का वक्त दिया था। एक महीने बाद भी रबाबुद्दान याचिका वापस लेने के फैसले पर कायम रहा और उनसे अमित शाह को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ याचिका वापस ले ली।

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First Published on November 3, 2016 9:57 am

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