December 08, 2016

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मप्र सरकार को 2014 में ही मिल गई थी भोपाल जेल को लेकर चेतावनी

पूर्व मध्य प्रदेश आईजी (जेल) जी.के. अग्रवाल ने सरकार को जेल का बेकार बिल्डिंग स्ट्रक्चर, गलत सुरक्षा व्यवस्था और स्टाफ की दुर्दशा के बारे में सूचित किया था, उन्होंने कहा था कि जेल प्रशासन स्टाफ की कमी से भी जूझ रहा है।

भोपाल की सेंट्रल जेल के बाहर तैनात सिपाही। (Photo: PTI)

भोपाल की सेंट्रेल जेल से फरार होने के बाद पुलिस मुटभेड़ में मार गिराए गए सभी 8 सिमी सदस्यों के मामले में नया खुलासा हुआ है। जानकारी के मुताबिक, एक रिटायर्ड जेल प्रमुख ने मध्य प्रदेश सरकार को 2014 में ही सेंट्रल जेल की खराब स्थिति को लेकर चेतावनी दे दी थी। पूर्व मध्य प्रदेश आईजी (जेल) जी.के. अग्रवाल ने सरकार को जेल का बेकार बिल्डिंग स्ट्रक्चर, गलत सुरक्षा व्यवस्था और स्टाफ की दुर्दशा के बारे में सूचित किया था, उन्होंने कहा था कि जेल प्रशासन स्टाफ की कमी से भी जूझ रहा है। हमारे सहयोगी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में जीके अग्रवाल ने इस बारे में विस्तार से बताया। अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में उस समय के स्टेट चीफ सेक्रेटरी एंथोनी डेसा को 26 जून 2014 में एक लेटर लिखा था। इस पत्र की कॉपी उन्होंने नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल और इंटेलिजेंस ब्यूरो को भी भेजी थी।

जी. के. अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने यह लेटर 2013 में भोपाल की खांडवा जेल से फरार हुए 6 सिमी सदस्यों की घटना के कुछ महीने बाद ही लिखा था, लेकिन इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई। अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने जेल अधिकारियों से मीटिंग बुलाने की भी मांग की थी, जिसमें वह जेल से कैदियों के फरार होने जैसी घटनाओं से बचने के लिए कुछ सुझाव देते, लेकिन मीटिंग को लेकर किसी ने प्रतिक्रिया नहीं दी। अग्रवाल ने वह लेटर भी दिखाया जो उन्होंने सरकार को लिखा था। पत्र में लिखा है, “इस समय सभी जेलों के सिमी सदस्यों को भोपाल सेंट्रल जेल में रखा गया है। लेकिन इस जेल की बिल्डिंग स्ट्रक्चर से लेकर, गलत सुरक्षा व्यवस्था और स्टाफ की दुर्दशा को देखते हुए यह मान लेना बिलकुल गलत होगा कि सब कुछ ठीक रह सकता है। यहां कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है।”

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2000 में रिटायर हुए अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझते हुए स्थिति से अवगत कराना जरूरी समझा था। अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने यह लेटर को उस समय जेल प्रशासन को भी भेजा गया था। हालांकि डीजी (जेल) संजय चौधरी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह ऐसे किसी पत्र के बारे में नहीं जानते। बता दें कि सिमी के 8 सदस्य सोमवार तड़के ड्यूटी पर मौजूद हेड कॉन्स्टेबल को मारकर भोपाल की सेन्ट्रल जेल से फरार हो गए थे। तड़के तीन से चार बजे के बीच सिमी के आठ सिमी सदस्यों ने बैरक तोड़ने के बाद हेड कांस्टेबल रमाशंकर की हत्या कर दी थी। इसके बाद ओढ़ने के काम आने वाली चादर की रस्सी बनाकर आतंकी दीवार फांदकर फरार हो गए। सोमवार दोपहर सभी 8 सदस्यों को पुलिस ने एक मुठभेड़ में मार गिराया था। भोपाल के बाहरी इलाके में इंटखेडी गांव के पास पुलिस के जवानों ने सिमी के इन सदस्यों को ढेर किया था। पुलिस ने बताया कि फरार कैदियों के पास हथियार भी थे। आतंकियों की फायरिंग के बदले पुलिस ने आत्मरक्षा में फायरिंग की और क्रॉस फायरिंग में सभी फरार कैदी मारे गए।

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First Published on November 2, 2016 7:52 am

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