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मध्य प्रदेश पुलिस की ‘गोभक्ति’, 6 जवानों की लगाई सुबह से शाम तक गाय चराने की ड्यूटी

एमपी के नरसिंहपुर जिले के गोटोगांव के जवानों को गाय चराने की जिम्मेदारी दी गई थी। दरअसल पिछले दिनों जिले की पुलिस ने करीब 1100 गोवंश को तीन लोगों के कब्जे से छुड़ाया था।
मध्य प्रदेश में पुलिस वालों को मिली गाय चराने की जिम्मेदारी (प्रतिकात्मक तस्वीर)

खाकी वर्दी वालों पर राज्य की कानून-व्यवस्था को बनाए रखने और अपराधियों को पकड़ने की जिम्मेदारी होती है, लेकिन मध्यप्रदेश में एक मामला सामने आया है, जहां पुलिसवालों को अपराधियों को पकड़ने के अलावा गाय चराने की भी जिम्मेदारी दी गई। एमपी के नरसिंहपुर जिले के गोटोगांव के जवानों को गाय चराने की जिम्मेदारी दी गई थी। दरअसल पिछले दिनों जिले की पुलिस ने करीब 1100 गोवंश को तीन लोगों के कब्जे से छुड़ाया था। इन गौवंशों को रखने के लिए काजी हाउस और गौशाल में रखने की जगह नहीं थी। ऐसे में इनके के लिए चारे की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी पुलिस पर आ गई है। आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक गोटे गांव के थाना प्रभारी ने बताया कि इस काम के लिए 6 जवानों को लगाया गया है। ये जवान सुबह जानवरों को जंगल में लेकर जाते हैं और शाम को 4.30 बजे वापस आते हैं। उन्होंने बताया कि हम यह सब मजबूरी में कर रहे हैं इतनी गायों के लिए खाने-पीने का इंतजाम करना आसान नहीं है।

गौरतलब है कि पुलिस जवानों को जानवरों की ड्यूटी पर लगाने के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री आजम खान की भैंस चोरी हो गई थी। कैबिनेट मंत्री की भैंस की तलाश में जिले की पूरी पुलिस लगा दी गई थी। काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने आजम खान की भैंसों को ढ़ूंढ निकाला था। हालांकि इस मामले के सामने आने के बाद विपक्षी पार्टियों ने सरकार पर निशाना साधा था। 31 जनवरी 2014 को रामपुर में पसियापुरा स्थित डेयरी फार्म से आजम की 7 भैंसें चोरी हुई थीं। वारदात पर तुरंत संज्ञान लेते हुए पुलिस ने कार्रवाई की और 24 घंटे बाद ही, 1 फरवरी की रात पुलिस ने भैंसें बरामद भी कर ली थी। आजम की भैंस चोरी के इस मामले ने 2014 लोकसभा चुनाव के अंदर खूब चर्चा बंटोरी थी।

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