December 08, 2016

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औपनिवेशिक मन से आजादी के लिए ‘लोकमंथन’

भारतीय नीति प्रतिष्ठान के निदेशक ने संकेत दिए कि यह मंच भारत के भूगोल से बाहर भी अस्तित्व रखेगा।

Author नई दिल्ली | November 8, 2016 03:16 am
संघ विचारक राकेश सिन्हा।

भोपाल में गुनगुनी ठंड के बीच राष्ट्रवादी मन तैयार करने के लिए गरमागरम बहस का मंच तैयार हो चुका है। जयपुर लिटरेरी फेस्ट सरीखे अंग्रेजीदां महोत्सवों के बरक्स एक ऐसा सालाना वैचारिक मंच तैयार किया गया है, जो राष्ट्रीयता की संकल्पना और अवधारणा के तहत भारत के इतिहास, समाज, विज्ञान, भूगोल, कला को यूरोपीय आस्वाद से बाहर निकाल सके। नवउदारवाद और वैश्वीकरण के इस समय में राष्ट्रीयता का देशज पाठ तैयार हो सके। 12 से 14 नवंबर को भोपाल में राष्ट्र सर्वोपरि है पर विचारक बैठ कर ‘लोकमंथन’ करेंगे। इस कार्यक्रम में अहम हिस्सेदारी भारत भवन की भी है। आयोजकों का दावा है कि ‘लोकमंथन’ का स्वरूप पूरी तरह लोकवादी होगा और इसमें स्वतंत्र सोच रखने वालों की भी अहम भागीदारी होगी। आयोजकों ने कहा है कि वे वैचारिक अछूत की परंपरा को बेदखल करना चाहते हैं। इसमें स्वतंत्र सोच रखने वाले कई मीडियाकर्मियों और विद्वानों ने शिरकत करने की सहमति दी है।

भारत नीति प्रतिष्ठान के मानद निदेशक प्रोफेसर राकेश सिन्हा इस बड़े वैचारिक मंच को स्थापित करने की वजह बताते हुए कहते हैं कि अभी तक इस देश के बौद्धिक बहस में विदेशज चीजें हावी रही हैं। हम अपनी नजर और अपनी कलम से ही अपनी व्याख्या नहीं कर पाए हैं। भारत के इतिहास, संस्कृति, विज्ञान और कला की व्याख्या में अभी तक पश्चिमी नजरिया हावी रहा है। हम भारतीय अपनी पहचान को लेकर हीन भावना से ग्रस्त रहे हैं।

भोपाल में समाजशास्त्रियों, साहित्यकारों, इतिहासकारों, पत्रकारों, फिल्मकारों और जनप्रतिनिधियों की वैसी जमात इकट्ठी हो रही है जो चाहती है कि भारत और भारतीय समाज को पश्चिम के नजरिए से देखना बंद किया जाए। राकेश सिन्हा कहते हैं कि भारतीय भाषाओं पर अभी तक अंग्रेजी हावी रही है। वैश्विक मंच पर भारत की भावनाओं को अंग्रेजी के माध्यम से ही जाहिर किया जाता है। यह मंच उन लोगों की साझा अभिव्यक्ति का माध्यम बनेगा जो चाहते हैं कि भारतीय मन औपनिवेशिक विचारधारा से बाहर निकले। आज नवउदारवाद और वैश्विकरण के संदर्भ में राष्ट्रवाद को फिर से परिभाषित करने की जरूरत है। सिन्हा ने बताया कि ‘लोकमंथन’ का यह कार्यक्रम हर साल आयोजित किया जाएगा। इसमें भारत की परंपरा, समसामयिक सवालों पर भारतीय परिप्रेक्ष्य और भारतीय जुबान में चर्चा होगी।

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‘लोकमंथन’ का यह कार्यक्रम भारतीय नीति प्रतिष्ठान, भारत भवन और प्रज्ञा प्रवाह के साझा प्रयास से हो रहा है। वैचारिकी, बहस और संस्कृति के क्षेत्र में अब तक भारत भवन की एक खास पहचान रही है। और इस कार्यक्रम में उसकी एक अहम भूमिका है। तो क्या भारत भवन की यह बदली पहचान एक नया संदेश देगी। इस सवाल के जवाब में राकेश सिन्हा कहते हैं कि इस मंच पर साझेदारी के बाद भारत भवन की पहचान और सशक्त होगा। उनका कहना है कि देश का दुर्भाग्य है कि अब तक जितनी अहम बाकी चर्चाएं होती रही हैं उसका माध्यम अंग्रेजी ही रही है। कुलीन वर्ग के संप्रेषण का पर्याय ही अंग्रेजी बन चुका है। इसके साथ ही अब तक चलीं बहसें मार्क्सवादी विचारधारा की चौखटों से बाहर ही नहीं आ पाती थीं। ‘लोकमंथन’ एक ऐसा मंच होगा जो विचारों बहसों का समावेशीकरण करेगा। यहां सिर्फ विचारों का महत्त्व होगा। असम के चिंतक, सुदूर तमिलनाडु के विचारक सबको इस मंच पर लाया जाएगा और एक समावेशी भारत का वैचारिक चेहरा बनाया जाएगा। हमारी कोशिश होगी कि देश की प्रतिभा को सिर्फ महानगरीय चश्मे से नहीं देखा जाए।

भारतीय नीति प्रतिष्ठान के निदेशक ने संकेत दिए कि यह मंच भारत के भूगोल से बाहर भी अस्तित्व रखेगा। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई भागों में ऐसे मिलते-जुलते विचार पनप रहे हैं जो पश्चिम के वैचारिक आधिपत्य का विरोध करते हैं। लैटिन अमेरिका, अफ्रीका में कई जगहों से वैचारिक और सांस्कृतिक समानता के विचारकों को इस मंच से जोड़ने की कोशिश की जाएगी। इस बार कार्यक्रम में आॅक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से भी विचारक आ रहे हैं।‘लोकमंथन’ में राष्ट्र के निर्माण में कला, संस्कृति और इतिहास की भूमिका पर भी खास चर्चा होगी। साहित्य पर उपनिवेशवाद का प्रभाव भी चर्चा का अहम विषय है। साथ ही नए समाज में सोशल मीडिया की भूमिका भी बातचीत के दायरे में है।

भोपाल के विधानसभा हॉल में शनिवार से शुरू हो रहे कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी शिरकत करेंगे। इसके अलावा डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी, स्मृति ईरानी, मधुर भंडारकर, बिबेक देवरॉय, जाकिया सोनम, कमल किशोर गोयनका, रामबहादुर राय, स्वामी मित्रानंद, राजीव मल्होत्रा, मौलाना सैयद अनवर हुसैन दहेलवी, डेविड क्रॉले, सोनल मानसिंह, मालिनी अवस्थी, चंद्रप्रकाश द्विवेदी सहित कई अन्य लोग अपनी बात रखेंगे।

 

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First Published on November 8, 2016 3:16 am

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