December 09, 2016

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भोपाल सिमी मुठभेड़: विपक्ष के सवालों पर भाजपा ने की निंदा, पुलिस अपने बयान पर कायम

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि एनआईए की जांच अदालत की निगरानी में होनी चाहिए।

Author भोपाल/नई दिल्ली | November 1, 2016 20:22 pm
भोपाल केंद्रीय कारा से भागे सिमी के 8 आतंकियों को अचरपुर गांव के नजदीक पुलिस और एटीएस की संयुक्त काररवाई में मार गिराया गया। आतंकियों के शवों के साथ पुलिस और एटीएस के जवान। (PTI Photo/31 Oct, 2016)

भोपाल में जेल से भागे सिमी के आठ सदस्यों के मुठभेड़ में मारे जाने की घटना पर हो रहीं आलोचनाओं के बीच पुलिस ने मंगलवार (1 नवंबर) को कहा कि यह सही मुठभेड़ थी, वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा अन्य भाजपा नेताओं ने कहा कि घटना को राजनीतिक और सांप्रदायिक रंग देने के प्रयास निंदनीय हैं। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि एनआईए की जांच अदालत की निगरानी में होनी चाहिए और उन्होंने इस मामले में अलग न्यायिक जांच की मांग दोहराते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में केवल सिमी के विचाराधीन कैदी और मुस्लिम कैदी ही जेल तोड़कर भागने की घटनाओं में क्यों शामिल हैं। बसपा अध्यक्ष मायावती, माकपा और राजद ने भी मुठभेड़ के मामले में न्यायिक जांच की वकालत की वहीं सामने आए वीडियो क्लिप समेत कुछ सबूतों के मद्देनजर आधिकारिक बयानों पर आपत्ति जताई। दिग्विजय सिंह ने कहा, ‘क्या वजह है कि जेल तोड़कर भागने की घटना में सिमी के कार्यकर्ता, जो मुस्लिम हैं, वहीं शामिल हैं और हिंदू कैदी नहीं। इससे पहले खंडवा जेल में भी यह हुआ था और अब भोपाल में।’ सिमी कार्यकर्ताओं के वकील परवेज आलम ने मुठभेड़ में लोगों के मारे जाने को नृशंस हत्याएं होने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके परिवारों ने सीबीआई जांच की मांग के लिए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जाने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, ‘मारे गए लोगों के परिवार मेरे पास आये और वे न्याय के लिए बुरी तरह रो रहे हैं। हम पूरे घटनाक्रम में सीबीआई जांच के लिए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जा रहे हैं।’ आलम ने बताया, ‘टीवी के फुटेज दिखा रहे हैं कि पुलिस और एटीएस गोलियां चला रही हैं। आरोपियों द्वारा गोलीबारी करने का कोई प्रमाण नहीं है। यह फर्जी मुठभेड़ एवं नृशंस हत्याएं हैं।’

उन्होंने पुलिस के इन दावों को चुनौती दी कि कैदी जेल से भाग गए थे और उनके पास हथियार थे। हालांकि महानिरीक्षक योगेश चौधरी पुलिस के बयान पर अडिग रहे और कहा कि यह सही मुठभेड़ थी। उन्होंने कहा कि वे वीडियो या अन्य साक्ष्यों की विश्वसनीयता की जांच करेंगे। चौधरी ने कहा, ‘मैं दोहराना चाहूंगा कि हमने इन लोगों से चार पिस्तौल सरीखे हथियार और तीन धारदार हथियार जब्त किए हैं। हमने 315 बोर की दो देसी पिस्तौल और 12 बोर के दो कट्टे भी जब्त किये जिनसे करीब छह गोलियां चलाई गईं।’ उन्होंने कहा कि पुलिस इस बात की जांच करेगी कि क्या सिमी के लोगों को कोई बाहरी मदद मिली थी। चौधरी ने कहा, ‘जांच का मुख्य बिंदु और रोडमैप यह है कि देर रात के बाद 2 से 3 बजे और सुबह 10:30 से 11:30 बजे, जब वास्तव में मुठभेड़ हुई, इस बीच क्या हुआ और उन्हें कहां से मदद मिली। क्या उन्हें कोई बाहरी मदद मिली या उनके पास खुद कुछ था। यह जांच का मुख्य बिंदु है।’ आलोचकों को जवाब देते हुए मुख्यमंत्री चौहान और केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने आरोप लगाया कि कुछ नेता और पार्टियां ‘गंदी राजनीति’ कर रहे हैं और देश की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। सिंह ने कहा कि मारे गए लोग खूंखार आतंकवादी थे।

