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आरएसएस प्रचारक की गिरफ्तारी और पिटाई के मामले में फंसे “लापता” इंस्पेक्टर ने कहा- अब कोई उन्हें छूने की हिम्मत नहीं करेगा

आरएसएस पदाधिकारी को गिरफ्तार करने के मामले में मुश्किलों का सामना कर रहे इंस्पेक्टर जिया-उल-हक ने कहा कि मुझे लगता है कि गिरफ्तारी से उनके अहम (Ego) को ठेस पहुंची है।
Author भोपाल | October 17, 2016 08:25 am
बैहर पुलिस स्टेशन में गिरफ्तार आरएसएस नेता सुरेश यादव (Express Photo)

भोपाल। आरएसएस के पदाधिकारी को गिरफ्तार करने के मामले में मुश्किलों का सामना कर रहे इंस्पेक्टर जिया-उल-हक ने कहा कि मुझे लगता है कि गिरफ्तारी से उनके अहम (Ego) को ठेस पहुंची है लेकिन उन्होंने अब एक उदाहरण पेश किया है कि कोई पुलिस वाला उन्हें हाथ लगाने की दोबारा हिम्मत नहीं करेगा। गौरतलब है कि बालाघाट जिले में 25 सितंबर को आरएसएस के जिला प्रचारक सुरेश यादव को गिरफ्तार किया गया था। जिया-उल-हक उसी मामले में फरार चल रहे हैं, हक समेत आठ पुलिस वालों पर सुरेश यादव से मारपीट करने, हत्या का प्रयास और डकैती का मामला दर्ज हुआ है।

इंडिया एक्सप्रेस से बातचीत में हक ने कहा कि पुलिस में 90 प्रतिशत स्टाफ हिंदू है लेकिन धर्म की वजह से इस मामले को हाई लाइट किया गया। धर्म के कारण ही सांप्रदायिक स्थिति को काबू करने के समय सावधानी से पेश आता हूं। हक ने कहा कि उन पर स्थानीय चुनाव में मुस्लिम कैंडिडेट को सपोर्ट करने का आरोप भी लग चुका है। हक ने बताया कि पुलिस टीम ने यादव को उस समय गिरफ्तार किया जब उसके फोन को सीज कर लिया गया, जिससे वॉट्स एप के जरिए मैसेज भेजा गया था। यादव की पहली मेडिकल रिपोर्ट में किसी तरह की इंजरी होने की बात सामने नहीं आई थी। यादव की गिरफ्तारी के विरोध में सैकड़ों हिंदू कार्यकर्ताओं ने थाने को घेर और हिंदुवादी नारे लगाए जाने लगे। उनकी मांग थी कि मुझे उनके हवाले किया जाए और मेरा नाम लेकर मुझे पाकिस्तान भेजने की बात कर रहे थे।

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इस मामले पर हक ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पुलिस डिपार्टमेंट हमारे साथ नहीं खड़ा हुआ बल्कि मंत्रियों का फोन यादव के पास आ रहा था। मुझे पुलिस फोर्स और एसआईटी टीम पर भरोसा नहीं है। हक ने कहा कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरे साथ कुछ ऐसा होगा।

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गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर मुस्लिमों के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट करनेवालों के खिलाफ कार्रवाई करने पर पुलिसवालों को ही परेशान करने का मामला सामने आया है। जिन पुलिसवालों ने संघ नेता को गिरफ्तार किया था उनपर ही हत्या की कोशिश, लूट, जोर-जबर्दस्ती करने और आपराधिक धमकी देने जैसे कई संगीन आरोप लगे हैं। वाकया मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले का है, जहां 26 सितंबर को पुलिस ने संघ कार्यकर्ता सुरेश यादव को व्हाट्स अप पर आपत्तिजनक पोस्ट करने पर गिरफ्तार किया था। जब पुलिवालों ने यादव को गिरफ्तार किया था तब संघ कार्यकर्ताओं ने धमकी देते हुए कहा, “तुम्हें पता नहीं, तुम किसे हाथ लगाने का दुस्साहस कर रहे हो। हम मुख्यमंत्री को पद से हटा सकते हैं, यहां तक कि प्रधानमंत्री को भी। हम सरकार बना सकते हैं और गिरा भी सकते हैं। तुम्हारी कोई औकात नहीं। अगर हम तुम्हारी वर्दी उतरवाने में असफल रहे तो संघ छोड़ देंगे।”

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  1. निर्भय कुमार
    Oct 17, 2016 at 9:09 am
    JANSATTA TO PROSUTE HAI HI LEKIN EN DOGALE MULLO KO AAPNE BACHAV YE YHI TARAK SAHI BAITHATA HAI JAISE MAN NE KAHAN MUJHE MUSLIM HONE KE KARAN FASA RAHI HAI KUCH OR PROSUTO NE BOLA THA KI MUJHE MUSLIM HONE KI SAJA MILI HMESA SURAPA HI KARENE RSS KE LOGO ITNA HOTE TO TO AB TAK KERLA OR KARNATKA BANGAL ME ITANI HATYA HO CHUKI HAI HINDU RSS KE LOGO KI KI AB TAK WAHAN RASTRAPATI SASAN LAG CHUKA HOTA ...
    (1)(0)
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    1. अनुज, बालाघाट
      Oct 17, 2016 at 5:45 am
      प्रिय संपादक महोदय, पुलिस ने सुरेश यादव को गिरफ्तार कम किया, उनकी सड़क से लेकर थाने तक पिटाई ज्यादा लगायी... ऐसी गिरफ्तारी पहले कभी नहीं देखी गयी है. किसी खूंखार अपराधी के साथ भी ऐसी बर्बरता पुलिस ने नहीं की होगी. अगर सुरेश यादव का कोई दोष था तो उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाता... सड़क से थाने तक दौड़ा दौड़ा कर पीटने का क्या अर्थ हुआ? ये महाशय जो बोल रहे हैं, क्या इस सबकी इन्होने कोई रिकॉर्डिंग करायी है? क्योंकि संवेदनशील माों में पुलिस रिकॉर्डिंग कराती है...
      (2)(0)
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      सबरंग