सरकार और भाजपा ने कहा कि तथ्य तो जांच के बाद ही स्पष्ट रूप से सामने आएंगे, लेकिन सुरक्षा और सशस्त्र बलों की कार्रवाई पर संदेह नहीं जताया जाना चाहिए क्योंकि इससे उनका मनोबल गिरता है। उन्होंने सभी से राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर एक स्वर में बोलने को कहा। सिमी के आठ सदस्य सोमवार (31 अक्टूबर) तड़के भोपाल की अति सुरक्षा वाली केंद्रीय जेल से भागने के कुछ घंटे बाद भोपाल के बाहरी इलाके में पुलिस के साथ कथित मुठभेड़ में मारे गए थे। घटना के बाद चैनलों पर कथित रूप से मुठभेड़ का एक वीडियो चलने लगा जिसमें पुलिसकर्मियों को करीब से एक आदमी को गोली मारते देखा जा सकता है। इसके बाद विवाद शुरू हो गया। बसपा अध्यक्ष मायावती ने मध्य प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार संघ के एजेंडे को पूरा करने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने घटना की न्यायिक जांच की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में राजनीतिक और सांप्रदायिक मकसद के लिए पुलिस का दुरुपयोग किया जाता है। मायावती ने एक बयान में कहा, ‘सिमी से जुड़े आठ कैदी निहत्थे थे। उन्हें आसानी से दोबारा गिरफ्तार किया जा सकता है लेकिन इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किया गया। प्रथमदृष्टया मामला संदिग्ध लगता है और मुठभेड़ के पूरे घटनाक्रम की न्यायिक जांच होनी चाहिए।’

दिग्विजय सिंह ने कहा कि 2013 में भी खंडवा जेल से सिमी कार्यकर्ता भागे थे। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के मुख्य सचिव को जेल तोड़कर भागने की आशंका संबंधी जानकारी दी गयी थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गयी और 31 अक्तूबर को घटना घट गयी। अपने बयानों की आलोचनाओं के बीच दिग्विजय ने यह भी कहा, ‘धर्म के नाम पर समाज को बांटकर राजनीति करने वाले सभी लोगों के मैं खिलाफ हूं जिसमें एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी भी हैं।’ राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने भी मांग की कि मुठभेड़ की जांच कर पता लगाना चाहिए कि यह फर्जी तो नहीं थी। माकपा पोलितब्यूरो ने एक बयान में कहा कि पुलिस के दावे राज्य के गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह के बयान के विरोधाभासी हैं। पोलितब्यूरो ने न्यायिक जांच की मांग की जिसकी अगुवाई कोई सेवारत न्यायाधीश करें। पार्टी महासचिव सीताराम येचुरी ने ट्विटर पर कहा कि केंद्र और भाजपा को राज्य सरकार को उसकी कार्रवाई के लिए जिम्मेदार ठहराना चाहिए। माकपा के पूर्व महासचिव प्रकाश करात ने कहा कि जिस तरह से ये आठ लोग जेल से भागे, उनका पता चल गया और उन्हें मार दिया गया, वह दिखाता है कि यह सामान्य मामला नहीं है। उन्होंने कहा, ‘इसलिए पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। स्वतंत्र न्यायिक जांच होनी चाहिए।’

भाकपा ने एक बयान में कहा, ‘लोगों का ध्यान बांटने और सांप्रदायिक आधार पर उनका ध्रुवीकरण करने के लिए भाजपा-आरएसएस राष्ट्रवाद और देशभक्ति का राग अलापते हैं तथा दूसरों को जिम्मेदार ठहराते हैं।’ सूचना और प्रसारण मंत्री नायडू ने कहा, ‘मुझे समझ नहीं आता कि कुछ लोग आतंकवादियों को लेकर इतने चिंतित क्यों हैं। कुछ लोगों को सिमी की फिक्र है, कुछ लोगों को जेल से भाग गये लोगों की चिंता है।’ उन्होंने कहा, ‘ये लोग (विपक्षी) ऐसे लोगों के प्रति अधिक चिंता दिखा रहे हैं जो कानून तोड़ते हैं जबकि भारत की सुरक्षा के बारे में चिंता जताई जानी चाहिए।’ एक और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, ‘मैं सभी लोगों से अपील करूंगा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में एक स्वर में बोलें।’

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी और उसकी अध्यक्ष सोनिया गांधी क्या दिग्विजय सिंह के विचारों से सहमत हैं। उन्होंने याद दिलाया कि जब दिग्विजय ने बटला हाउस मुठभेड़ मामले में कुछ बयान दिये थे तो किस तरह सोनिया ने उनकी राय से खुद को अलग किया था। प्रसाद ने कहा, ‘मैं इसकी निंदा करता हूं। वे इस बारे में सवाल क्यों नहीं पूछते कि जेल हवलदार को किसने मारा।’ केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने भी कहा कि पुलिस पर सवाल खड़े करना और संदेह जताना बंद होना चाहिए और केवल वीडियो के आधार पर किसी नतीजे पर नहीं पहुंचना चाहिए। भाजपा प्रवक्ता नलिन कोहली ने कहा कि लोकतंत्र में कानून का शासन सर्वोपरि है लेकिन मानवाधिकारों का महत्व भी है। इस बीच घटना के मद्देनजर गुजरात पुलिस ने भी अहमदाबाद की साबरमती जेल में सुरक्षा समीक्षा की।

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First Published on November 1, 2016 8:22 pm

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